कबीर की गुरुबानी नर तुम झूठे , जन्म गवांया ! *क्योंकि हर गीत कुछ कहता है! इस झूठे संसार में, एक झूठ , दूसरे झूठ से मिलकर एक नए झूठ को जन्म देता है. फिर तीनों झूठ केवल झूठ द्वारा पोषित होते हैं और फलफूल कर और नए-नए झूठों से इस झूठे जगत को भ्रमित करते हैं . झूठ का यह सिलसिला सदियों से कायम है और आज तक चल रहा है. महान संत कबीर द्वारा रचित यह भजन गीत हमें जीवन के उस कड़वे सत्य से रूबरू करवाता है , जिसे जानते हुए भी हम शायद जानना नहीं चाहते. नर तुम झूठे झूठा जनम गँवाया ।     उस झूठे का कोई अन्त न पाया ।          झूठे के घर झुठा आया ,झुठे ते परचाया ।       झूठी थारी झूठा भोजन ,झूठ ले सब खाया । झूठे के घर झूठा आया , झूठा ब्याह रचाया ।     झूठा दुल्हा झूठी दुल्हन ,झूठे ब्याहन आया ।         झुठे नर सब झुठी नारी ,झूठे बालक आया ।      झूठी छाती ,झूठी कोखी ,झूठी दुध पिलाया ।   साँच कहु मै झूठ न बोलू साँचे को झुठलाया । कहे कबीर सोई जन साँचा अपने माहि समाया ।  कबीर की इन पंक्तियों में छिपी मानव प्रकृति की एक ऐसी विशेषता समझाई गई है जिसपर हममें से किसी को भी आपत्ति हो सकती है . लेकिन आपत्ति अपनी जगह और सत्य अपनी जगह. इस सत्य की वास्तविकता को झुठलाया नहीं जा सकता कि हमारा जीवन केवल झूठ पर टिका हुआ रहता है.एक ऐसा झूठ जिसका न तो कोई ओर है न छोर .हम हर झूठ को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं जिसे सुनकर सत्य भी शरमा जाए. कबीर ने सही कहा कि झूठे के घर झूठा ही जा रहा है. और पूरा जीवन वह भी झूठ सीख कर जीवन यापन करता है. लेकिन वह अपने प्रत्येक झूठ को सत्य बनाकर पेश करने में माहिर हो जाता है. यहां ऐसा कहने का संदर्भ यह है कि हमारा जीवन हम जिस प्रकार से जीते हैं वह हमें ,हमारे ईश्वर द्वारा प्रदत्त मानव मूल्यों और प्रकृति से एकदम भिन्न होता है. हम अपने जीवन की यथार्थता और सार्थकता भूलकर न जाने किस मोहमाया के फेर में पड़कर पूरा जीवन यूंही एक ऐसे झूठ के सहारे बिताने में मगन रहते हैं जिसका अंत दुखद ही होना है. आज देखा जाए तो हमारे सभी रिश्ते -नाते झूठ पर ही टिक कर ही निभ पा रहे हैं. यदि सत्य जान लें तो शायद टिक ही न पाए. जबकि ऐसा होना ही नहीं चाहिए. सत्य को स्वीकार कर रिश्ते निभाना ही सबसे बड़ी बात है. काश हम जीवन की उन वास्तविकताओं साथ जी पाते जिनके लिए हमें यह अनमोल जन्म मिला था. हम न जाने किन झूठे पाखंड और प्रपंचों में फंस चुके हैं. ईश्वर जिसे कभी देखा नहीं उसका हमने व्यवसायीकरण कर दिया है.उस सर्वोच्च दैवीय शक्ति के नाम पर हम अपनी दुकानें चला रहे हैं और अंधाधुंध पैसा कमा रहे हैं. यह सब केवल एक झूठ और भ्रम के अतिरिक्त और कुछ नहीं है . यह झूठा मार्ग ईश्वर तक कभी नहीं ले जा सकता. अपने काल्पनिक ईश्वर के मोह में हम जीवन की कई ऐसी संंवेदनशील वास्तविकताओं से मुंह छिपा कर रहते हैं जिन्हें समझना हमारे लिए शायद ज्यादा आवश्यक है. केवल अपनी कल्पनाओं के ईश्वर के सहारे जी कर हम अपना जीवन व्यर्थ कर रहे हैं.  हमारा मन एक बड़ा ठग है और लगातार हमें झूठे प्रपंचों में फंसाए रखता है.हमें कोशिश करनी चाहिए इस ठग से सावधान रहें . यही मन हमें अपना,पराया,मेरा,तुम्हारा करना सिखाता है. हमें याद रखना चाहिए कि हम सबका अंत एक ही है. अत: तेरा,मेरा,अपना,पराया करने वाले हर झूठ को अपने जीवन से निकाल बाहर करें. हम सब एक हैं. कबीर के अनुसार  "सब मे हम है सब हमरे माही ,पंडित अन्धरा समझत नाही!" जो तुम हो वही हम है जो हम है वही तुम हो ! लेकिन ये सब बातें हमारे धर्म के ठेकेदार हमारी आँखों पर झूठ का पर्दा डालकर रख अपने हित साधते हैं और जीवन के इस परम सत्य को समझने नहीं देते! अब यहां आखिर में यह प्रश्न उठता है कि जब सब झूठे हैं तो फिर सच्चा कौन है ?   कबीर समझाते हैं कि सच्चा केवल वही है जिसने ये धर्म के नाम पर किए जाने वाले पाखंड , और दिखावे के चलते तीर्थ ब्रत, मन्दिर, मस्जिद,गिरिजा में जाकर चढ़ाना बंद कर दिया है. वैसे एक बात यदि दिल पर हाथ रख कर सच्चे मन से पूछी जाए कि क्या हमारी कोई हैसियत है कि हम उस सृष्टिकर्ता को तुच्छ वस्तुएं भेंट कर सकें? जगत में सच्चा केवल वही है जिसने सब कुछ छोड़कर केवल अपने आत्मस्वरुप में गहरा उतर कर जीवन को एक नए सिरे से समझने का प्रयास किया है. वह नया सिरा है कि आपस में प्रेमपूर्वक, एकदूसरे का सहयोग करते हुए जीवन बिताएं . एक ऐसा जीवन जो केवल कल्पनाओं के सहारे नहीं चलता . जहां केवल यथार्थ के धरातल पर रहकर इस धरती पर रहने वाले हर जीव,जंतु,वनस्पति और प्राणियों के प्रति प्रेम,समर्पण और सेवा का भाव निहित रहता है. जो ऐसा करता है केवल वही सच्चा है, वरना सब झूठे हैं! जब जब इसे सुनता हूं अश्रुधारा निकल पड़ती है. हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय जय श्री भोलेनाथ नमस्कार 🙏 जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी नमस्कार शुभ संध्या वंदन 🌄🎪 👣 🍃🌿🌺वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 मित्रों जय श्री राम 👏 🚩 जय श्री सतनाम वाहेगुरू जी

Audio - कबीर की गुरुबानी
नर तुम झूठे , जन्म गवांया !

*क्योंकि हर गीत कुछ कहता है! इस झूठे संसार में, एक झूठ , दूसरे झूठ से मिलकर एक नए झूठ को जन्म देता है. फिर तीनों झूठ केवल झूठ द्वारा पोषित होते हैं और फलफूल कर और नए-नए झूठों से इस झूठे जगत को भ्रमित करते हैं . झूठ का यह सिलसिला सदियों से कायम है और आज तक चल रहा है.

महान संत कबीर द्वारा रचित यह भजन गीत हमें जीवन के उस कड़वे सत्य से रूबरू करवाता है , जिसे जानते हुए भी हम शायद जानना नहीं चाहते. नर तुम झूठे झूठा जनम गँवाया ।

    उस झूठे का कोई अन्त न पाया ।

         झूठे के घर झुठा आया ,झुठे ते परचाया ।

      झूठी थारी झूठा भोजन ,झूठ ले सब खाया ।

झूठे के घर झूठा आया , झूठा ब्याह रचाया ।

    झूठा दुल्हा झूठी दुल्हन ,झूठे ब्याहन आया ।

        झुठे नर सब झुठी नारी ,झूठे बालक आया ।

     झूठी छाती ,झूठी कोखी ,झूठी दुध पिलाया ।

  साँच कहु मै झूठ न बोलू साँचे को झुठलाया ।

कहे कबीर सोई जन साँचा अपने माहि समाया ।  कबीर की इन पंक्तियों में छिपी मानव प्रकृति की एक ऐसी विशेषता समझाई गई है जिसपर हममें से किसी को भी आपत्ति हो सकती है . लेकिन आपत्ति अपनी जगह और सत्य अपनी जगह. इस सत्य की वास्तविकता को झुठलाया नहीं जा सकता कि हमारा जीवन केवल झूठ पर टिका हुआ रहता है.एक ऐसा झूठ जिसका न तो कोई ओर है न छोर .हम हर झूठ को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं जिसे सुनकर सत्य भी शरमा जाए.

कबीर ने सही कहा कि झूठे के घर झूठा ही जा रहा है. और पूरा जीवन वह भी झूठ सीख कर जीवन यापन करता है.

लेकिन वह अपने प्रत्येक झूठ को सत्य बनाकर पेश करने में माहिर हो जाता है.

यहां ऐसा कहने का संदर्भ यह है कि हमारा जीवन हम जिस प्रकार से जीते हैं वह हमें ,हमारे ईश्वर द्वारा प्रदत्त मानव मूल्यों और प्रकृति से एकदम भिन्न होता है. हम अपने जीवन की यथार्थता और सार्थकता भूलकर न जाने किस मोहमाया के फेर में पड़कर पूरा जीवन यूंही एक ऐसे झूठ के सहारे बिताने में मगन रहते हैं जिसका अंत दुखद ही होना है.

आज देखा जाए तो हमारे सभी रिश्ते -नाते झूठ पर ही टिक कर ही निभ पा रहे हैं. यदि सत्य जान लें तो शायद टिक ही न पाए. जबकि ऐसा होना ही नहीं चाहिए. सत्य को स्वीकार कर रिश्ते निभाना ही सबसे बड़ी बात है.

काश हम जीवन की उन वास्तविकताओं साथ जी पाते जिनके लिए हमें यह अनमोल जन्म मिला था.

हम न जाने किन झूठे पाखंड और प्रपंचों में फंस चुके हैं.

ईश्वर जिसे कभी देखा नहीं उसका हमने व्यवसायीकरण कर दिया है.उस सर्वोच्च दैवीय शक्ति के नाम पर हम अपनी दुकानें चला रहे हैं और अंधाधुंध पैसा कमा रहे हैं.

यह सब केवल एक झूठ और भ्रम के अतिरिक्त और कुछ नहीं है . यह झूठा मार्ग ईश्वर तक कभी नहीं ले जा सकता.


अपने काल्पनिक ईश्वर के मोह में हम जीवन की कई ऐसी संंवेदनशील वास्तविकताओं से मुंह छिपा कर रहते हैं जिन्हें समझना हमारे लिए शायद ज्यादा आवश्यक है.

केवल अपनी कल्पनाओं के ईश्वर के सहारे जी कर हम अपना जीवन व्यर्थ कर रहे हैं. 

हमारा मन एक बड़ा ठग है और लगातार हमें झूठे प्रपंचों में फंसाए रखता है.हमें कोशिश करनी चाहिए इस ठग से सावधान रहें .

यही मन हमें अपना,पराया,मेरा,तुम्हारा करना सिखाता है.

हमें याद रखना चाहिए कि हम सबका अंत एक ही है. अत: तेरा,मेरा,अपना,पराया करने वाले हर झूठ को अपने जीवन से निकाल बाहर करें. हम सब एक हैं.

कबीर के अनुसार 

"सब मे हम है सब हमरे माही ,पंडित अन्धरा समझत नाही!"

जो तुम हो वही हम है जो हम है वही तुम हो ! लेकिन ये सब बातें हमारे धर्म के ठेकेदार हमारी आँखों पर झूठ का पर्दा डालकर रख अपने हित साधते हैं और जीवन के इस परम सत्य को समझने नहीं देते!

अब यहां आखिर में यह प्रश्न उठता है कि जब सब झूठे हैं तो फिर सच्चा कौन है ?  

कबीर समझाते हैं कि सच्चा केवल वही है जिसने ये धर्म के नाम पर किए जाने वाले पाखंड , और दिखावे के चलते तीर्थ ब्रत, मन्दिर, मस्जिद,गिरिजा में जाकर चढ़ाना बंद कर दिया है.

वैसे एक बात यदि दिल पर हाथ रख कर सच्चे मन से पूछी जाए कि क्या हमारी कोई हैसियत है कि हम उस सृष्टिकर्ता को तुच्छ वस्तुएं भेंट कर सकें? जगत में सच्चा केवल वही है जिसने सब कुछ छोड़कर केवल अपने आत्मस्वरुप में गहरा उतर कर जीवन को एक नए सिरे से समझने का प्रयास किया है.

वह नया सिरा है कि आपस में प्रेमपूर्वक, एकदूसरे का सहयोग करते हुए जीवन बिताएं .

एक ऐसा जीवन जो केवल कल्पनाओं के सहारे नहीं चलता . जहां केवल यथार्थ के धरातल पर रहकर इस धरती पर रहने वाले हर जीव,जंतु,वनस्पति और प्राणियों के प्रति प्रेम,समर्पण और सेवा का भाव निहित रहता है.

जो ऐसा करता है केवल वही सच्चा है, वरना सब झूठे हैं!



जब जब इसे सुनता हूं अश्रुधारा निकल पड़ती है.


हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय जय श्री भोलेनाथ नमस्कार 🙏 
जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी नमस्कार शुभ संध्या वंदन 🌄🎪 👣 🍃🌿🌺वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 मित्रों जय श्री राम 👏 🚩 जय श्री सतनाम वाहेगुरू जी

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कामेंट्स

Babita Sharma Sep 13, 2019
शुभ रात्रि वंदन भाई जय श्री राधे कृष्णा 🙏 मातारानी की कृपा आप पर सदा बनी रहे🙏जय माता दी 🚩 🌹मां दुर्गा सदा आपका कल्याण करें 🌹

शामराव ठोंबरे पाटील Sep 13, 2019
@dipakchoudhary नमस्कार 🙏 भाई जी जय श्री गणेश जय श्री महाकाल जी जय श्री महाकाली माता की जय श्री लक्ष्मी नारायण नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 🌃 🎪 🚩 🌠 ✨ नमस्कार 🙏

शामराव ठोंबरे पाटील Sep 13, 2019
@kamalasevakoti नमस्कार कमला दी नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 🌃 🎪 🚩 🌠 ✨ नमस्कार 🙏 शुभ शुक्रवार जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी जय लक्ष्मी नारायण नमस्कार 🙏 🌃 🎪 🚩

शामराव ठोंबरे पाटील Sep 13, 2019
@mohan1734 नमस्कार मोहन जी साहब धन्यवाद 👏 जय श्रीराम जय श्री कृष्ण जय श्री राधे राधे जय श्री हरी जय श्री महाकाल जी जय श्री गणेश जय श्री महाकाली माता की जय श्री राम 👏 जय श्री कृष्ण 👏 जय श्री हरी विठ्ठल नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 🌃 🎪 🚩 🌠 ✨ नमस्कार 🙏

शामराव ठोंबरे पाटील Sep 13, 2019
@babitasharma2 नमस्कार दिदी आपको धन्यवाद 👏 जय श्रीराम जय श्री कृष्ण जय श्री राधे राधे जय श्री हरी विठ्ठल जय श्री गणेश जय श्री महाकाल जी जय श्री लक्ष्मी नारायण नमस्कार 🙏दिदी जय माता की शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 दिदी आपको माता राणी कि कृपा सदा के लिये बनी रहे नमस्कार 🙏

शामराव ठोंबरे पाटील Sep 13, 2019
@karanrathore2 नमस्कार 🙏 भाई जी धन्यवाद 👏 जय श्रीराम जय श्री कृष्ण जय श्री राधे राधे जय श्री सतनाम वाहेगुरू जी नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 🌃 🎪 🚩 🌠 ✨ नमस्कार 🙏

शामराव ठोंबरे पाटील Sep 13, 2019
@mantadev नमस्कार ममता दिदी शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 🌃 🎪 नमस्कार दिदी आपको धन्यवाद 👏 जय श्रीराम जय श्री कृष्ण जय श्री राधे राधे नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 🌃 🎪 🚩 🌠 ✨ नमस्कार 🙏

शामराव ठोंबरे पाटील Sep 13, 2019
@anishtiwari नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 भाई जी धन्यवाद 👏 जय श्रीराम जय श्री कृष्ण जय श्री राधे राधे जय श्री सतनाम वाहेगुरू जी नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 🌃 🎪 🚩 🌠 ✨ नमस्कार 🙏

योगीराज शास्त्री Sep 16, 2019
काली दरबार योगिराज (गोल्ड मैडलिस्ट) विशवास ही परमात्मा है call+91-9352873287 अपना नाम अपनी फोटो, जन्म तारीख भेजो ओर अपने जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी परेशानी का समाधान पाओगे गारंटी से 48 घंटे में घर बैठे सम्पर्क जरुर करे Whatsapp no+91-9352873287 Love marriage specialist ,Love Problem Solution , Husband Wife Divorce problem solution योगिराज +91 9352873287 _हर समस्या का समाधान घर बैठे फोन पर या मिलकर कराये 48 घण्टो में 101% प्रतिशत गारंटेड लाभ_ Note :- लव मैरिज, मनचाहा प्यार, गृहकलेश, जादू टोना, विदेश यात्रा, कारोबार में रुकावट, शादी में अड़चन, रूठे प्यार को मनाना, पति पत्नी में अनबन, सौतन व दुश्मनी से छुटकारा, काला जादू, किसी का किया कराया, पितृ दोष, मांगलिक दोष कालसर्प दोष A to Z समस्याओं का समाधान 48 घंटे में गारंटी के साथ घर बैठे 40 साल का अनुभव Call or Whatsapp no+91-9352873287 Astrologer-- _वशीकरण स्पेशलिस्ट_ आपका आत्मविश्वाश ही मेरी शक्ति है । दुखी व परेशान व्यक्ति एक बार अवश्य सेवा का मौका दे ।call +91-9352873287

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Neha Sharma, Haryana Jan 26, 2020

*ओम् नमः शिवाय*🥀🥀🙏*शुभ प्रभात् वंदन*🥀🥀🙏 सत्यम, शिवम और सुंदरम का रहस्य ! 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ सत्यम, शिवम और सुंदरम के बारे में सभी ने सुना और पढ़ा होगा लेकिन अधिकतर लोग इसका अर्थ या इसका भावार्थ नहीं जानते होंगे। वे सत्य का अर्थ ईश्वर, शिवम का अर्थ भगवान शिव से और सुंदरम का अर्थ कला आदि सुंदरता से लगाते होंगे, लेकिन अब हम आपको बताएंगे कि आखिर में हिन्दू धर्म और दर्शन का इस बारे में मत क्या है। हालांकि वेद, उपनिषद और पुराणों में इस संबंध में अलग अलग मत मिलते हैं, लेकिन सभी उसके एक मूल अर्थ पर एकमत हैं। धर्म और दर्शन की धारणा इस संबंध में क्या हो सकती है यह भी बहुत गहन गंभीर मामला है। दर्शन में भी विचारधाएं भिन्न-भिन्न मिल जाएगी, लेकिन आखिर सत्य क्या है इस पर सभी के मत भिन्न हो सकते हैं। सत्यम👉 योग में यम का दूसरा अंग है सत्य। हिन्दू धर्म में ब्रह्म को ही सत्य माना गया है। जो ब्रह्म (परमेश्वर) को छोड़कर सबकुछ जाने का प्रयास करता है वह व्यक्ति जीवन पर्यन्त भ्रम में ही अपना जीवन गुजार देता है। यह ब्रह्म निराकार, निर्विकार और निर्गुण है। उसे जानने का विकल्प है स्वयं को जानना। अर्थात आत्मा ही सत्य है, जो अजर अमर, निर्विकार और निर्गुण है। शरीर में रहकर वह खुद को जन्मा हुआ मानती है जो कि एक भ्रम है। इस भ्रम को जानना ही सत्य है। 'सत (ईश्वर) एक ही है। कवि उसे इंद्र, वरुण व अग्नि आदि भिन्न नामों से पुकारते हैं।'-ऋग्वेद 'जो सर्वप्रथम ईश्वर को इहलोक और परलोक में अलग-अलग रूपों में देखता है, वह मृत्यु से मृत्यु को प्राप्त होता है अर्थात उसे बारम्बार जन्म-मरण के चक्र में फँसना पड़ता है।'-कठोपनिषद-।।10।। सत्य का अलौकिक अर्थ👉 सत्य को समझना मुश्किल है, लेकिन उनके लिए नहीं जो धर्म और दर्शन को भलिभांति जानते हैं। सत्य का आमतौर पर अर्थ माना जाता है झूठ न बोलना, लेकिन यह सही नहीं है। सत् और तत् धातु से मिलकर बना है सत्य, जिसका अर्थ होता है यह और वह- अर्थात यह भी और वह भी, क्योंकि सत्य पूर्ण रूप से एकतरफा नहीं होता। परमात्मा से परिपूर्ण यह जगत आत्माओं का जाल है। जीवन, संसार और मन यह सभी विरोधाभासी है। इसी विरोधाभास में ही छुपा है वह जो स्थितप्रज्ञ आत्मा और ईश्वर है। सत्य को समझने के लिए एक तार्किक और बोधपूर्ण दोनों ही बुद्धि की आवश्यकता होती है। तार्किक‍ बुद्धि आती है भ्रम और द्वंद्व के मिटने से। भ्रम और द्वंद्व मिटता है मन, वचन और कर्म से एक समान रहने से। शास्त्रों में आत्मा, परमात्मा, प्रेम और धर्म को सत्य माना गया है। सत्य से बढ़कर कुछ भी नहीं। सत्य के साथ रहने से मन हल्का और प्रसन्न चित्त रहता है। मन के हल्का और प्रसंन्न चित्त रहने से शरीर स्वस्थ और निरोगी रहता है। सत्य की उपयोगिता और क्षमता को बहुत कम ही लोग समझ पाते हैं। सत्य बोलने से व्यक्ति को सद्गति मिलती है। गति का अर्थ सभी जानते हैं। ‘सत चित आनन्द’👉 सत् अर्थात मूल कण या तत्व, चित्त अर्थात आत्मा और आनंद अर्थात प्रकृति और आत्मा के मिलन से उत्पन्न अनुभूति और इसके विपरित शुद्ध आत्म अनुभव करना।... परामात्मा और आत्मा का होना ही सत्य है बाकी सभी उसी के होने से है। आत्मा सत (सत्य) चित (चित्त की एकाग्रता से) और आनन्द (परमानन्द की झलक मात्र) को अनुभव रूप महसूस करने लगती है। यानी आत्मा के सत्य में चित्त के लीन या लय हो जाने पर बनी आनन्द की स्थिति ही सच्चिदानन्द स्थिति होती है। सत्य का लौकिक अर्थ👉 सत्य को जानना कठिन है। ईश्वर ही सत्य है। सत्य बोलना भी सत्य है। सत्य बातों का समर्थन करना भी सत्य है। सत्य समझना, सुनना और सत्य आचरण करना कठिन जरूर है लेकिन अभ्यास से यह सरल हो जाता है। जो भी दिखाई दे रहा है वह सत्य नहीं है, लेकिन उसे समझना सत्य है अर्थात जो-जो असत्य है उसे जान लेना ही सत्य है। असत्य को जानकर ही व्यक्ति सत्य की सच्ची राह पर आ जाता है। जब व्यक्ति सत्य की राह से दूर रहता है तो वह अपने जीवन में संकट खड़े कर लेता है। असत्यभाषी व्यक्ति के मन में भ्रम और द्वंद्व रहता है, जिसके कारण मानसिक रोग उत्पन्न होते हैं। मानसिक रोगों का शरीर पर घातक असर पड़ता है। ऐसे में सत्य को समझने के लिए एक तार्किक बुद्धि की आवश्यकता होती है। तार्किक‍ बुद्धि आती है भ्रम और द्वंद्व के मिटने से। भ्रम और द्वंद्व मिटता है मन, वचन और कर्म से एक समान रहने से। सत्य का आमतौर पर अर्थ माना जाता है झूठ न बोलना, लेकिन सत् और तत् धातु से मिलकर बना है सत्य, जिसका अर्थ होता है यह और वह- अर्थात यह भी और वह भी, क्योंकि सत्य पूर्ण रूप से एकतरफा नहीं होता। रस्सी को देखकर सर्प मान लेना सत्य नहीं है, किंतु उसे देखकर जो प्रतीति और भय उत्पन हुआ, वह सत्य है। अर्थात रस्सी सर्प नहीं है, लेकिन भय का होना सत्य है। दरअसल हमने कोई झूठ नहीं देखा, लेकिन हम गफलत में एक झूठ को सत्य मान बैठे और उससे हमने स्वयं को रोगग्रस्त कर लिया। तो सत्य को समझने के लिए जरूरी है तार्किक बुद्धि, सत्य वचन बोलना और होशो-हवास में जीना। जीवन के दुख और सुख सत्य नहीं है, लेकिन उनकी प्रतीति होना सत्य है। उनकी प्रतीति अर्थात अनुभव भी तभी तक होता है जब तक कि आप दुख और सुख को सत्य मानकर जी रहे हैं। सत्य के लाभ👉 सत्य बोलने और हमेशा सत्य आचरण करते रहने से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है। मन स्वस्थ और शक्तिशाली महसूस करता है। डिप्रेशन और टेंडन भरे जीवन से मुक्ति मिलती है। शरीर में किसी भी प्रकार के रोग से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। सुख और दुख में व्यक्ति सम भाव रहकर निश्चिंत और खुशहाल जीवन को आमंत्रित कर लेता है। सभी तरह के रोग और शोक का निदान होता है। शिवम👉 शिवम का संबंध अक्सर लोग भगवान शंकर से जोड़ देते हैं, जबकि भगवान शंकर अलग हैं और शिव अलग। शिव निराकार, निर्गुण और अमूर्त सत्य है। निश्चित ही माता पार्वती के पति भी ध्यानी होकर उस परम सत्य में लीन होने के कारण शिव स्वरूप ही है, लेकिन शिव नहीं। शिव का अर्थ है शुभ। अर्थात सत्य होगा तो उससे जुड़ा शुभ भी होगा अन्यथा सत्य हो नहीं सकता। वह सत्य ही शुभ अर्थात भलिभांति अच्छा है। सर्वशक्तिमान आत्मा ही शिवम है। दो भोओं के बीच आत्मा लिंगरूप में विद्यमान है। शिवम👉 शिवम का संबंध अक्सर लोग भगवान शंकर से जोड़ देते हैं, जबकि भगवान शंकर अलग हैं और शिव अलग। शिव निराकार, निर्गुण और अमूर्त सत्य है। निश्चित ही माता पार्वती के पति भी ध्यानी होकर उस परम सत्य में लीन होने के कारण शिव स्वरूप ही है, लेकिन शिव नहीं। शिव का अर्थ है शुभ। अर्थात सत्य होगा तो उससे जुड़ा शुभ भी होगा अन्यथा सत्य हो नहीं सकता। वह सत्य ही शुभ अर्थात भलिभांति अच्छा है। सर्वशक्तिमान आत्मा ही शिवम है। दो भोओं के बीच आत्मा लिंगरूप में विद्यमान है। सुंदरम् : - यह संपूर्ण प्रकृति सुंदरम कही गई है। इस दिखाई देने वाले जगत को प्रकृति का रूप कहा गया है। प्रकृति हमारे स्वभाव और गुण को प्रकट करती है। पंच कोष वाली यह प्रकृति आठ तत्वों में विभाजित है। त्रिगुणी प्रकृति👉 परम तत्व से प्रकृति में तीन गुणों की उत्पत्ति हुई सत्व, रज और तम। ये गुण सूक्ष्म तथा अतिंद्रिय हैं, इसलिए इनका प्रत्यक्ष नहीं होता। इन तीन गुणों के भी गुण हैं- प्रकाशत्व, चलत्व, लघुत्व, गुरुत्व आदि इन गुणों के भी गुण हैं, अत: स्पष्ट है कि यह गुण द्रव्यरूप हैं। द्रव्य अर्थात पदार्थ। पदार्थ अर्थात जो दिखाई दे रहा है और जिसे किसी भी प्रकार के सूक्ष्म यंत्र से देखा जा सकता है, महसूस किया जा सकता है या अनुभूत किया जा सकता है। ये ब्रहांड या प्रकृति के निर्माणक तत्व हैं। प्रकृति से ही महत् उत्पन्न हुआ जिसमें उक्त गुणों की साम्यता और प्रधानता थी। सत्व शांत और स्थिर है। रज क्रियाशील है और तम विस्फोटक है। उस एक परमतत्व के प्रकृति तत्व में ही उक्त तीनों के टकराव से सृष्टि होती गई। सर्वप्रथम महत् उत्पन्न हुआ, जिसे बुद्धि कहते हैं। बुद्धि प्रकृति का अचेतन या सूक्ष्म तत्व है। महत् या बुद्ध‍ि से अहंकार। अहंकार के भी कई उप भाग है। यह व्यक्ति का तत्व है। व्यक्ति अर्थात जो व्यक्त हो रहा है सत्व, रज और तम में। सत्व से मनस, पाँच इंद्रियाँ, पाँच कार्मेंद्रियाँ जन्मीं। तम से पंचतन्मात्रा, पंचमहाभूत (आकाश, अग्न‍ि, वायु, जल और ग्रह-नक्षत्र) जन्मे। पंचकोष👉 जड़, प्राण, मन, विज्ञान और आनंद। इस ही अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कहते हैं। दरअसल, आप एक शरीर में रहते हैं जो कि जड़ जगत का हिस्सा है। आपके शरीर के भीतर प्राणमय अर्थात प्राण है जो कि वायुतत्व से भरा है। यह तत्व आपके जिंदा रहने को संचालित करता है। यदि आप देखे और सुने गए अनुसार संचालित होते हैं तो आपम प्राणों में जीते हैं अर्थात आप एक प्राणी से ज्यादा कुछ नहीं। मनोमय का अर्थ आपके शरीर में प्राण के अलावा मन भी है जिसे चित्त कहते हैं। पांचों इंद्रियों का जिस पर प्रभाव पड़ता है और समझने की क्षमता भी रखता है। इस मन के अलावा आपके ‍भीतर विज्ञानमन अर्थात एक ऐसी बुद्धि भी है जो विश्लेषण और विभाजन करना जानती है। इसके गहरे होने से मन का लोप हो जाता है और व्यक्ति बोध में जीता है। इस बोध के गहरे होने जाने पर ही व्यक्ति खुद के स्वरूप अर्थात आनंदमय स्वरूप को प्राप्त कर लेता है। अर्थात जो आत्मा पांचों इंद्रियों के बगैर खुद के होने के भलिभांति जानती है। आठ तत्व👉 अनंत-महत्-अंधकार-आकाश-वायु-अग्नि-जल-पृथ्वी। अनंत जिसे आत्मा कहते हैं। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार यह प्रकृति के आठ तत्व हैं। अत: हम एक सुंदर प्रकृति और जगत के घेरे से घिरे हुए हैं। इस घेरे से अलग होकर जो व्यक्ति खुद को प्राप्त कर लेता है वही सत्य को प्राप्त कर लेता है। संसार में तीन ही तत्व है सत्य, शिव और सुंदरम। ईश्वर, आत्मा और प्रकृति। इसे ही सत्य, चित्त और आनंद कहते हैं। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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Pt Vinod Pandey 🚩 Jan 26, 2020

🌞 *~ आज का हिन्दू #पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 27 जनवरी 2020* ⛅ *दिन - सोमवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2076* ⛅ *शक संवत - 1941* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - शिशिर* ⛅ *मास - माघ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - तृतीया पूर्ण रात्रि तक* ⛅ *नक्षत्र - शतभिषा पूर्ण रात्रि तक* ⛅ *योग - वरीयान् 28 जनवरी रात्रि 02:52 तक तत्पश्चात परिघ* ⛅ *राहुकाल - सुबह 08:34 से सुबह 09:56 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:18* ⛅ *सूर्यास्त - 18:24* ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - तृतीया क्षय तिथि* 💥 *विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌷 *मंगलवारी चतुर्थी* 🌷 ➡ *28 जनवरी 2020 (सुबह 08:23 से 29 जनवरी सूर्योदय तक )* 🌷 *मंत्र जप व शुभ संकल्प की सिद्धि के लिए विशेष योग* 🙏🏻 *मंगलवारी चतुर्थी को किये गए जप-संकल्प, मौन व यज्ञ का फल अक्षय होता है ।* 👉🏻 *मंगलवार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना ... जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है...* 🌷 *मंगलवारी चतुर्थी* 🌷 🙏 *अंगार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना …जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…* 🌷 *> बिना नमक का भोजन करें* 🌷 *> मंगल देव का मानसिक आह्वान करो* 🌷 *> चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें* 💵 *कितना भी कर्ज़दार हो ..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा |* 🌐 http://www.vkjpandey.in 🌷 *मंगलवार चतुर्थी* 🌷 👉 *भारतीय समय के अनुसार 28 जनवरी 2020 (सुबह 08:23 से 29 जनवरी सूर्योदय तक) चतुर्थी है, इस महा योग पर अगर मंगल ग्रह देव के 21 नामों से सुमिरन करें और धरती पर अर्घ्य देकर प्रार्थना करें,शुभ संकल्प करें तो आप सकल ऋण से मुक्त हो सकते हैं..* *👉🏻मंगल देव के 21 नाम इस प्रकार हैं :-* 🌷 *1) ॐ मंगलाय नमः* 🌷 *2) ॐ भूमि पुत्राय नमः* 🌷 *3 ) ॐ ऋण हर्त्रे नमः* 🌷 *4) ॐ धन प्रदाय नमः* 🌷 *5 ) ॐ स्थिर आसनाय नमः* 🌷 *6) ॐ महा कायाय नमः* 🌷 *7) ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः* 🌷 *8) ॐ लोहिताय नमः* 🌷 *9) ॐ लोहिताक्षाय नमः* 🌷 *10) ॐ साम गानाम कृपा करे नमः* 🌷 *11) ॐ धरात्मजाय नमः* 🌷 *12) ॐ भुजाय नमः* 🌷 *13) ॐ भौमाय नमः* 🌷 *14) ॐ भुमिजाय नमः* 🌷 *15) ॐ भूमि नन्दनाय नमः* 🌷 *16) ॐ अंगारकाय नमः* 🌷 *17) ॐ यमाय नमः* 🌷 *18) ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः* 🌷 *19) ॐ वृष्टि कर्ते नमः* 🌷 *20) ॐ वृष्टि हराते नमः* 🌷 *21) ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः* 🙏 *ये 21 मन्त्र से भगवान मंगल देव को नमन करें ..फिर धरती पर अर्घ्य देना चाहिए..अर्घ्य देते समय ये मन्त्र बोले :-* 🌷 *भूमि पुत्रो महा तेजा* 🌷 *कुमारो रक्त वस्त्रका* 🌷 *ग्रहणअर्घ्यं मया दत्तम* 🌷 *ऋणम शांतिम प्रयाक्ष्मे* 🙏 *हे भूमि पुत्र!..महा क्यातेजस्वी,रक्त वस्त्र धारण करने वाले देव मेरा अर्घ्य स्वीकार करो और मुझे ऋण से शांति प्राप्त कराओ..* 🌐 http://www.vkjpandey.in 🙏🏻🌹🌻☘🌷🌺🌸🌼💐🙏

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