Mamta Chauhan
Mamta Chauhan Apr 4, 2020

Radhey Radhey Radhey radhey 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿

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कामेंट्स

Geeta Sharma Apr 4, 2020
जय श्री राधे,, जय श्री राम,, प्रभु श्री राम का आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर सदैव बना रहे

JAGDISH BIJARNIA Apr 4, 2020
Jai shri radhe krishna sister ji subh sandhya vandan 🌹🌹🙏🙏

Harpal bhanot Apr 4, 2020
jai mata rani di 🌷🌷🌷 Beautiful good Night ji mere Sister 🙏🌻🙏

Harpal bhanot Apr 4, 2020
jai mata rani di 🌷🌷🌷 Beautiful good Night ji mere Sister 🙏🌻🙏

Narayan Tiwari Apr 4, 2020
शुभ-एकादशी🚩सुरक्षित-सर्तक बनें, लक्ष्मी नारायण नारायण हरी हरी बोलो नारायण नारायण हरी हरी! भजो नारायण नारायण हरी हरी जय जय नारायण नारायण हरी हरी!!

Ansouya Ansouya Apr 4, 2020
जय श्री राधे कृष्ण जी शुभ संध्या वनदन मेरी प्यारी बहना आप का हर पल मंगलमय हो जी हरी कृपा बनी रहे बहना 🙏🌹🌹🌹

Yodhan Singh Apr 4, 2020
जय श्री राधे कृष्णा।

Neeru Miglani Apr 4, 2020
*🙏🌹 हरे कृष्ण हरे कृष्ण 🌹कृष्ण कृष्ण हरे हरे 🌹हरे राम हरे राम 🌹राम राम हरे हरे🌹🙏*

Mavjibhai Patel Apr 4, 2020
जय श्री राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे जय श्री कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा शुभ रात्री वंदन आदरणीय दीदी नमन और बताओ दीदी आगरा में कोरोना का मरीज बढ गई है

*प्राचीनकाल में गोदावरी नदी के किनारे वेदधर्म मुनि का आश्रम था। एक दिन गुरुजी ने अपने शिष्यों से कहा की- शिष्यों! अब मुझे कोढ़ निकलेगा और मैं अंधा भी हो जाऊँगा, इसिलिए काशी में जाकर रहूँगा। है कोई शिष्य जो मेरे साथ रह कर सेवा करने के लिए तैयार हो ? सब चुप हो गये। उनमें संदीपनी ने कहा- गुरुदेव! मैं आपकी सेवा में रहूँगा। गुरुदेव ने कहा इक्कीस वर्ष तक सेवा के लिए रहना होगा। संदीपनी बोले इक्कीस वर्ष तो क्या मेरा पूरा जीवन ही अर्पित है आपको। वेदधर्म मुनि एवं संदीपन काशी में रहने लगे । कुछ दिन बाद गुरु के पूरे शरीर में कोढ़ निकला और अंधत्व भी आ गया । शरीर कुरूप और स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया । संदीपनी के मन में लेशमात्र भी क्षोभ नहीं हुआ । वह दिन रात गुरु जी की सेवा में तत्पर रहने लगा । गुरु को नहलाता, कपड़े धोता, भिक्षा माँगकर लाता और गुरुजी को भोजन कराता । गुरुजी डाँटते, तमाचा मार देते... किंतु संदीपनी की गुरुसेवा में तत्परता व गुरु के प्रति भक्तिभाव और प्रगाढ़ होता गया।* *गुरु निष्ठा देख काशी के अधिष्ठाता देव विश्वनाथ संदीपनी के समक्ष प्रकट होकर बोले- तेरी गुरुभक्ति देख कर हम प्रसन्न हैं । कुछ भी वर माँग लो । संदीपनी गुरु से आज्ञा लेने गया और बोला भगवान शिवजी वरदान देना चाहते हैं, आप आज्ञा दें तो आपका रोग एवं अंधेपन ठीक होने का वरदान मांग लूँ ? गुरुजी ने डाँटा,बोले- मैं अच्छा हो जाऊँ और मेरी सेवा से तेरी जान छूटे यही चाहता है तु ? अरे मूर्ख ! मेरा कर्म कभी-न-कभी तो मुझे भोगना ही पड़ेगा । संदीपनी ने भगवान शिवजी को वरदान के लिए मना कर दिया। शिवजी आश्चर्यचकित हो गये और गोलोकधाम पहुंच के श्रीकृष्ण से पूरा वृत्तान्त कहा। श्रीकृष्ण भी संदीपनी के पास वर देने आये। संदीपनी ने कहा- प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मुझे यही वर दें कि गुरुसेवा में मेरी अटल श्रद्धा बनी रहे।* *एक दिन गुरुजी ने संदीपनी को कहा कि- मेरा अंत समय आ गया है। सभी शिष्यों से मिलने की इच्छा है । संदीपनी ने सब शिष्यों को सन्देश भेज दिया। सारे शिष्य उनके दर्शन के लिए आये। गुरुजी ने सभी शिष्यों कुछ न कुछ दिया । किसी को पंचपात्र, किसी को आचमनी , किसी को आसन किसी को माला दे दी । जब संदीपनी का आये तो सभी वस्तुएं समाप्त हो चुकी थी । गुरुजी चुप हो गए,फिर बोले कि मैं तुम्हे क्या दूँ ? तुम्हारी गुरूभक्ति के समान मेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है । मैं तुम्हें यह वर देता हूँ कि- त्रिलोकी नाथ का अवतार होने वाला है, वह तुम्हारे शिष्य बनेंगे । संदीपनी के लिए इससे बड़ी भेंट और क्या होती । उन्होंने गुरूजी की अंत समय तक सेवा की। जब श्रीकृष्ण अवतार हुआ तो गुरुजी के दिए उस वरदान को फलीभूत करने के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दूर उज्जैन में स्थित संदीपनी ऋषि के आश्रम में भ्राता बलराम जी के साथ आए और संदीपनी ऋषि के शिष्य बने... ऐसी है गुरुभक्ति की शक्ति। इसिलिए गुरुभक्ति ही सार है... राधे राधे...संगृहीत कथा*🙏🚩

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rekha sunny May 10, 2020

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rekha sunny May 10, 2020

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Sanjay Singh May 10, 2020

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Sanjay Singh May 10, 2020

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BIJAY PANDAY May 10, 2020

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rekha sunny May 10, 2020

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Sharma May 10, 2020

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Meena Dubey May 10, 2020

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