जय श्री कृष्णा

जय श्री कृष्णा

#कृष्णजन्माष्टमी
"जन्माष्टमी:- कान्हा की जन्म कथा"
श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है और रासलीला का आयोजन होता है।
श्री कृष्ण की जन्म कथा इस प्रकार है…
स्कंद पुराण के मुताबिक द्वापर युग के दौरान मथुरा में राजा उग्रसेन राज करते थे, लेकिन उनके पुत्र कंस ने उनसे गद्दी छीन ली थी। उग्रसेन की एक बेटी देवकी भी थीं। देवकी की शादी यदुवंशी सरदार वसुदेव से हुई थी। जब इनका विवाह हुआ तो कंस खुद रथ को हांकते हुए अपनी बहन को ससुराल छोड़कर आया था। उसी दौरान आकाश से एक आकाशवाणी हुई, ‘हे कंस, जिस देवकी को तू प्रेम के साथ ससुराल विदा करने जा रहे है, उसकी ही आठवीं संतान तुम्हारा विनाश करेगी।’ जैसे ही कंस ने यह सुना तो वह गुस्सा हो गया और उसने अपनी बहन को ही मारने की कोशिश की। यह देखकर यदुवंशी भी गुस्सा हो गए और युद्ध की स्थिति बन गई, लेकिन वसुदेव युद्ध नहीं चाहते थे। उन्होंने कंस को वादा किया कि तुम्हें देवकी से डरने की जरूरत नहीं है, जैसे ही हमारी आठवीं संतान पैदा होगी, तुम्हें सौंप दी जाएगी। इस पर कंस मान गया।
इसके बाद कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को जेल में बंद कर दिया और उसके बाहर कड़ा पहरा लगवा दिया। इस दौरान देवकी और वसुदेव को जो सात संतान हुईं, उन्हें कंस ने मार दिया। इसके बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उसी समय यशोदा ने एक कन्या को जन्म दिया था। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो उस वक्त भगवान विष्णु प्रकट हुए। उन्होंने वसुदेव से कहा कि मैं ही तुम्हारे बच्चे के रूप में जन्मा हूं। भगवान विष्णु ने ही वसुदेव को सलाह दी कि तुम मुझे अभी नंदजी के घर वृंदावन में छोड़कर आ जाएं और वहां जो कन्या पैदा हुई है, उसे लाकर कंस को दे दो।
वसुदेव ने भगवान विष्णु की बात मानी और भगवान श्री कृष्ण को लेकर वृंदावन में नंदजी के घर पहुंच गए। इस दौरान वसुदेव को यह देखकर हैरानी हुई कि सारे पहरेदार सोए हुए हैं, उनकी हाथों की बेड़ियां खुल गईं और यमुना नदी ने उन्हें अपने आप रास्ता दे दिया। इसके बाद वे भगवान कृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को मथुरा ले आए। इसके बाद जब कंस को पता लगा कि देवकी को बच्चा हुआ है तो वह वहां पहुंचा और उस कन्या को मारने की कोशिश की, लेकिन वह कन्या आकाश में उड़ गईं। उसके बाद आसमान से आकाशवाणी हुई, ‘मुझे मारने से क्या होगा, तुम्हें मारने वाला वृंदावन में है, वह जल्द ही तुम्हें पापों की सजा देगा।’ इसके बाद कंस ने कई बार भगवान श्री कृष्ण को मारने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें नाकाम रहा। जब भगवान श्री कृष्ण युवा हुए तो उन्होंने अपने मामा कंस का वध कर दिया।

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कामेंट्स

Kunwar Sain Yadav Aug 16, 2017
अच्छी जानकारी असज की पीढ़ी को पढ़नी आवश्यक है।

Nikhil Nair Aug 19, 2018

Jyot Pranam Dhoop +110 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 109 शेयर
Ayan Apte Aug 19, 2018

Jyot Flower Pranam +69 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 45 शेयर
seema Aug 19, 2018

शंख की पूजा के लिये मंत्र
शंख की पूजा इस मन्त्र से करनी चाहिए-त्वंपुरा सागरोत्पन्न विष्णुनाविघृतःकरे देवैश्चपूजितः सर्वथौपाच्चजन्यमनोस्तुते।🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

🐚
शंख का नाम लेते ही मन में पूजा - और भक्ति
की भावना आ जाती है ...... !

�...

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Like Belpatra Pranam +162 प्रतिक्रिया 46 कॉमेंट्स • 219 शेयर

https://youtu.be/biFSTwGg9yI

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Anant 98251
"Bapuji Dashrathbhai patel "

"Behad ki paramshanti "

Pranam Like Belpatra +63 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 149 शेयर
Upeander Panwar Aug 19, 2018

भगवान् गणेश के सदाशिव मंदिर, नुग्घहल्ली; कर्नाटक हिंदू मंदिर से दर्शन।

Jyot Pranam Flower +192 प्रतिक्रिया 13 कॉमेंट्स • 59 शेयर

मांं भैयसासूर मर्दिनि भैसवा जिला राजगढ मःप्र

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pramod Pandey Aug 19, 2018

श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुरु सुधार बरनौ रघुबर बिमल जसु जो दायक फल चार बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरो पवन कुमार बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपीस तिहुं लोक उजागर राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र ...

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nidhi sharma Aug 19, 2018

Bell Pranam Flower +207 प्रतिक्रिया 39 कॉमेंट्स • 79 शेयर

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