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KAVYANJALI
KAVYANJALI May 26, 2019

🙋 मेरी सोच 🙋 👌 यदि हमारी नियत अच्छी और मकसद साफ है, तो किसी ना किसी रूप मे ऊपर वाला, भी हमारी मदद जरुर करता है, 👏🌹👏राधे राधे👏🌹👏

🙋   मेरी सोच 🙋

      👌   यदि हमारी नियत अच्छी और मकसद साफ है, 

                       तो किसी ना किसी रूप मे ऊपर वाला, 

                       भी हमारी मदद   जरुर करता है, 

             👏🌹👏राधे राधे👏🌹👏

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कामेंट्स

KAVYANJALI May 27, 2019
@sanjayprajapati4 थैंक्स धन्यवाद आपका भैयाजी RADHE RADHE SUPRABHAT VANDAN 👏👏👏🌹👏👏👏

Hemant Mavji Kasta May 27, 2019
Dhanyavad Bahena ji Pranam Aapka Har Pal Khushiya Rahe Suprabhat, Radhe Radhe ji Jai Shri Radhe Krishna ji

GIRISH May 27, 2019
good post JAI SHRI RADHA KRISHNA JI sahi baat hai aacchai ka rasta le jeewan mei kyoki hamara khata account holder prabhu ke haath hain RADHEY RADHEY JI

KAVYANJALI May 27, 2019
@girish1385 जी बिलकुल सही बात 👌👌 RADHE RADHE JI SHUBH DOPHAR VANDAN 👏👏👏🌹👏👏👏

KAVYANJALI May 27, 2019
@basanti22 थैंक्स धन्यवाद आपका RADHE RADHE JI SHUBH DOPHAR VANDAN 👏👏👏🌹👏👏👏

Hemant Mavji Kasta May 27, 2019
Dhanyavad Bahena ji Pranam Aapka Har Pal Khushiya Rahe Shubh Ratri, Om Namah Shivay Har Har Mahadev, Jai Shri Krishna ji, Radhe Radhe ji, Sister ji Vandan

Rajesh karda May 29, 2019
🌷🌷🌷🙏🙏🙏 Radhe Radhe ji good morning 🌷

KAVYANJALI Jun 19, 2019

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Trishna Jun 19, 2019

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Sunil upadhyaya Jun 19, 2019

+22 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 169 शेयर
Renu Singh Jun 19, 2019

+650 प्रतिक्रिया 94 कॉमेंट्स • 125 शेयर
Pawan Saini Jun 19, 2019

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Arti Pandey Jun 19, 2019

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Swami Lokeshanand Jun 19, 2019

आज एक बड़ी गंभीर बात पर विचार करेंगे। हम सबने हनुमानजी को कपि रूप में ही जाना है। कल की कथा में अंजनि के स्वरूप पर आध्यात्मिक पक्ष रखा गया, यह पोस्ट हनुमानजी के कपि स्वरूप पर। देखें, रामकथा और कृष्णकथा की कथा शैली और कथानक भिन्न है, पर दोनों ही शास्त्र परमात्मा प्राप्ति की एक ही सनातन विधि का प्रतिपादन करते हैं। रामकथा में जो कौशल्या हैं, वहाँ कृष्णलीला में यशोदा हैं। कैकेयी देवकी बनी हैं, सुमित्रा रोहिणी हैं। यहाँ रामजी कौशल्यासुत हुए कैकेयी का दूध पीया, वहाँ श्रीकृष्ण देवकीनन्दन हैं, यशोदा का दूध पीया। यहाँ लक्षमणजी का जन्म कौशल्याजी और कैकेयीजी के फल के भाग से हुआ, तो वहाँ बलरामजी को देवकी के गर्भ से निकाल कर रोहिणी के गर्भ में स्थापित दिखाया गया। प्रमुख चर्चा यह है कि वहाँ जिस अवस्था विशेष को "गोपी" नाम से बताया गया, उसे ही यहाँ "कपि" नाम से कहा जा रहा है। ध्यान दें,"गो" माने इन्द्रियाँ,"पी" माने सुखा डालना, जिसने अपनी इन्द्रियों में बह रहे वासना रस को सुखा डाला वो गोपी। यहाँ कपि में, "क" माने मन (जैसे कपट, क+पट, "क" पर "पट" डाल देना, मन पर पर्दा डाल देना, यही तो कपट है) और "पि" माने वही, सुखा डालना। अर्थ दोनों का एक ही है, जिसने इन्द्रिय समूह सहित मन को सुखा डाला। लाख विषय आँखों के सामने से गुजरते हों, अंत:करण में वासना की रेखा तक नहीं खिंचती, ऐसा महापुरुष कपि है। सनातन धर्म में शास्त्र की रचना ऐतिहासिक घटनाओं के संकलन मात्र के उद्देश्य से नहीं की जाती, उन घटनाओं में आध्यात्मिक संदेश छिपा कर रखे जाते हैं। जिससे प्रारंभ में सामान्य जन को संस्कार पड़ जाए, और कालांतर में उसी कथा का वास्तविक रहस्य जानकर उनका साधन मार्ग प्रशस्त हो जाए। यही हमारा मूल उद्देश्य है। अब विडियो- कपि और गोपी- https://youtu.be/C_omPazCZD4

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