Madanpal Singh
Madanpal Singh Apr 7, 2020

🌷🕉🚩jai shree Radhe Radhe jii 🌷🕉🚩jai shree kirisana jii 🌷⚘ 🌷🕉🚩shubh sandya jii 🌷💘⚘ 🌷🕉🚩aal my mandir female jiii 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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कामेंट्स

Neha Sharma, Haryana Apr 7, 2020
जय श्री राधेकृष्णा भाई जी 🥀🙏 शुभ संध्या नमन भाई जी 🥀🙏 आपका हर पल शुभ व मंगलमय 🔯 हो भाई जी 🙏🥀

Mohanmira.nigam Apr 7, 2020
Jay shri Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe ji Radhe krishna.ji nice

🌹 लड्डू🌹 Apr 7, 2020
@madanpalmadanpalsingh 🙏🌹🙏 जय भोलेनाथ की शुभ संध्या जी अति सुंदर वीडियो बिल्कुल सही बात🌹🍮🌹🙏🙏

Vinod Agrawal Apr 7, 2020
🌷Jai Shree Ram Jai Siyaram Jai Shree Radhe Krishna🌷

hiren Apr 7, 2020
Jai Shree Radhe Krishna Bhai

Babita Sharma Apr 8, 2020
म़ंगल को जन्मे मंगल ही करते मंगलमय हनुमान 🚩🙏🙏 हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं भाई 🙏 रामभक्त हनुमान जी महाराज सदा आपका मंगल करें।जय श्री राम

Sumitra Soni Apr 8, 2020
जय श्री गणेश 🙏🏻🌹भाई हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं गणपति बप्पा और हनुमान जी की आशीर्वाद ✋से आपके सभी दुख दूर हो आपके घर परिवार में सुख समृद्धि शांति बनी रहे आप सदा सुखी रहे स्वस्थ रहे भाई जी🙏🏻🌹🌷🌷🙏🏻🙏🏻🌹🌷

Vanita Kale Apr 8, 2020
🚩🚩🌺शुभ बुधवार 🚩 हनुमान जयंती और चैत्र पूणिैमा की हार्दिक शुभकामनाएं 👏🏹🙏🚩बजरंग का साथ हो 🏹🚩सुख समृद्धि वैभव ऐश्वर्यसे की बरसात हो आप रहे खुशहाल सदा दिन हाे या रात हाे हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं मेरे सभी भाइयों आैर बहनाे काे पुरे परिवार सदा सुखी और स्वस्थ रखें 🏹🏹🏹जय श्री राम 🚩🚩🏹🏹🏹🏹🏹🏹🚩 के अवसर पर, आप और आपके परिवार पर🚩, राम जी का आशीर्वाद, हमेशा बना रहे🏹🏹🏹🚩 रामनवमी की आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं👏🏹🏹🚩🏹🏹जय श्री राम जय हनुमान जी आपको जनम दिन की हार्दिक बधाई 🚩🎂🌹🎂🌹🚩🚩🏹Happy Birthday 🏹🏹🌺🎂 Hanuman ji 🎂🌹🌹🎂🎂🎂🌹🌹👏

Renu Singh Apr 8, 2020
🌹🌹 Shubh Ratri Vandan Bhai ji 🙏🌹 Hanuman Janmotsav ki Hardik Shubh Kamnayein 🙏 Bajrangbali Ji Ki kripa Se Aàpka Aane Wala Har pl Shubh V Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

Vijay Pandey Apr 9, 2020
राम राम जी भाई ‌🌷🙏 शुभ दोपहर की शुभ मंगल कामनाएं ‌🌷🙌

radha सोनी Apr 9, 2020
जय श्री राधे राधे जी क्या बात है सर जी ये बिलकुल सत्य बात है 💯%✔️सुक्रिया सरजी अति सुन्दर वचन है और ये सत्य है आपका हर एक पल मँगल रहे जी शुभ दोपहर प्रणाम जी हम शुलूट करते है आपको🙋🙋🙏🙏🌹🌹🚩🚩🕉️🕉️

*प्राचीनकाल में गोदावरी नदी के किनारे वेदधर्म मुनि का आश्रम था। एक दिन गुरुजी ने अपने शिष्यों से कहा की- शिष्यों! अब मुझे कोढ़ निकलेगा और मैं अंधा भी हो जाऊँगा, इसिलिए काशी में जाकर रहूँगा। है कोई शिष्य जो मेरे साथ रह कर सेवा करने के लिए तैयार हो ? सब चुप हो गये। उनमें संदीपनी ने कहा- गुरुदेव! मैं आपकी सेवा में रहूँगा। गुरुदेव ने कहा इक्कीस वर्ष तक सेवा के लिए रहना होगा। संदीपनी बोले इक्कीस वर्ष तो क्या मेरा पूरा जीवन ही अर्पित है आपको। वेदधर्म मुनि एवं संदीपन काशी में रहने लगे । कुछ दिन बाद गुरु के पूरे शरीर में कोढ़ निकला और अंधत्व भी आ गया । शरीर कुरूप और स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया । संदीपनी के मन में लेशमात्र भी क्षोभ नहीं हुआ । वह दिन रात गुरु जी की सेवा में तत्पर रहने लगा । गुरु को नहलाता, कपड़े धोता, भिक्षा माँगकर लाता और गुरुजी को भोजन कराता । गुरुजी डाँटते, तमाचा मार देते... किंतु संदीपनी की गुरुसेवा में तत्परता व गुरु के प्रति भक्तिभाव और प्रगाढ़ होता गया।* *गुरु निष्ठा देख काशी के अधिष्ठाता देव विश्वनाथ संदीपनी के समक्ष प्रकट होकर बोले- तेरी गुरुभक्ति देख कर हम प्रसन्न हैं । कुछ भी वर माँग लो । संदीपनी गुरु से आज्ञा लेने गया और बोला भगवान शिवजी वरदान देना चाहते हैं, आप आज्ञा दें तो आपका रोग एवं अंधेपन ठीक होने का वरदान मांग लूँ ? गुरुजी ने डाँटा,बोले- मैं अच्छा हो जाऊँ और मेरी सेवा से तेरी जान छूटे यही चाहता है तु ? अरे मूर्ख ! मेरा कर्म कभी-न-कभी तो मुझे भोगना ही पड़ेगा । संदीपनी ने भगवान शिवजी को वरदान के लिए मना कर दिया। शिवजी आश्चर्यचकित हो गये और गोलोकधाम पहुंच के श्रीकृष्ण से पूरा वृत्तान्त कहा। श्रीकृष्ण भी संदीपनी के पास वर देने आये। संदीपनी ने कहा- प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मुझे यही वर दें कि गुरुसेवा में मेरी अटल श्रद्धा बनी रहे।* *एक दिन गुरुजी ने संदीपनी को कहा कि- मेरा अंत समय आ गया है। सभी शिष्यों से मिलने की इच्छा है । संदीपनी ने सब शिष्यों को सन्देश भेज दिया। सारे शिष्य उनके दर्शन के लिए आये। गुरुजी ने सभी शिष्यों कुछ न कुछ दिया । किसी को पंचपात्र, किसी को आचमनी , किसी को आसन किसी को माला दे दी । जब संदीपनी का आये तो सभी वस्तुएं समाप्त हो चुकी थी । गुरुजी चुप हो गए,फिर बोले कि मैं तुम्हे क्या दूँ ? तुम्हारी गुरूभक्ति के समान मेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है । मैं तुम्हें यह वर देता हूँ कि- त्रिलोकी नाथ का अवतार होने वाला है, वह तुम्हारे शिष्य बनेंगे । संदीपनी के लिए इससे बड़ी भेंट और क्या होती । उन्होंने गुरूजी की अंत समय तक सेवा की। जब श्रीकृष्ण अवतार हुआ तो गुरुजी के दिए उस वरदान को फलीभूत करने के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दूर उज्जैन में स्थित संदीपनी ऋषि के आश्रम में भ्राता बलराम जी के साथ आए और संदीपनी ऋषि के शिष्य बने... ऐसी है गुरुभक्ति की शक्ति। इसिलिए गुरुभक्ति ही सार है... राधे राधे...संगृहीत कथा*🙏🚩

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rekha sunny May 10, 2020

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rekha sunny May 10, 2020

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Sanjay Singh May 10, 2020

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Sanjay Singh May 10, 2020

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BIJAY PANDAY May 10, 2020

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rekha sunny May 10, 2020

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Sharma May 10, 2020

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Meena Dubey May 10, 2020

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