अमृतवाणी सुंदर

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jitendra mishra Oct 21, 2020

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SURESH KATYAL Oct 21, 2020

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Radha rani Oct 21, 2020

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Hari shankar Shukla Oct 21, 2020

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SURESH KATYAL Oct 21, 2020

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K.p gupta Oct 21, 2020

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Gopal narayan sharma Oct 21, 2020

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*आओ हमारे द्वार पे,* *मोहन कभी कभी।* *वो दिन भी होगा करुणाकर,* हम पर करुणा बरसाएंगे, हम रो कर अर्ज सुनाएंगे, वो हसकर पास बुलाएंगे। आओ हमारे द्वार पे, मोहन कभी कभी, हम पर भी हो करुणा भरी, हम पर भी हो करुणा भरी, चितवन कभी कभी, आओ हमारे द्वार भी, मोहन कभी कभी।। माना की दीन हिन है, भक्ति ना भाव है, अधमो को भी देते रहो, दर्शन कभी कभी, हम पर भी हो करुणा भरी, चितवन कभी कभी, आओ हमारे द्वार भी, मोहन कभी कभी।। आओ की ऐसे रूप में, पहचान ले तुम्हे, रोली तिलक हो भाल पर, चंदन कभी कभी, हम पर भी हो करुणा भरी, चितवन कभी कभी, आओ हमारे द्वार भी, मोहन कभी कभी।। माथे मोर पंख हो, काँधे पे कामली, हाथों में बांसुरी हो, सुदर्शन कभी कभी, हम पर भी हो करुणा भरी, चितवन कभी कभी, आओ हमारे द्वार भी, मोहन कभी कभी।। आओ हमारे द्वार पे, मोहन कभी कभी, हम पर भी हो करुणा भरी, हम पर भी हो करुणा भरी, चितवन कभी कभी, आओ हमारे द्वार भी, मोहन कभी कभी।। *🙏जय हो बरसाने वाली की 🙏*

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Dr. SEEMA SONI Oct 21, 2020

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