Durgesh Prasad
Durgesh Prasad Dec 20, 2016

Jai shivsankar jai Suraj dev ki

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Neha Sharma Sep 25, 2020

*या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते। *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। । *जय माता की*🙏🌷🌷 *शुभ प्रभात् नमन*🙏🌷🌷 *कैलाश पर्वत के ध्यानी की अर्धांगिनी मां सती ही दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में विख्या हुई उन्हें ही ही शैलपुत्री‍, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री आदि नामों से जोड़कर देखा जाता है। जिन्हें दुर्गा, जगदम्बा, अम्बे, शेरांवाली आदि कहा जाता है वे सदाशिव की अर्धांगिनी है। 🌷!! माता की कथा : !!🌷 *आदि सतयुग के राजा दक्ष की पुत्री सती माता को शक्ति कहा जाता है। शिव के कारण उनका नाम शक्ति हो गया। हालांकि उनका असली नाम दाक्षायनी था। यज्ञ कुंड में कुदकर आत्मदाह करने के कारण भी उन्हें सती कहा जाता है। बाद में उन्हें पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती नाम इसलिए पड़ा की वह पर्वतराज अर्थात् पर्वतों के राजा की पुत्र थी। राजकुमारी थी। *पिता की ‍अनिच्छा से उन्होंने हिमालय के इलाके में ही रहने वाले योगी शिव से विवाह कर लिया। एक यज्ञ में जब दक्ष ने सती और शिव को न्यौता नहीं दिया, फिर भी माता सती शिव के मना करने के बावजूद अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गई, लेकिन दक्ष ने शिव के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें कही। सती को यह सब बरदाश्त नहीं हुआ और वहीं यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए। *यह खबर सुनते ही शिव ने अपने सेनापति वीरभद्र को भेजा, जिसने दक्ष का सिर काट दिया। इसके बाद दुखी होकर सती के शरीर को अपने सिर पर धारण कर शिव ‍क्रोधित हो धरती पर घूमते रहे। इस दौरान जहां-जहां सती के शरीर के अंग या आभूषण गिरे वहां बाद में शक्तिपीठ निर्मित किए गए। जहां पर जो अंग या आभूषण गिरा उस शक्तिपीठ का नाम वह हो गया। इसका यह मतलब नहीं कि अनेक माताएं हो गई। *माता पर्वती ने ही ‍शुंभ-निशुंभ, महिषासुर आदि राक्षसों का वध किया था। 🌷*माता का रूप*🌷 *मां के एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल का फूल है। पितांबर वस्त्र, सिर पर मुकुट, मस्तक पर श्वेत रंग का अर्थचंद्र तिलक और गले में मणियों-मोतियों का हार हैं। शेर हमेशा माता के साथ रहता है। 🌷*माता की प्रार्थना*🌷: *जो दिल से पुकार निकले वही प्रार्थना। न मंत्र, न तंत्र और न ही पूजा-पाठ। प्रार्थना ही सत्य है। मां की प्रार्थना या स्तुति के पुराणों में कई श्लोक दिए गए है। 🌷*माता का तीर्थ*🌷: *शिव का धाम कैलाश पर्वत है वहीं मानसरोवर के समीप माता का धाम है। जहां दक्षायनी माता का मंदिर बना है। वहीं पर मां साक्षात विराजमान है। 🌷🙏!! जय माता दी !!🙏🌷 *मेरी विनती है मां बस एक उपकार कर देना जो लिखे मां उसकी झोली खुशियों से भर देना 🌷🙏!! जय माता दी !!🙏🌷

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Jitendre Sep 25, 2020

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Ramesh Sep 25, 2020

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Kumarpal Shah Sep 25, 2020

🕉️ namah shivay ✔️ @ 🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞 ⛅ दिनांक 25 सितम्बर 2020 ⛅ दिन - शुक्रवार ⛅ विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076) ⛅ शक संवत - 1942 ⛅ अयन - दक्षिणायन ⛅ ऋतु - शरद ⛅ मास - अधिक अश्विन ⛅ पक्ष - शुक्ल ⛅ तिथि - नवमी रात्रि 06:43 तक तत्पश्चात दशमी ⛅ नक्षत्र - पूर्वाषाढा रात्रि 06:31 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा ⛅ योग - शोभन रात्रि 08:39 तक तत्पश्चात अतिगण्ड ⛅ राहुकाल - सुबह 11:00 से दोपहर 12:30 तक ⛅ सूर्योदय - 06:29 ⛅ सूर्यास्त - 18:30 ⛅ दिशाशूल - पश्चिम दिशा में ⛅ व्रत पर्व विवरण - 💥 विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 कोई गुस्सैल अशांत हो तो 🌷 🌙 30 अक्टूबर 2020 शुक्रवार को शरद पूनम आयेगी | जिस पत्नी का पति झगडालू हो, गुस्सेबाज हो, चिडचिडा हो अथवा जरा-जरा बात में कोई भी भड़क जाता हो, भड्कू हो तो पूनम की रात खीर बनाओ और 8 बजे की बनी हुई, 7 बजे की बनी हुई खीर पूनम के चंद्रमा के किरण उसमे पड़े, नेट से, जाली से या मलमल के कपडे से ढंक दो | बीच-बीच में चांदी का चम्मच, चांदी की कटोरी हो तो अच्छा है खीर हिलाओ और वो चंद्रमा की किरणों वाली खीर पति को खिलाओ | कितना भी झगड़ेबाज, गुस्सेबाज, अशांत व्यक्ति शांत हो जायेगा, झगड़े शांत हो जायेगे | 🙏🏻 Pujya Bapuji Junagarh 26th Aug’ 2012 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 कोई आपको शत्रु मान के परेशान करता हो तो 🌷 🔥 कोई आपको शत्रु मान के परेशान करता हो तो प्रतिदिन प्रात:काल पीपल के नीचे वृक्ष के दक्षिण की ओर अरंडी के तेल का दीपक लगायें तथा थोड़ी देर गुरुमंत्र या भगवन्नाम जपें और उस व्यक्ति को भगवान सद्बुद्धि दें तथा मेरा, उसका-सबका मंगल हो ऐसी प्रार्थना करें | कुछ दिनों तक ऐसा करने से शत्रु शनै: शनै : दब जाते हैं व शत्रु पीड़ा धीरे-धीरे दूर हो जाती है | 🙏🏻 ऋषिप्रसाद – अगस्त २०२० से 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 गुरुदेव का स्मरण–प्रेम–अनुष्ठान 🌷 🙏🏻 गुरुदेव की ध्यान की एम्. पी. थ्री वगैरह सुनते हुये कभी गुरुदेव की तस्वीर को देखते रहे | फिर आँखों के द्वारा ऐसी भावना की कि मेरे गुरुदेव को मेरे भीतर ही ले जा रहा हूँ | मन से दूसरी चिंताएं और दूसरे लोगों का चिंतन नहीं निकलता हो ना ! तो गुरुदेव की तस्वीर को देखते देखते ये भाव किया कि मैं मेरे गुरुदेव को भीतर ले जा रहा हूँ और भीतर जो भी कचरा है मेरे-तेरे का वो जाये बाहर| ये भी कर सकते हैं | कभी अनुष्ठान किया जाए तो केवल माला का ही नहीं गुरुदेव के ही सुमरन-ध्यान-प्रेम आदि का अनुष्ठान २१ दिन, ११ दिन, ७ दिन| दिन में तीन बार गुरुदेव के सामने बैठ जाये और उनकी तस्वीर को निहारते –निहारते उन्ही में खो जाये | दूरी, भेद और भिन्नता को मिटाये, शरणागती और प्यार को सजीव बनाये | कभी ऐसा भी एक अनुष्ठान क्यों ना किया जाए | 🙏🏻 Shri Sureshanandji Surat 10th Aug' 2012 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻 T.me/HinduPanchang

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Archana Singh Sep 25, 2020

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Tapsya Sep 25, 2020

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D N SINGH RATHORE Sep 25, 2020

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