aman
aman Dec 1, 2017

जय जिनेन्द्र

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Golu yadav Oct 26, 2020

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🌻 अनजाने में किये हुये पाप से मुक्ती का उपाय 🌻 🌷 श्रीमद्भागवत जी के षष्ठम स्कन्ध में , महाराज राजा परीक्षित जी ,श्री शुकदेव जी से बोले भगवन - आपने पञ्चम स्कन्ध में जो नरको का वर्णन किया ,उसको सुनकर तो गुरुवर रोंगटे खड़े जाते हैं। प्रभूवर मैं आपसे ये पूछ रहा हूँ की यदि कुछ पाप हमसे अनजाने में हो जाते हैं , जैसे चींटी मर गयी, हम लोग स्वास लेते हैं तो कितने जीव श्वासों के माध्यम से मर जाते हैं। भोजन बनाते समय लकड़ी जलाते हैं , उस लकड़ी में भी कितने जीव मर जाते हैं । और ऐसे कई पाप हैं जो अनजाने हो जाते हैं । तो उस पाप से मुक्ती का क्या उपाय है भगवन । आचार्य शुकदेव जी ने कहा -राजन ऐसे पाप से मुक्ती के लिए रोज प्रतिदिन पाँच प्रकार के यज्ञ करने चाहिए । महाराज परीक्षित जी ने कहा, भगवन एक यज्ञ यदि कभी करना पड़ता है तो सोंचना पड़ता है ।आप पाँच यज्ञ रोज कह रहे हैं । यहां पर आचार्य शुकदेव जी हम सभी मानव के कल्याणार्थ कितनी सुन्दर बात बता रहे हैं । बोले राजन पहली यज्ञ है -जब घर में रोटी बने तो पहली रोटी गऊ ग्रास के लिए निकाल देना चाहिए । दूसरी यज्ञ है राजन -चींटी को दस पाँच ग्राम आटा रोज वृक्षों की जड़ो के पास डालना चाहिए। तीसरी यज्ञ है राजन्-पक्षियों को अन्न रोज डालना चाहिए । चौथी यज्ञ है राजन् -आँटे की गोली बनाकर रोज जलाशय में मछलियो को डालना चाहिए । पांचवीं यज्ञ है राजन्- भोजन बनाकर अग्नि भोजन , रोटी बनाकर उसके टुकड़े करके उसमे घी चीनी मिलाकर अग्नि को भोग लगाओ। राजन् अतिथि सत्कार खूब करें, कोई भिखारी आवे तो उसे जूठा अन्न कभी भी भिक्षा में न दे । राजन् ऐसा करने से अनजाने में किये हुए पाप से मुक्ती मिल जाती है । हमे उसका दोष नहीं लगता । उन पापो का फल हमे नहीं भोगना पड़ता। राजा ने पुनः पूछ लिया ,भगवन यदि गृहस्त में रहकर ऐसी यज्ञ न हो पावे तो और कोई उपाय हो सकता है क्या। तब यहां पर श्री शुकदेव जी कहते हैं राजन् !, नरक से मुक्ती पाने के लिए हम प्रायश्चित करें। कोई ब्यक्ति तपस्या के द्वारा प्रायश्चित करता है। कोई ब्रह्मचर्य पालन करके प्रायश्चित करता है। कोई ब्यक्ति यम, नियम, आसन के द्वारा प्रायश्चित करता है। लेकिन मैं तो ऐसा मानता हूँ राजन्! केवल हरी नाम संकीर्तन से ही जाने और अनजाने में किये हुए पाप को नष्ट करने की सामर्थ्य है । इस लिए हे राजन् !----- सुनिए स्वास स्वास पर कृष्ण भजि बृथा स्वास जनि खोय। न जाने या स्वास की आवन होय न होय। । राजन् किसी को पता नही की जो स्वास अंदर जा रही है वो लौट कर वापस आएगी की नहीं । इस लिए सदैव हरी का जपते रहो । मैं यह निवेदन करता हूँ की, भगवान राम और कृष्ण के नाम को जपने के लिए कोई भी नियम की जरूरत नहीं होती है। कहीं भी कभी भी किसी भी समय सोते जागते उठते बैठते गोविन्द का नाम रटते रहो। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे 🙏 Զเधे Զเधे जी , जय श्री कृष्णा🌻प्रेम से बोलो ...राधे राधे 🌷

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Rajesh jain Oct 25, 2020

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***क्षमा कीजिए पिताश्री*** _एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा कि पिताजी! आप यह चिताभस्म, लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते!_ _मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में!_ _पिताजी! आप एक बार कृपा करके अपने सुंदर रूप में माता के सम्मुख आएं, जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें!_ _भगवान शिवजी मुस्कुराये और गणेशजी की बात मान ली! _कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं थी, बिखरी जटाएं और सँवरी हुई, मुंडमाला उतरी हुई थी!_ _सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते रह गए, वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी फीका पड़ जाये!_ _भगवान शिव ने अपना यह रूप कभी भी प्रकट नहीं किया था! शिवजी का ऐसा *अतुलनीय रूप* करोड़ों कामदेवों को भी मलिन कर रहा था!_ _गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले:-_ _मुझे क्षमा करें पिताजी! परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए!_ _भगवान शिव मुस्कुराये और पूछा क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों? गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा:-_ _*क्षमा करें पिताश्री! मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता!*_ _शिवजी हँसे और अपने पुराने स्वरूप में लौट आए! _*🕉️🙏नमः🙏शिवाय🔱*_ _*पौराणिक ऋषि इस प्रसंग का सार स्पष्ट करते हुए कहते हैं......*_ _आज भी ऐसा ही होता है पिता रुद्र रूप में रहता है क्योंकि उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियों, उसके रक्षण, मान सम्मान का ख्याल रखना होताषहै तो थोड़ा कठोर रहता है..._ _और माँ सौम्य, प्यार लाड़, स्नेह उनसे बातचीत करके प्यार देकर उस कठोरता का बैलेंस बनाती है।। इसलिए सुंदर होता है *माँ का स्वरूप।।*_ _*🙏प्रेम से बोलिए❤हर-हर महादेव🔱*_ *पिता के ऊपर से भी जिम्मेदारियों का बोझ हट जाए तो वो भी बहुत सुंदर दिखता है ।*💐🥭🥭💐🙏🙏🙏🙏🙏🙋‍♀️🙋‍♀️🙋‍♀️☕

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Rajesh jain Oct 25, 2020

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sandip ji Maharaj Oct 25, 2020

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Golu yadav Oct 24, 2020

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