Pandit Raj
Pandit Raj Sep 7, 2017

भगवान की योजना

भगवान की योजना

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भगवान की प्लानिंग
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एक बार भगवान से उनका सेवक कहता है, भगवान- आप एक जगह खड़े-खड़े थक गये होंगे, एक दिन के लिए मैं आपकी जगह मूर्ति बन कर खड़ा हो जाता हूं, आप मेरा रूप धारण कर घूम आओ

भगवान मान जाते हैं, लेकिन शर्त रखते हैं कि जो भी लोग प्रार्थना करने आयें, तुम बस उनकी प्रार्थना सुन लेना कुछ बोलना नहीं, मैंने उन सभी के लिए प्लानिंग कर रखी है, सेवक मान जाता है

सबसे पहले मंदिर में बिजनेस मैन आता है और कहता है, भगवान मैंने एक नयी फैक्ट्री डाली है, उसे खूब सफल करना वह माथा टेकता है, तो उसका पर्स नीचे गिर जाता है वह बिना पर्स लिये ही चला जाता है सेवक बेचैन हो जाता है. वह सोचता है कि रोक कर उसे बताये कि पर्स गिर गया, लेकिन शर्त की वजह से वह नहीं कह पाता

इसके बाद एक गरीब आदमी आता है और भगवान को कहता है कि घर में खाने को कुछ नहीं. भगवान मदद करो तभी उसकी नजर पर्स पर पड़ती है. वह भगवान का शुक्रिया अदा करता है और पर्स लेकर चला जाता है

अब तीसरा व्यक्ति आता है, वह नाविक होता है वह भगवान से कहता है कि मैं 15 दिनों के लिए जहाज लेकर समुद्र की यात्रा पर जा रहा हूं, यात्रा में कोई अड़चन न आये भगवान..

तभी पीछे से बिजनेस मैन पुलिस के साथ आता है और कहता है कि मेरे बाद ये नाविक आया
है इसी ने मेरा पर्स चुरा लिया है, पुलिस नाविक को ले जा रही होती है तभी सेवक बोल पड़ता है

अब पुलिस सेवक के कहने पर उस गरीब आदमी को पकड़ कर जेल में बंद कर देती है

रात को भगवान आते हैं, तो सेवक खुशी खुशी पूरा किस्सा बताता है भगवान कहते हैं, तुमने किसी का काम बनाया नहीं,
बल्कि बिगाड़ा है वह व्यापारी गलत धंधे करता है,अगर उसका पर्स गिर भी गया, तो उसे फर्क नहीं पड़ता था इससे उसके पाप ही कम होते, क्योंकि वह पर्स गरीब इंसान को मिला था. पर्स मिलने पर उसके बच्चे भूखों नहीं मरते. .

रही बात नाविक की, तो वह जिस यात्रा पर जा रहा था, वहां तूफान आनेवाला था, अगर वह जेल में रहता, तो जान बच जाती. उसकी पत्नी विधवा होने से बच जाती. तुमने सब गड़बड़ कर दी

कई बार हमारी लाइफ में भी ऐसी प्रॉब्लम आती है, जब हमें लगता है कि ये मेरे साथ ही
क्यों हुआ लेकिन इसके पीछे भगवान की प्लानिंग होती है जब भी कोई प्रॉब्लमन आये. उदास मत होना

इस कहानी को याद करना और सोचना कि जो भी होता है, अच्छे के लिए होता है

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Priti Agarwal May 23, 2019

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Sunil upadhyaya May 23, 2019

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Swami Lokeshanand May 23, 2019

पंचवटी में सूर्पनखा का बड़ा प्रकोप है। सूर्पनखा वासना है, वही इस जगत के दुखों का एकमात्र कारण है। जो भी दुखी है, समझ लो उससे सूर्पनखा चिपटी है। जो इस देह रूपी पंचवटी में आया, सूर्पनखा ने सब पर डोरे डाले। जो इसकी चिकनी चुपड़ी बातों में आ गया, उसकी नाक कटी, वह मारा गया। वही बचा जिसने सत्संग किया और इसकी ओर झांका तक नहीं। उसने नाक कटवाई नहीं, बल्कि इसी की नाक काट दी। जैसे पढ़ाई पूरी होते ही परीक्षा आती है, रामजी का सत्संग पूरा होते ही सूर्पनखा आ गई। अब कच्चे और सच्चे का भेद मालूम पड़ेगा। सूर्पनखा भेष बदलकर आई है, बहुत बनावट के साथ आई है, क्योंकि भेष बदलना तो लंकावालों की परंपरा ही है, मारीच ने बदला, रावण ने बदला। इससे बचने का उपाय देखें, यह आँख से मन में घुसती है, इसीलिए सच्चे सत्संगी लक्षमणजी तुरंत भगवान की ओर देखने लगे। सीता जी ने भी उसे नहीं देखा, वे रामजी के चरणों की ओर देखने लगीं। रामजी सीताजी को ही देखते रहे, उन्होंने भी सूर्पनखा को दृष्टि नहीं दी। माने वासना आक्रमण करे तो भगवान के रूप का चिंतन करें, भगवान के चरणों का आश्रय लें, तब वासना भीतर प्रवेश नहीं कर पाएगी। साधक कभी भी अपने आचरण के बल पर निश्चिंत न रहे, भगवान के चरण के बल पर निश्चिंत रहे। सूर्पनखा की बात नहीं बनी, बने भी कैसे? जहाँ ज्ञानदेव रामजी हों, भक्तिदेवी सीताजी विराजमान हों, वैराग्यदेव लक्षमणजी हों, माने ज्ञान भक्ति और वैराग्य तीनों हों, वहाँ वासना की दाल कैसे गले? अब विशेष ध्यान दें, वासना में बाधा पड़ी तो क्रोध उत्पन्न हुआ, क्रोध हुआ तो भक्ति पर प्रहार का प्रयास हुआ। भगवान कुछ भी सह लेते हैं, भक्ति पर चोट कैसे सहन हो? भगवान ने तुरंत संकेत किया, सावधान जीव ने वासना को नाक कान विहीन कर दिया, वासना का विरूपीकरण कर दिया, कि भविष्य में कभी छल न पाए। देखो, जहाँ वासना घुस जाए वहाँ न ज्ञान बचता, न मान। तो जहाँ ज्ञान नहीं, वहाँ कान किस काम के, और जहाँ मान नहीं, वहाँ नाक कैसी? यों परीक्षा उतीर्ण हुई। भक्ति की रक्षा हुई।

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RenuSuresh May 22, 2019

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Anju Mishra May 22, 2019

विचित्र पेड़ों के बारे में जानकारी जय श्री राधे कृष्णा 🙏🌹 चमत्कारिक बरगद : यह वृक्ष आंध्रप्रदेश के नालगोंडा में स्थित है। इसकी खासियत यह है कि इस पर विभिन्न जंगली जानवरों की आकृतियां बनी हुई है। सांप, बिच्छु, मगरमच्छ, शेर, अजगर आदि खतरनाक पशु और पक्षियों की आकृतियां संपूर्ण वृक्ष पर बनी हुई है। कहते हैं कि यह बाओबाज़ ट्री है और इसका तना दुनिया में किसी भी वृक्ष से बड़ा है।  लोगों का मानना है कि इस पेड़ के तनों पर किसी ने इन कलाकृतियों को गढ़ा है। उनका मानना है कि यह कोई चमत्कार नहीं है। दरअसल आंध्रप्रदेश के नलगोंडा में ऐसा कोई पेड़ नहीं है। ये तो डिज़्नी लैंड में कला का एक नमूना है। हालांकि वहीं बहुतयात लोगों का मानना है कि यह अनोखी प्रजाति का पेड़ है जोकि पूरी दुनिया में इकलौता है। नालगोंडा आंध्रप्रदेश का एक महत्‍वपूर्ण जिला है इस जिले का पहले नाम नीलगिरी था। नालगोंडा को पुरातत्‍वशास्त्रियों का स्‍वर्ग कहा जाता क्योंकि यहां पाषाणयुग और पूर्वपाषाण युग के अवशेष पाए गए हैं। ता फ्रोम ट्री ऑफ कंबोडिया :कंबोडिया के अंगारकोट में स्थित इस वृक्ष को देखने के लिए विश्‍व के कोने-कोने से लोग आते हैं। अंगारकोट में विश्‍व प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर भी है। यहां का जंगली क्षेत्र सिल्क कॉटन के वृक्षों के लिए भी प्रसिद्ध है।  यहां का 'ता फ्रोम बौ‍द्ध मंदिर' 12वीं शताब्दी में बनाया गया था हालांकि अब तो यह खंडहर में बदल चुका है। सैकड़ों साल पुराने मंदिर और इन पेड़ों को विश्‍व धरोहर घोषित कर दिया गया है। यहां के विशालकाय मंदिरों को इन वृक्षों ने ढंक कर रखा है। मंदिर और वृक्ष का यह अद्भुत मिलन देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं। कैलीफोर्निया का ग्रेट सिकुआ : अमेरिका के कैलीफोर्निया राज्य के सियेरा नेवादा ढलानों के सबसे बड़े पेड़ के लिए प्रसिद्ध है। ग्रेट सिकुआ नामक यह पेड़ 'सिकुआ डेन्ड्रान' वंश का है और इसका जातिगत नाम 'जाइगे स्टिअम' है। इस पेड़ का व्यास 12 मीटर तथा कुल ऊंचाई 82 मीटर है। भूमि से 54 मीटर की ऊंचाई पर इसका तना 4 मीटर मोटा है और इसकी सबसे लंबी शाखा की लंबाई 42.3 मीटर तथा व्यास 1.8 मीटर है। इसके तने का कुल आयतन 1401.84 घनमीटर है। अमेरिका के सिकुआ राष्ट्रीय पार्क में इस प्रकार के 300 से अधिक पेड़ हैं। इनमें से कुछ का नाम अमेरिका के प्रसिद्ध व्यक्तियों के नाम पर रखा गया है। ड्रैगन ट्री, कैनरी द्वीप : ड्रैगन वृक्ष को जीवित जीवाश्म इसीलिए माना जाता है, क्योंकि जब इसे काटा जाता है तो इसमें से खून की तरह लाल रंग का रस निकलता है। इस वृक्ष का आधार चौड़ा, मध्य भाग संकरा और ऊपर का भाग किसी छतरी की तरह तना हुआ है। इसी कारण यह भाग ऐसा लगता है कि सैंकड़ों पेड़ उगकर एकसाथ बंध गए हो। अफ्रीका के उत्तरी पश्‍चिमी तट पर कैनरी आयलैंड स्थित है, इस वृक्ष को देखने के लिए विश्वभर से लोग आते हैं। लेकिन इसे ड्रैगन ट्री क्यों कहा जाता है यह समझ से परे है।

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