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Jay Shree Krishna
Jay Shree Krishna Jun 13, 2019

🌸 ॥ ॐ नमो नारायण ॥ 🌸

🌸 ॥ ॐ नमो नारायण ॥ 🌸

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Sudhir Rai Jun 13, 2019
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

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TR. Madhavan Jun 17, 2019

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विश्व के सबसे बड़े पांच धर्म हैं:- हिंदुत्व, ईसाईयत, इस्लाम, बुद्धिज़्म और जुडिस्म (यहूदी धर्म)... इन सभी धर्मो को अधिकारिक रूप से मानने वाला कोई ना कोई देश अवश्य है... अर्थात इन देशों ने अपने संविधान में अपना एक राष्ट्रीय धर्म (state religion) माना है। जैसे कि:- #ईसाईयत: इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, जर्मनी, डेनमार्क, आइसलैंड, नॉर्वे, फ़िनलैंड, सायप्रस, ग्रीस, अर्जेंटीना, बोलीविया, कोस्टारिका, अल साल्वाडोर, माल्टा, मोनाको, स्लोवाकिया, स्विट्ज़रलैंड और वैटिकन सिटी ने ईसाइयत को अपने राष्ट्रीय धर्म के रूप में संविधान में जगह दी है। #इस्लाम: अफगानिस्तान, अल्जीरिया, बहरीन, बांग्लादेश, ब्रूनेई, कोमोरोस, मिस्र, ईरान, ईराक, जॉर्डन, कुवैत, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, मोरक्को, ओमान, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब, सोमालिया, ट्यूनिशिया, UAE और यमन आदि देशों ने राष्ट्रीय धर्म के रूप में इस्लाम को अपनाया। #बौद्ध_धर्म: भूटान, कम्बोडिया, श्रीलंका, थाईलैंड, चीन आदि देशों ने खुल कर बौद्ध धर्म को अपने संविधान में अपना पथ प्रदर्शक माना। #जुडिस्म (यहूदी धर्म): इजरायल देश विश्व भर से विस्थापित हो रहे अंसख्य यहूदियों के लिए एकमात्र शरणस्थली बना और फिर इजरायल ने अपने संविधान में भी अपने धर्म को जगह दी। #हिन्दू: निल बटे सन्नाटा..... पूरे विश्व में एक भी हिन्दू देश नहीं है.. (अधिकारिक रूप से).... 'हिन्दू एक देश रहित धर्म है' (Hinduism is a stateless religion)। आखिरी हिन्दू देश नेपाल था, जो कि अंततः 2006 में माओवाद की बलि चढ़ा दिया गया... यदि पूरे विश्व में कहीं कोई इसाई प्रताड़ित होता है... तो इंग्लैंड उसकी मदद को आता है। यदि कोई मुसलमान प्रताड़ित होता है तो UAE आवाज उठाता है और यदि कहीं किसी यहूदी पर अत्याचार होता है तो इजरायल बीच में आता है। लेकिन आप कहीं भी अपनी सुविधा अनुसार किसी भी हिन्दू को प्रताड़ित कर सकते हैं। कोई कुछ नहीं कहेगा। क्योंकि, जिस धर्म को अपना मानने वाला कोई देश ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में नहीं है, उस धर्म के अनुयायियों की क्या औकात है?? क्या आपको पता है... यदि पूरे विश्व में कहीं से कोई यहूदी अगर विस्थापित होता है या किसी कारणवश वह देशविहीन (stateless) हो जाता है तो वो प्राकृतिक रूप से इसराइल का नागरिक हो जाता है। इसराइल उसे बिना किसी शर्त के अपनाएगा... क्यों? क्योंकि वो उनका धर्म भाई है। क्योंकि वो यहूदी है और क्योंकि यहूदी धर्म ही उनका राष्ट्रधर्म भी है। लेकिन यदि किसी हिन्दू के साथ ऐसा कुछ होता है... तो? तो भारत तो उसे नहीं अपनाएगा... क्यों? क्योंकि उसे अपनाएगा तो फिर बांग्लादेशियों को भी अपनाओ... वाला तर्क दिया जाएगा। सवाल उठाए जाएंगे कि अगर पाकिस्तान या बंगलादेश से प्रताड़ित हिन्दुओं को अपना रहे हो तो म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या मुसलमानों को क्यों नहीं अपनाया था? ऐसे तर्क संवेधानिक रूप से सही भी होंगे, क्योंकि संविधान के अनुसार हमारे राष्ट्र का कोई धर्म नहीं है। भारत एक #धर्मनिरपेक्ष देश है, जो किसी धर्म को नहीं मानता... या यूँ भी कह सकते हैं कि हर धर्म को समान रूप से मानता है। परन्तु क्या ऐसा हकीकत में है?... बिल्कुल नहीं। क्योंकि भारत 60 वर्षो तक एक ऐसा देश बन कर रहा है, जिसे हर धर्म की पीड़ा दिखाई देती है, सिवाय हिन्दू पीड़ा के... ऐसे परिदृश्य में यदि ममता दीदी आपको कुछ आंशिक प्रतिबंधों के साथ ही सही, अगर त्यौहार मनाने की इज़ाज़त दे रही हैं, तो आप लोगों को उनका एहसान मानना चाहिए। वो तो शुक्र मनाओ, डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी का, जो संविधान में भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना गए। इसीलिए आज आपको हिन्दू त्यौहार मानने की छूट तो है, भले ही कुछ प्रतिबंधों के साथ हो। (हमारे सविंधान में हमे तोड़ने के इलावा ,जोड़ने की कोई बात नही है) मत भूलो कि आप एक देश रहित धर्म (स्टेटलेस रिलीजन) से वास्ता रखते हैं.... जय हिंदुत्व... (सिर्फ बोलने के लिय है ) इस हिंदुत्व के न आगे और न पीछे कुछ है।

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Ramesh Soni.33 Jun 17, 2019

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प्रश्नोत्तर : श्लोक संख्या १४.१० . प्रश्न १ : मनुष्य किस प्रकार प्रकृति का विशेष गुण की अवस्था प्राप्त कर सकता है ? मनुष्य वासुदेव अवस्था को किस प्रकार प्राप्त कर सकता है ? . उत्तर १ : "प्रकृति के किसी एक गुण की प्रधानता मनुष्य के आचरण में, उसके कार्यकलापों में, उसके खान-पान आदि में प्रकट होती रहती है | इन सबकी व्याख्या अगले अध्यायों में की जाएगी | लेकिन यदि कोई चाहे तो वह अभ्यास द्वारा सतोगुण विकसित कर सकता है और इस प्रकार रजो तथा तमोगुणों को परास्त कर सकता है | इस प्रकार से रजोगुण विकसित करके तमो तथा सतो गुणों को परास्त कर सकता है | अथवा कोई चाहे तो वह तमोगुण को विकसित करके रजो तथा सतोगुणों को परास्त कर सकता है | यद्यपि प्रकृति के ये तीन गुण होते हैं, किन्तु यदि कोई संकल्प कर ले तो उसे सतोगुण का आशीर्वाद तो मिल ही सकता है और वह इसे लाँघ कर शुद्ध सतोगुण में स्थित हो सकता है, जिसे वासुदेव अवस्था कहते हैं, जिसमें वह ईश्र्वर के विज्ञान को समझ सकता है | विशिष्ट कार्यों को देख कर ही समझा जा सकता है कि कौन व्यक्ति किस गुण में स्थित है |" . संदर्भ : श्रीमद्भगवद्गीता १४.१०, तात्पर्य, श्रील प्रभुपाद

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Shakuntla Jun 17, 2019

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भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी को दिया श्राप ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ हिन्दू पुराणों में ऐसी कई पौराणिक कथाएं मिलती है जिनसे सभी मनुष्यों को कोई न कोई प्रेरणा अवश्य मिलती है. भगवान विष्णु से जुड़ी हुई कहानियां किसी न किसी रूप में आज वर्तमान में भी मनुष्यों को जीवन के प्रति सकरात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित करती है. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान विष्णु ने विभिन्न अवतार, मानव कल्याण के लिए रचे थे. भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के अश्व रूप की ऐसी ही एक कहानी भागवत पुराण में मिलती है.एक बार भगवान विष्णु बैकुण्ठ लोक में लक्ष्मी के साथ विराजमान थे. उसी समय उच्चेः श्रवा नामक अश्व पर सवार होकर रेवंत का आगमन हुआ. उच्चेः श्रवा अश्व सभी लक्षणों से युक्त, देखने में अत्यंत सुन्दर था. उसकी सुंदरता की तुलना किसी अन्य अश्व से नहीं की जा सकती थी. अतः लक्ष्मी जी उस अश्व के सौंदर्य को एकटक देखती रह गई. ये देखकर भगवान विष्णु द्वारा बार-बार झकझोरने पर भी लक्ष्मी एकटक अश्व को देखती रही. तब इसे अपनी अवहेलना समझकर भगवान विष्णु को क्रोध आ गया और खीझंकर लक्ष्मी को श्राप देते हुए कहा- ‘तुम इस अश्व के सौंदर्य में इतनी खोई हो कि मेरे द्वारा बार-बार झकझोरने पर भी तुम्हारा ध्यान इसी में लगा रहा, अतः तुम अश्वी (घोड़ी) हो जाओ.’जब लक्ष्मी का ध्यान भंग हुआ और शाप का पता चला तो वे क्षमा मांगती हुई समर्पित भाव से भगवान विष्णु की वंदना करने लगी- ‘मैं आपके वियोग में एक पल भी जीवित नहीं रह पाऊंगी, अतः आप मुझ पर कृपा करे एवं अपना शाप वापस ले ले.’ तब विष्णु ने अपने शाप में सुधार करते हुए कहा- ‘शाप तो पूरी तरह वापस नहीं लिया जा सकता. लेकिन हां, तुम्हारे अश्व रूप में पुत्र प्रसव के बाद तुम्हे इस योनि से मुक्ति मिलेगी और तुम पुनः मेरे पास वापस लौटोगी’.भगवान विष्णु के श्राप से अश्वी बनी हुई लक्ष्मी यमुना और तमसा नदी के संगम पर भगवान शिव की तपस्या करने लगी. लक्ष्मी के तप से प्रसन्न होकर शिव पार्वती के साथ आए. उन्होंने लक्ष्मी से तप करने का कारण पूछा तब लक्ष्मी ने अश्व हो जाने से संबंधित सारा वृतांत उन्हें सुना दिया और अपने उद्धार की उनसे प्रार्थना की.भगवान शिव ने उन्हें धीरज बंधाते हुए मनोकामना पूर्ति का वरदान दिया.इतना कहकर भगवान शिव अंतर्धान हो गए. कैलाश पहुंचकर भगवान शिव विचार करने लगे कि विष्णु को कैसे अश्व बनाकर लक्ष्मी के पास भेजा जाए. अंत में, उन्होंने अपने एक गण-चित्ररूप को दूत बनाकर विष्णु के पास भेजा. चित्ररूप भगवान विष्णु के लोक में पहुंचे. भगवान शिव का दूत आया है, यह जानकर भगवान विष्णु ने दूत से सारा समाचार कहने को कहा. दूत ने भगवान शिव की सारी बातें उन्हें कह सुनाई.अंत में, भगवान विष्णु शिव का प्रस्ताव मानकर अश्व बनने के लिए तैयार हो गए. उन्होंने अश्व का रूप धारण किया और पहुंच गए यमुना और तपसा के संगम पर जहां लक्ष्मी अश्वी का रूप धारण कर तपस्या कर रही थी. भगवान विष्णु को अश्व रूप में आया देखकर लक्ष्मी काफी प्रसन्न हुई. दोनों एक साथ विचरण एवं रमण करने लगे. कुछ ही समय पश्चात अश्वी रूप धारी लक्ष्मी गर्भवती हो गई. अश्वी के गर्भ से एक सुन्दर बालक का जन्म हुआ. तत्पश्चात लक्ष्मी बैकुण्ठ लोक श्री हरि विष्णु के पास चली गई...

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Ajanta electric bike Jun 16, 2019

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