Hemlata Soni
Hemlata Soni Aug 23, 2017

हरतालिका तीज की पूजा विधि ।।

हरतालिका तीज की पूजा विधि ।।

#हरतालिकातीज का #व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को किया जाता है। इस दिन रेत के शंकर-पार्वती बनाए जाते हैं। उनके उपर फूलों का मंडल सजाया जाता है। पूजा गृह को केले के पेड़ों से सजाया जाता है। यह निर्जल, निराहार व्रत है, जिसमें प्रसाद के रूप में फलादि ही चढ़ाए जाते हैं। व्रती स्त्रियां रात्रि जागरण कर, भजन-कीर्तन कर भगवान शिव की पूजा करती हैं। दूसरे दिन भोर होने पर नदी में शिवलिंग और पूजन सामग्री का विसर्जन करने के साथ यह व्रत संपन्न होता है।

मान्यता हैं कि मां पार्वती ने जंगल में जाकर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई सालों तक बिना पानी पिये लगातार तप किया था जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकारा था। तपस्या और निष्ठा का व्रत तपस्या और निष्ठा के साथ स्त्रियां यह व्रत रखती है, ये वर्त बड़ा कठिन है, क्योंकि ये व्रत बिना पानी के रखा जाता है। इस व्रत का खास तौर पर उत्तर भारत में विशेष मान है। कहते हैं इस व्रत को करने से सात जन्मों तक महिलाओं को उनके पति सात जन्मों तक मिलते हैं

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