🎎🌲🚩वैभव लक्ष्मी व्रत की महिमा व कथा🚩🌲🎎 ==================================== 🚩🌲🌹जय मां महालक्षमी🌹🌲🚩 ⚜️🎇🍑शुभ शुक्रवार🍑🎇⚜️ 🌼🌴🌻सुप्रभात🌻🌴🌼 🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋 🎎वैभव लक्ष्मी व्रत की महिमा व कथा🎎 ☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️ 💐पूजा-उपासना तो जैसे भारतवासियों की सांसों में बसा हुआ है. शायद की ऐसा कोई दिन गुजरता होगा, जब कोई खास पूजा का संयोग न बनता हो. सप्ताह के हर दिन के अनुसार भी विशेष पूजा का विधान है. शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का व्रत रखा जाता है. इसे 'वैभव लक्ष्मी व्रत' भी कहा जाता है. 🌹 वैभव लक्ष्मी व्रत की महिमा व कथावैभव लक्ष्मी पूजा-उपासना तो जैसे भारतवासियों की सांसों में बसा हुआ है. शायद की ऐसा कोई दिन गुजरता होगा, जब कोई खास पूजा का संयोग न बनता हो. सप्ताह के हर दिन के अनुसार भी विशेष पूजा का विधान है. शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का व्रत रखा जाता है. इसे 'वैभव लक्ष्मी व्रत' भी कहा जाता है. इस व्रत को स्त्री या पुरुष, कोई भी कर सकता है. इस व्रत को करने से उपासक को धन और सुख-समृ्द्धि की प्राप्ति होती है. घर-परिवार में लक्ष्मी का वास बनाए रखने के लिए भी यह व्रत उपयोगी है. इस दिन स्त्री-पुरुष लक्ष्मी की पूजा करते हुए सफेद फूल, सफेद चंदन आदि से पूजा करते हैं. खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति माता वैभव लक्ष्मी का व्रत करने के साथ ही लक्ष्मी श्री यंत्र को स्थापित कर उसकी नियमित रूप से पूजा करता है, तो उसके व्यापार में वृ्द्धि ओर धन में बढोतरी होती है. ✍️ वैभव लक्ष्मी व्रत की कथा: किसी शहर में अनेक लोग रहते थे. सभी अपने-अपने कामों में लगे रहते थे. किसी को किसी की परवाह नहीं थी. भजन-कीर्तन, भक्ति-भाव, दया-माया, परोपकार जैसे संस्कार कम हो गए. शहर में बुराइयां बढ़ गई थीं. शराब, जुआ, रेस, व्यभिचार, चोरी-डकैती वगैरह बहुत से गुनाह शहर में होते थे. इनके बावजूद शहर में कुछ अच्छे लोग भी रहते थे. ऐसे ही लोगों में शीला और उनके पति की गृहस्थी मानी जाती थी. शीला धार्मिक प्रकृति की और संतोषी स्वभाव वाली थी. उनका पति भी विवेकी और सुशील था. शीला और उसका पति कभी किसी की बुराई नहीं करते थे और प्रभु भजन में अच्छी तरह समय व्यतीत कर रहे थे. शहर के लोग उनकी गृहस्थी की सराहना करते थे. देखते ही देखते समय बदल गया. शीला का पति बुरे लोगों से दोस्ती कर बैठा. अब वह जल्द से जल्द करोड़पति बनने के ख्वाब देखने लगा. इसलिए वह गलत रास्ते पर चल पड़ा फलस्वरूप वह रोडपति बन गया. यानी रास्ते पर भटकते भिखारी जैसी उसकी हालत हो गई थी. शराब, जुआ, रेस, चरस-गांजा वगैरह बुरी आदतों में शीला का पति भी फंस गया. दोस्तों के साथ उसे भी शराब की आदत हो गई. इस प्रकार उसने अपना सब कुछ रेस-जुए में गंवा दिया. शीला को पति के बर्ताव से बहुत दुःख हुआ, किन्तु वह भगवान पर भरोसा कर सबकुछ सहने लगी. वह अपना अधिकांश समय प्रभु भक्ति में बिताने लगी. अचानक एक दिन दोपहर को उनके द्वार पर किसी ने दस्तक दी. शीला ने द्वार खोला तो देखा कि एक माँजी खड़ी थी. उसके चेहरे पर अलौकिक तेज निखर रहा था. उनकी आँखों में से मानो अमृत बह रहा था. उसका भव्य चेहरा करुणा और प्यार से छलक रहा था. उसको देखते ही शीला के मन में अपार शांति छा गई. शीला के रोम-रोम में आनंद छा गया. शीला उस माँजी को आदर के साथ घर में ले आई. घर में बिठाने के लिए कुछ भी नहीं था. अतः शीला ने सकुचाकर एक फटी हुई चद्दर पर उसको बिठाया. मांजी बोलीं- क्यों शीला! मुझे पहचाना नहीं? हर शुक्रवार को लक्ष्मीजी के मंदिर में भजन-कीर्तन के समय मैं भी वहां आती हूं.' इसके बावजूद शीला कुछ समझ नहीं पा रही थी. फिर मांजी बोलीं- 'तुम बहुत दिनों से मंदिर नहीं आईं अतः मैं तुम्हें देखने चली आई.' मांजी के अति प्रेमभरे शब्दों से शीला का हृदय पिघल गया. उसकी आंखों में आंसू आ गए और वह बिलख-बिलखकर रोने लगी. मांजी ने कहा- 'बेटी! सुख और दुःख तो धूप और छाँव जैसे होते हैं. धैर्य रखो बेटी! मुझे तेरी सारी परेशानी बता.' मांजी के व्यवहार से शीला को काफी संबल मिला और सुख की आस में उसने मांजी को अपनी सारी कहानी कह सुनाई. कहानी सुनकर माँजी ने कहा- 'कर्म की गति न्यारी होती है. हर इंसान को अपने कर्म भुगतने ही पड़ते हैं. इसलिए तू चिंता मत कर. अब तू कर्म भुगत चुकी है. अब तुम्हारे सुख के दिन अवश्य आएँगे. तू तो माँ लक्ष्मीजी की भक्त है. माँ लक्ष्मीजी तो प्रेम और करुणा की अवतार हैं. वे अपने भक्तों पर हमेशा ममता रखती हैं. इसलिए तू धैर्य रखकर माँ लक्ष्मीजी का व्रत कर. इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा.' शीला के पूछने पर मांजी ने उसे व्रत की सारी विधि भी बताई. मांजी ने कहा- 'बेटी! मां लक्ष्मीजी का व्रत बहुत सरल है. उसे 'वरदलक्ष्मी व्रत' या 'वैभव लक्ष्मी व्रत' कहा जाता है. यह व्रत करने वाले की सब मनोकामना पूर्ण होती है. वह सुख-संपत्ति और यश प्राप्त करता है.' शीला यह सुनकर आनंदित हो गई. शीला ने संकल्प करके आँखें खोली तो सामने कोई न था. वह विस्मित हो गई कि मांजी कहां गईं? शीला को तत्काल यह समझते देर न लगी कि मांजी और कोई नहीं साक्षात्‌ लक्ष्मीजी ही थीं. दूसरे दिन शुक्रवार था. सबेरे स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर शीला ने मांजी द्वारा बताई विधि से पूरे मन से व्रत किया. आखिरी में प्रसाद वितरण हुआ. यह प्रसाद पहले पति को खिलाया. प्रसाद खाते ही पति के स्वभाव में फर्क पड़ गया. उस दिन उसने शीला को मारा नहीं, सताया भी नहीं. शीला को बहुत आनंद हुआ. उनके मन में 'वैभवलक्ष्मी व्रत' के लिए श्रद्धा बढ़ गई. शीला ने पूर्ण श्रद्धा-भक्ति से इक्कीस शुक्रवार तक 'वैभवलक्ष्मी व्रत' किया. इक्कीसवें शुक्रवार को माँजी के कहे मुताबिक उद्यापन विधि कर के सात स्त्रियों को 'वैभवलक्ष्मी व्रत' की सात पुस्तकें उपहार में दीं. फिर माताजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करने लगीं- 'हे मां धनलक्ष्मी! मैंने आपका 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है. हे मां! मेरी हर विपत्ति दूर करो. हमारा सबका कल्याण करो. जिसे संतान न हो, उसे संतान देना. सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना. कुंआरी लड़की को मनभावन पति देना. जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना. सभी को सुखी करना. हे माँ! आपकी महिमा अपार है.' ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को प्रणाम किया. व्रत के प्रभाव से शीला का पति अच्छा आदमी बन गया और कड़ी मेहनत करके व्यवसाय करने लगा. उसने तुरंत शीला के गिरवी रखे गहने छुड़ा लिए. घर में धन की बाढ़ सी आ गई. घर में पहले जैसी सुख-शांति छा गई. 'वैभवलक्ष्मी व्रत' का प्रभाव देखकर मोहल्ले की दूसरी स्त्रियां भी विधिपूर्वक 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने लगीं. 🎎 'वैभव लक्ष्मी व्रत' उद्यापन विधि: सात, ग्यारह या इक्कीस, जितने भी शुक्रवारों की मन्नत माँगी हो, उतने शुक्रवार ‍तक यह व्रत पूरी श्रद्धा तथा भावना के साथ करना चाहिए. आखिरी शुक्रवार को इसका शास्त्रीय विधि के अनुसार उद्यापन करना चाहिए. आखिरी शुक्रवार को प्रसाद के लिए खी‍र बनानी चाहिए. जिस प्रकार हर शुक्रवार को हम पूजन करते हैं, वैसे ही करना चाहिए. पूजन के बाद माँ के सामने एक श्रीफल फोड़ें फिर कम से कम सात‍ कुंआरी कन्याओं या सौभाग्यशाली स्त्रियों को कुमकुम का तिलक लगाकर मां वैभवलक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक की एक-एक प्रति उपहार में देनी चाहिए और सबको खीर का प्रसाद देना चाहिए. इसके बाद माँ लक्ष्मीजी को श्रद्धा सहित प्रणाम करना चाहिए. फिर माताजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करें- 'हे मां धनलक्ष्मी! मैंने आपका 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है. हे माँ! हमारी (जो मनोकामना हो वह बोले) मनोकामना पूर्ण करें. हमारी हर विपत्ति दूर करो. हमारा सबका कल्याण करो. जिसे संतान न हो, उसे संतान देना. सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना. कुँआरी लड़की को मनभावन पति देना. जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना. सभी को सुखी करना. हे माँ! आपकी महिमा अपार है.' आपकी जय हो! ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छवि को प्रणाम करें. 🚩🌿🍑जय मां महालक्षमी 🍑🌿🚩 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️

🎎🌲🚩वैभव लक्ष्मी व्रत की महिमा व कथा🚩🌲🎎
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💐पूजा-उपासना तो जैसे भारतवासियों की सांसों में बसा हुआ है. शायद की ऐसा कोई दिन गुजरता होगा, जब कोई खास पूजा का संयोग न बनता हो. सप्ताह के हर दिन के अनुसार भी विशेष पूजा का विधान है. शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का व्रत रखा जाता है. इसे 'वैभव लक्ष्मी व्रत' भी कहा जाता है.

🌹 वैभव लक्ष्मी व्रत की महिमा व कथावैभव लक्ष्मी
पूजा-उपासना तो जैसे भारतवासियों की सांसों में बसा हुआ है. शायद की ऐसा कोई दिन गुजरता होगा, जब कोई खास पूजा का संयोग न बनता हो. सप्ताह के हर दिन के अनुसार भी विशेष पूजा का विधान है. शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का व्रत रखा जाता है. इसे 'वैभव लक्ष्मी व्रत' भी कहा जाता है.

इस व्रत को स्त्री या पुरुष, कोई भी कर सकता है. इस व्रत को करने से उपासक को धन और सुख-समृ्द्धि की प्राप्ति होती है. घर-परिवार में लक्ष्मी का वास बनाए रखने के लिए भी यह व्रत उपयोगी है. इस दिन स्त्री-पुरुष लक्ष्मी की पूजा करते हुए सफेद फूल, सफेद चंदन आदि से पूजा करते हैं. खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति माता वैभव लक्ष्मी का व्रत करने के साथ ही लक्ष्मी श्री यंत्र को स्थापित कर उसकी नियमित रूप से पूजा करता है, तो उसके व्यापार में वृ्द्धि ओर धन में बढोतरी होती है.

✍️ वैभव लक्ष्मी व्रत की कथा:
किसी शहर में अनेक लोग रहते थे. सभी अपने-अपने कामों में लगे रहते थे. किसी को किसी की परवाह नहीं थी. भजन-कीर्तन, भक्ति-भाव, दया-माया, परोपकार जैसे संस्कार कम हो गए. शहर में बुराइयां बढ़ गई थीं. शराब, जुआ, रेस, व्यभिचार, चोरी-डकैती वगैरह बहुत से गुनाह शहर में होते थे. इनके बावजूद शहर में कुछ अच्छे लोग भी रहते थे.

ऐसे ही लोगों में शीला और उनके पति की गृहस्थी मानी जाती थी. शीला धार्मिक प्रकृति की और संतोषी स्वभाव वाली थी. उनका पति भी विवेकी और सुशील था. शीला और उसका पति कभी किसी की बुराई नहीं करते थे और प्रभु भजन में अच्छी तरह समय व्यतीत कर रहे थे. शहर के लोग उनकी गृहस्थी की सराहना करते थे.

देखते ही देखते समय बदल गया. शीला का पति बुरे लोगों से दोस्ती कर बैठा. अब वह जल्द से जल्द करोड़पति बनने के ख्वाब देखने लगा. इसलिए वह गलत रास्ते पर चल पड़ा फलस्वरूप वह रोडपति बन गया. यानी रास्ते पर भटकते भिखारी जैसी उसकी हालत हो गई थी. शराब, जुआ, रेस, चरस-गांजा वगैरह बुरी आदतों में शीला का पति भी फंस गया. दोस्तों के साथ उसे भी शराब की आदत हो गई. इस प्रकार उसने अपना सब कुछ रेस-जुए में गंवा दिया.

शीला को पति के बर्ताव से बहुत दुःख हुआ, किन्तु वह भगवान पर भरोसा कर सबकुछ सहने लगी. वह अपना अधिकांश समय प्रभु भक्ति में बिताने लगी. अचानक एक दिन दोपहर को उनके द्वार पर किसी ने दस्तक दी. शीला ने द्वार खोला तो देखा कि एक माँजी खड़ी थी. उसके चेहरे पर अलौकिक तेज निखर रहा था. उनकी आँखों में से मानो अमृत बह रहा था. उसका भव्य चेहरा करुणा और प्यार से छलक रहा था. उसको देखते ही शीला के मन में अपार शांति छा गई. शीला के रोम-रोम में आनंद छा गया. शीला उस माँजी को आदर के साथ घर में ले आई. घर में बिठाने के लिए कुछ भी नहीं था. अतः शीला ने सकुचाकर एक फटी हुई चद्दर पर उसको बिठाया.

मांजी बोलीं- क्यों शीला! मुझे पहचाना नहीं? हर शुक्रवार को लक्ष्मीजी के मंदिर में भजन-कीर्तन के समय मैं भी वहां आती हूं.' इसके बावजूद शीला कुछ समझ नहीं पा रही थी. फिर मांजी बोलीं- 'तुम बहुत दिनों से मंदिर नहीं आईं अतः मैं तुम्हें देखने चली आई.'

मांजी के अति प्रेमभरे शब्दों से शीला का हृदय पिघल गया. उसकी आंखों में आंसू आ गए और वह बिलख-बिलखकर रोने लगी. मांजी ने कहा- 'बेटी! सुख और दुःख तो धूप और छाँव जैसे होते हैं. धैर्य रखो बेटी! मुझे तेरी सारी परेशानी बता.'

मांजी के व्यवहार से शीला को काफी संबल मिला और सुख की आस में उसने मांजी को अपनी सारी कहानी कह सुनाई.

कहानी सुनकर माँजी ने कहा- 'कर्म की गति न्यारी होती है. हर इंसान को अपने कर्म भुगतने ही पड़ते हैं. इसलिए तू चिंता मत कर. अब तू कर्म भुगत चुकी है. अब तुम्हारे सुख के दिन अवश्य आएँगे. तू तो माँ लक्ष्मीजी की भक्त है. माँ लक्ष्मीजी तो प्रेम और करुणा की अवतार हैं. वे अपने भक्तों पर हमेशा ममता रखती हैं. इसलिए तू धैर्य रखकर माँ लक्ष्मीजी का व्रत कर. इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा.'

शीला के पूछने पर मांजी ने उसे व्रत की सारी विधि भी बताई. मांजी ने कहा- 'बेटी! मां लक्ष्मीजी का व्रत बहुत सरल है. उसे 'वरदलक्ष्मी व्रत' या 'वैभव लक्ष्मी व्रत' कहा जाता है. यह व्रत करने वाले की सब मनोकामना पूर्ण होती है. वह सुख-संपत्ति और यश प्राप्त करता है.'

शीला यह सुनकर आनंदित हो गई. शीला ने संकल्प करके आँखें खोली तो सामने कोई न था. वह विस्मित हो गई कि मांजी कहां गईं? शीला को तत्काल यह समझते देर न लगी कि मांजी और कोई नहीं साक्षात्‌ लक्ष्मीजी ही थीं.

दूसरे दिन शुक्रवार था. सबेरे स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर शीला ने मांजी द्वारा बताई विधि से पूरे मन से व्रत किया. आखिरी में प्रसाद वितरण हुआ. यह प्रसाद पहले पति को खिलाया. प्रसाद खाते ही पति के स्वभाव में फर्क पड़ गया. उस दिन उसने शीला को मारा नहीं, सताया भी नहीं. शीला को बहुत आनंद हुआ. उनके मन में 'वैभवलक्ष्मी व्रत' के लिए श्रद्धा बढ़ गई.

शीला ने पूर्ण श्रद्धा-भक्ति से इक्कीस शुक्रवार तक 'वैभवलक्ष्मी व्रत' किया. इक्कीसवें शुक्रवार को माँजी के कहे मुताबिक उद्यापन विधि कर के सात स्त्रियों को 'वैभवलक्ष्मी व्रत' की सात पुस्तकें उपहार में दीं. फिर माताजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करने लगीं- 'हे मां धनलक्ष्मी! मैंने आपका 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है. हे मां! मेरी हर विपत्ति दूर करो. हमारा सबका कल्याण करो. जिसे संतान न हो, उसे संतान देना. सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना. कुंआरी लड़की को मनभावन पति देना. जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना. सभी को सुखी करना. हे माँ! आपकी महिमा अपार है.' ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को प्रणाम किया.

व्रत के प्रभाव से शीला का पति अच्छा आदमी बन गया और कड़ी मेहनत करके व्यवसाय करने लगा. उसने तुरंत शीला के गिरवी रखे गहने छुड़ा लिए. घर में धन की बाढ़ सी आ गई. घर में पहले जैसी सुख-शांति छा गई. 'वैभवलक्ष्मी व्रत' का प्रभाव देखकर मोहल्ले की दूसरी स्त्रियां भी विधिपूर्वक 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने लगीं.

🎎 'वैभव लक्ष्मी व्रत' उद्यापन विधि:

सात, ग्यारह या इक्कीस, जितने भी शुक्रवारों की मन्नत माँगी हो, उतने शुक्रवार ‍तक यह व्रत पूरी श्रद्धा तथा भावना के साथ करना चाहिए. आखिरी शुक्रवार को इसका शास्त्रीय विधि के अनुसार उद्यापन करना चाहिए.

आखिरी शुक्रवार को प्रसाद के लिए खी‍र बनानी चाहिए. जिस प्रकार हर शुक्रवार को हम पूजन करते हैं, वैसे ही करना चाहिए. पूजन के बाद माँ के सामने एक श्रीफल फोड़ें फिर कम से कम सात‍ कुंआरी कन्याओं या सौभाग्यशाली स्त्रियों को कुमकुम का तिलक लगाकर मां वैभवलक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक की एक-एक प्रति उपहार में देनी चाहिए और सबको खीर का प्रसाद देना चाहिए. इसके बाद माँ लक्ष्मीजी को श्रद्धा सहित प्रणाम करना चाहिए.

फिर माताजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करें- 'हे मां धनलक्ष्मी! मैंने आपका 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है. हे माँ! हमारी (जो मनोकामना हो वह बोले) मनोकामना पूर्ण करें. हमारी हर विपत्ति दूर करो. हमारा सबका कल्याण करो. जिसे संतान न हो, उसे संतान देना. सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना. कुँआरी लड़की को मनभावन पति देना. जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना. सभी को सुखी करना. हे माँ! आपकी महिमा अपार है.' आपकी जय हो! ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छवि को प्रणाम करें.

🚩🌿🍑जय मां महालक्षमी 🍑🌿🚩

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कामेंट्स

Hemant Mavji Kasta May 22, 2020
Shree Mahalaxmi Matay Namah, Shree Mata Rani ki Jai, Beautiful Post, Shlok, Anmol Prabhat Pushp, Dhanywad Brother Ji Namaskar, Subahka Ram Ram, Aapka aur Aapke Parivar Har Din Har Pal Khushiyo Se Bhara Rahe, Suprabhat

Vinod Agrawal May 22, 2020
🌷Jai Mata Di Jai Maa Ambey Maharani Jai Maa Mahalaxmi Ji🌷

Pinu Dhiman Jai Shiva 🙏 May 22, 2020
जय मां लक्ष्मी जी सुप्रभात वंदन मेरे प्यारे भाई जी 🙏🏵️🙏मां लक्ष्मी जी आप को धन धान्य सुख समृद्धि ऐश्वर्य और वैभव प्रदान करे आप का हर दिन शुभ व मगंलमय हो आप और आप के परिवार को वट सावित्री व्रत और शनि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं भाई जी 🙏🙌💰🌹💰🌹💰🌹💰

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 May 22, 2020
Good Morning My Bhai ji 🙏🙏 Jay Mata di Mata Rani ji Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🙏 Aapka Har Din Shub Mangalmay Ho ji 🙏🙏🌹🔔🔔🕉️🕉️🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

🌹🌹pappu 🌹🌹jha🌹🌹 May 22, 2020
🌺🌳🌺🌺जय माता दी🌺🌳🌺 शुभ प्रभात भाई जी🌺🌳🌺 शनि जयंती🌺🌳🌺🌺 और बट सावित्री पूजन की हार्दिक शुभकामनाए🌳🌺आपका हर पल मंगलमय हो की कृपा सदैव आप पर बनी रहे🌳🌺🌳 हँसते रहे आप करोड़ों के बिच, 🌳🌺🌳🌺🌳🌺🌳🌺खिलते रहे आप लाखों के बिच, रोशन रहे आप हज़ारों के बीच, 🌺🌳🌺🌳🌳जैसे रहता है सूरज आसमान के बीच।🌺🌺🌺🌳🌳 वट सावित्री पूजन की हार्दिक शुभकामनाएं🌳🌺🌳🌺🌳🌺🌳🌺🌳🌺🌳🌺🌳🌺🌳🌺👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏

Rk Soni(Ganesh Mandir) May 22, 2020
जय गणेश देवा जी🙏 🙏जय माता दी,जय शनिदेव जी आप व आपके परिवार के सारे कष्ट दूर करके आपको खुश व स्वस्थ २खे जी🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏

Mohanmira.nigam May 22, 2020
Jay shri ganesh ji vishnu.hari.ji maha Luxmi mata Rani kali.mata ji santosi mata Rani sarswti mata Rani ji hanuman ji Bholay.baba.ki.jay Jay vishnu.hari.ji

Ansouya Ansouya May 22, 2020
जय माता दी शुभ दोपहर वनदन भईय्या जी आप का दिन शुभ और मंगलमय हो माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे जी 🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏

Girish Sareen May 22, 2020
jai mata di ji shubh sandhya vandan bhai ji 🙏🙏🌷🌷🌷🌷🌷

🙏🅰️NJ🅰️LI🌹Ⓜ️ISH®️🅰️🙋 May 22, 2020
🙏🌷जय माता दी 🌷🙏 भाइया जी🙏 सबकी मनोकामना पूर्ण करने वाली माता संतोषी आपकी मंगल मनोकामनाएं पूर्ण करें मेरे भाइया 🌹🌹🙏 आप और आपका समस्त परिवार सदा सुखी रहे स्वस्थ रहें संपन्न रहें ,माता की कृपा सदा आप सभी पर बनी रहे 🙌🙏 इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि वंदन मेरे भाइया 🌷🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Nayanaben Patel May 22, 2020
jay maa santosi.. ma jay mata di.. ji subh ratri vandan ji 🙏

🌺R✳️T✳️S🌺 May 26, 2020
जय माता दी 🌹🙏माता रानी की कृपा आपके परिवार पर सदैव बनी रहे🌹🙏

Dr.ratan Singh May 26, 2020
@rohitashsingh6 🚩🌿🌹जय श्री राम🌹🌿🚩 🪔🙏शुभरात्रि वंदन जी🙏🪔 🎎आप और आपके पूरे परिवार पर श्री पुरूषोत्तम राम भक्त हनुमान जी आशिर्वाद हमेशा बनी रहे जी🙏 👏आपका शनिवार की रात्री शुभ सुंदर शांतिमय और मंगलमय व्यतिय हो जी🌋

🌺R✳️T✳️S🌺 May 26, 2020
धन्य हो डॉक्टर रतन सिंह जी l👋 आपने बड़े अच्छी सुंदर कथा सुनाइ l इस कथा का पुण्य आपको भी प्राप्त हो l माता लक्ष्मी की सदैव आप पर कृपा बनी रहे l🙏🌹 जय मां लक्ष्मी🌹🙏 शुभ रात्रि वंदन 🌹🙏

Sanjay Singh May 29, 2020

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Sanjay Singh May 29, 2020

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Nirmala R gupta May 29, 2020

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ajay yadav May 29, 2020

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ajay yadav May 29, 2020

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Vikas Pachauri May 29, 2020

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Molay Adhikari May 29, 2020

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ambrish agareal May 29, 2020

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