Acharya Rajesh
Acharya Rajesh Jan 13, 2021

☀️ *सम्पूर्ण लेख:- मकरसक्रांन्ति,(14 जनवरी 2021)* *सूर्य का मकर राशि प्रवेश- 14 जनवरी 8:14 am* *सक्रांति पुण्यकाल:- 14 जन०, 7:15 am से लेकर सारा दिन विशेषतः 2:38 pm तक)* मकरसक्रांन्ति भारत के वैदिककालीन पर्वो मे से एक पर्व है, जोकि हर वर्ष प्रायः 14 जनवरी को आता है । वर्ष 2021 मे, 14 जनवरी प्रातः 8:14 am पर सूर्य राशि परिवर्तन करके मकर राशि मे प्रवेश कर रहे हैं, अतः मकरसंक्रांति का पुण्यकाल प्रातः सूर्योदय 7:15 am से प्रांरभ होकर दोपहर 2:38 pm तक अधिक प्रभावी रहेगा । परंतु इस समय के भीतर यदि स्नान-दान इत्यादि पुण्य कर्म न भी कर पाये तो भी पूरे दिनभर संक्रांति का स्नान-दान इत्यादि किया जा सकता है। *क्या होती है सक्रांति :-* सूर्य साल के बारह महीनो मे प्रत्येक माह एक एक राशि मे भ्रमण करते है, और प्रत्येक अंग्रेज़ी माह के मध्य 15 तारीख़ के लगभग एक राशि से दूसरी राशि मे सूर्य के प्रवेश करने के समय को ही सक्रांति कहते है । *क्यो शुभ होती है मकर सक्रांति:-* मघ्य दिसम्बर से 13 जनवरी तक सूर्य धनु राशि मे होते है, धनु राशि मे सूर्य के होने से "पौष का महीना" अर्थात "मलमास" होता है, जिसमे सभी तरह के ब्याह-शादी आदि समस्त शुभ कार्य वर्जित होते है, और जब सूर्य इसी धनु राशि से निकल कर मकर राशि मे प्रवेश करते है तो "उतरायण अर्थात शुभ मांगलिक" कार्यो की शुरुआत का समय आंरभ हो जाता है । छह माह के काल "उतरायण" आंरभ होने के दिन को ही मकरसंक्रान्ति पर्व के रुप मे मनाया जाता है । दरअसल सूर्य वर्ष के बारह महीनो मे प्रत्येक माह अलग-2, बारह राशियो मे भ्रमण करते है:- *1. सूर्य का दक्षिणायन* मध्य जुलाई से लेकर 13 जनवरी तक के इस समय यानि ( सूर्य के कर्कराशि से धनु राशि तक के भ्रमण के समय) भ्रमण को दक्षिणायन कहते है । दक्षिणायन सूर्य के समय सूर्य मे बल अर्थात तेज नही होता। इस वजह से छः माह के इस काल को मुर्हूत, आदि शुभ तथा मांगलिक कार्यो के लिए अच्छा नही माना जाता । दक्षिणायन काल में सूर्य दक्षिण दिशा की ओर झुकाव के साथ गति करने लगता है। मान्यता है कि दक्षिणायन का काल देवताओं की रात्रि है। दक्षिणायन में रातें लंबी हो जाती है। दक्षिणायन व्रत और उपवासों का समय होता है। इस दिन कई शुभ और मांगलिक कार्य का करना निषेध होता है। सूर्य का दक्षिणायन होना कामनाओं और भोग की वृद्धि को दर्शाता है इसलिए इस समय में किए गए कार्य जैसे पूजा, व्रत आदि से दुख और रोग दूर होते हैं। *2. सूर्य का उत्तरायण* "14 जनवरी मकर संक्रान्ति" से लेकर "मिथुन संक्रान्ति- यानि मध्य जुलाई", तक के काल को सूर्य का उतरायण काल माना जाता है । जिसे शुभ काल कहते है । सूर्य के इस उत्तरायण काल को शुभ तथा मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। मत्स्य पुराण और स्कंद पुराण में उत्तरायण के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि आध्यात्मिक प्रगति और ईश्वर की पूजा-अर्चना के लिए उत्तरायण काल विशेष फलदायी होता है। इस प्रकार सूर्यदेव की यह संक्रमण क्रिया छह-२ महीने की अवधि की होती है, अर्थात दोनो अयन 6-6 महीने के होते हैं। इस प्रकार मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य छः महीने तक दक्षिणायन मे होने से जो शुभ कार्य प्रतिबन्धित होते है, वह सब कार्य मकर सक्रांति (यानि सूर्य के उतरायण) होने से खुल जाते है, इसी खुशी को मानने का पर्व है मकर सक्रांति । इस दिन सूर्य के उत्तरायण मे होने से दिन बडे तथा राते छोटी होना शुरू हो जाती है । मकरसंक्रान्ति वास्तव मे एक ऋतुपर्व है, इस दिन से भगवान सूर्य के उतरायण होने से देवताओ का ब्रह्ममुहूर्त आरम्भ हो जाता है, अर्थात इन छः महीनो को साधनाओ और परा-अपराविद्याओ की प्राप्ति का भी काल माना जाता है । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी  गृृहनिर्माण, देवप्रतिष्ठा, यज्ञ, आदि समस्त शुभकार्य और मुर्हूत उत्तरायण काल मे ही होने चाहिए । यहां तक की विभिन्न शुभकार्यो के अतिरिक्त मृृत्यु के लिए भी "उत्तरायण काल" को ही शुभ माना गया है, इन महीनो मे मृृत्यु होने से यमलोक अर्थात नरक जाने की संभावना कम रहती है । सूर्य का उत्तरायण प्रवेश जन-जन को प्राणहारी सर्दी की समाप्ति एवं वसन्त का शुभागमन का संदेश होता है । इस शुभ दिन को देश भर के विभिन्न प्रान्तो मे भिन्न-२ नामो से मनाया जाता है, दक्षिण भारत मे इसे पोगल के नाम से मनाया जाता है । मकरसंक्रान्ति की शुभता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हिन्दु धर्म मे काले रंग को अशुभ  माना गया है, क्योकि काले रंग मे तमोगुणी तंरगो को ग्रहण करने की अधिक क्षमता होती है, परन्तु मकरसंक्रान्ति के दिन वातावरण मे रज तथा सत्वतंरगो की अधिकता होती है, इसीलिए मकरसंक्रान्ति के दिन काले रंग के वस्त्रो को उपयोग मे लाने की अनुमति सनातन धर्म ने दी है । शास्त्रो मे उल्लेख है की भगवान विष्णु भी मकर संक्रान्ति तथा माघमास की शुभता एवम् इनके स्नान के विषय मे कहते है की भगवान की भक्ति-पूजा करो या न करो, लेकिन यदि "मकरसंक्रान्ति स्नान" या "माघमास" के स्नान करते हो, तो अनन्त पुण्य फल की प्राप्ति अवश्य ही होती है । सूर्य की सातवीं किरण भारत वर्ष में आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देने वाली है। सातवीं किरण का चमत्कारी प्रभाव भारत वर्ष में गंगा-यमुना के जल मे अधिक समय तक रहता है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण ही हरिद्वार और प्रयाग में माघ मेला अर्थात मकर संक्रांति या पूर्ण कुंभ तथा अर्द्धकुंभ के विशेष उत्सव का आयोजन होता है। ब्रह्मर्षि भृगु जी कहते है, संक्रान्ति एवं माघ के स्नान से सब पाप नष्ट हो जाते है, यह सब व्रतो से बढ़कर है, तथा यह सब प्रकार के दानो का फल प्रदान करने वाला है, जिनके मन मे स्वर्गलोक भोगने की अभिलाषा हो, आयु, आरोग्यता, रुप, सौभाग्य, एवं उत्तम गुणो मे जिनकी रुचि हो वह ,तथा वह व्यक्ति जो दरिद्रता, पाप और दुर्भाग्य रुपी  कीचड़ को धोना चाहते है, उन्हे मकरसंक्रान्ति तथा माघमास के स्नान अवश्य करने चाहिए । *मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व:-* 1. शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, और इस दिन सूर्य मकर राशि मे प्रवेश करते है, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है, ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं, और एक मास मकर राशि मे गोचर करने के उपरांत कुंभ राशि मे प्रवेश करते है। 2. मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा को धरती पर लाने वाले भगीरथ ऋषि ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए इसी दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इसी दिन गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई समुद्र में जाकर मिल गई थी। कपिल मुनि ने अपने आश्रम मे गंगा मां के प्रवेश करते हुए प्रसन्नता से आह्लादित होते हुए, वरदान देते हुए कहा, 'मां गंगे त्रिकाल तक जन-जन का पापहरण करेंगी और भक्तजनों की सात पीढ़ियों को मुक्ति एवं मोक्ष प्रदान करेंगी। गंगा जल का स्पर्श, पान, स्नान और दर्शन सभी पुण्यदायक फल प्रदान करेगा।" 3. मकर संक्रांति का महाभारत में भी वर्णन किया गया है, पुराणों में कहा गया है कि सूर्य के मकर राशि में होने से मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा मोक्ष को प्राप्त करती है, इसकी एक कथा भीष्म पितामह के जीवन से जुड़ी हुई है। भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। महाभारत के युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल भीष्म पितामाह ने गंगा के तट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का छब्बीस दिनों तक इंतजार किया था. इच्छा मृत्यु का वरदान मिलने के कारण वह मोक्ष की प्राप्ति के लिए सूर्य के उत्तरायण होने तक जीवित रहे। 4.मकर संक्रांति के दिन को बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन माना जाता है क्योंकि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। 5. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार यशोदा मैय्या ने इस दिन श्रीकृष्ण के जन्म के लिए यह सक्रांति का व्रत रखा था, तब उसी दिन से मकर संक्रान्ति के व्रत की परिपाटी चली आ रही है। *मकर संक्रांति 2021 के विशेष योग तथा शुभाशुभ फल:-* मकर-संक्रान्ति 14 जनवरी, बृहस्पतिवार को से. प्रात: 8 बजकर 14 मिनट पर मकर लग्न में प्रवेश करेंगी। इस सक्रांति का पुण्यकाल यद्यपि सारा दिन रहेगा परन्तु विशेष रूप से प्रात: सूर्योदय से दोपहर 14:38 बजे तक रहेगा। वार के अनुसार "नन्दा" तथा नक्षत्र के अनुसार "महोदरी" नामक यह सक्रांति ब्राह्मणों, लेखकों तथा शिक्षक वर्ग के लिए लाभप्रद रहेगी। संक्रान्ति के लग्न, मकर लग्न में 'चतुर्ग्रही योग' रहने से विश्व एवं भारत की राजनीति में विशेष उथल-पुथल रहेगी। केन्द्रीय अथवा किसी राज्य के मन्त्रीमण्डल में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होने के संकेत हैं। चूंकि भारत की प्रभाव लग्नराशि पर ही चतुर्गही योग बना रहेगा, इसलिए कुछ राज्यों में छत्रभंग (शासन-परिवर्तन) होने के आसार है । पाकिस्तान आदि विरोधी देशों के साथ युद्ध जैसे हालात तथा ओलावृष्टि प्राकृतिक प्रकोपों से खड़ी अथवा तैयार फसलों विशेषकर ईख व धान्य की फसलों को नुकसान पहुँच सकता है । सूर्य के मकर राशि में आने से मकर संक्रांति के दिन पांच ग्रहों का शुभ संयोग बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध, चंद्रमा और शनि शामिल हैं। किंतु मकर राशि में ही पहले से शनि और बृहस्पति गोचर कर रहे हैं। इन तीनों ग्रहों की तिकड़ी इस वर्ष के पूर्वार्ध में तीव्र राजनीतिक, सामाजिक तथा प्रकृतिक उथल-पुथल मचा सकती है। मकर राशि में सूर्य के आने पर यानि सूर्य के उतरायण होने पर सभी शुभ मुहूर्त शादी-विवाह, गृह प्रवेश आदि आरंभ हो जाते हैं किंतु इस बार ऐसा नहीं होगा क्योंकि 17 जनवरी से गुरु अस्त हो जाएंगे। गुरु अस्त में विवाह कार्य, घर और गृहस्थी के कार्य करना अशुभ माना गया है। इसलिए इस बार विवाह मुहूर्त नहीं है। *मकरसंक्रान्ति पर किए जाने वाले शुभ कार्य तथा दान कर्म:-* इस संक्रांति में दान का बड़ा महत्व बताया है। कहते हैं इस संक्रांति में किया गया स्नान-दान इत्यादि शुभ कर्म लोक-परलोक दोनों में ही सुख और समृद्धि प्रदान करता है। 1. मकरसंक्रान्ति के शुभ दिन प्रातःकाल से लेकर सूर्यास्त तक देश के किसी भी पवित्र तीर्थ स्थान, संगमस्थल, नदी, कुंओ, बावडी, सरोवर इत्यादि मे स्नान करे। गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा व कावेरी इन तीन नदियो मे, तथा गंगासागर जैसे तीर्थों मे स्नान करने से अधिक पुण्य मिलता है । जो लोग व्यस्तताओ के कारण इन स्थानो पर न जा पाये वह प्रातःकाल स्नान के जल मे गंगाजल मिलाकर स्नान करे, संभव हो तो नहाने के जल की बाल्टी लेकर बाहर खुले मे स्नान करे, क्योकि इस दिन वातावरण मे शुभ सत्च तंरगे अघिक होती है । 2. स्नान करने के उपरांत एक तांबे के लोटे मे जल भरकर उसमे थोडा गुड, लाल चंदन, रोली, चावल, तथा लाल फूल डालकर मंत्र बोलते हुए सूर्यदेव को अर्ध्य दे । 3.शिव मंदिर मे जलाभिषेक करके तिल के तेल से ज्योत जलाये । 4. श्रीविष्णु पूजन, सूर्यजप, सूर्याष्टकम, पुरुषसूक्त तथा स्तोत्र पाठ करे । 5. काले तिलो से पितृृश्राद्ध अर्थात तिलांजलि दे । विधिवत पितृरो के उद्धार के लिए इस दिन पिंडदान करना अत्यंत पुण्यदायी है । 6. विद्धान को अन्नदान, घृत यानि धी दान, वस्त्रदान, रजाई-कम्बल, फल, तथा तिल और गुड से बने लड्डू-रेवडी इत्यादि दान करने से अनन्त पुण्य की प्राप्ति होती है । 7. जो व्यक्ति अपने ऊपर से ग्रहो का,या मारकेष का बुरा प्रभाव हटाना चाहे वह इस दिन तुलादान अवश्य करे । 8. मकर सक्रांति के दिन उडद की दाल, चावल, देसी धी, तथा नमक का दान धर्म स्थान पर करे । 9. इस दिन उडद की दाल की खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाकर अधिक से अधिक मात्रा मे बांटने से अत्यधिक पुण्य प्राप्ति होती है । *(समाप्त)* _________________________ *आगामी लेख:-* *1. 14 जन० को मकरसंक्रांति पर सम्पूर्ण लेख ।* *2. 15 जन० को संकट दूर करने के सरल उपाय।* *3. 16 जन० सम्पति तथा धन प्राप्ति के सरल उपाय* *4. 17 जन०विभिन्न रिश्ते सुधारने हेतु सरल उपाय* _________________________ ☀️ *जय श्री राम* *आज का पंचांग 🌹🌹🌹* *वृहस्पतिवार,14.1.2021* *श्री संवत 2077* *शक संवत् 1942* *सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-दक्षिण गोल* *ऋतुः- शिशिर ऋतुः ।* *मास- पौष मास।* *पक्ष- शुक्ल पक्ष ।* *तिथि- प्रतिपदा तिथि 9:02 am तक* *चंद्रराशि- चंद्र मकर राशि मे ।* *नक्षत्र- श्रवण नक्षत्र अगले दिन 5:04 am तक* *योग- वज्र योग अगले दिन 10:04 pm तक (अशुभ है)* *करण- बव करण 9:03 am तक* *सूर्योदय 7:15 am, सूर्यास्त 5:45 pm* *शुभ मुहूर्त:-* *अभिजित् नक्षत्र- 12:09 pm से 12:51 pm* *अशुभ मुहूर्त:-* *राहुकाल - 1:48 pm से 3:07 pm तक, (शुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )* *दिशाशूल- दक्षिण दिशा ।* *जनवरी शुभ दिन:-* 14, 17 (सवेरे 8 उपरांत), 18, 19, 20 (दोपहर 1 तक), 21, 22 (सायंकाल 7 तक), 24 (सवेरे 10 तक), 25, 26, 27, 28 (दोपहर 1 उपरांत), 29, 30, 31 (सवेरे 9 तक) *जनवरी अशुभ दिन:-* 15, 16, 23 ______________________ *विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है* *आगामी व्रत तथा त्यौहार:-* 14 जन०- मकर संक्रांति, पोंगल । 15 जन०- माघ बिहू । 16 जन०- विनायक चतुर्थी । 20 जन०- गुरू गोविंद सिंह जयंती । 24 जन०- पौष पुत्रदा एकादशी । 26 जन०- भौम प्रदोष व्रत । 28 जन०- पौष पूर्णिमा ।31 जन०- संकष्टी चतुर्थी । आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐 *आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )* *9810449333, 7982803848*

☀️


*सम्पूर्ण लेख:- मकरसक्रांन्ति,(14 जनवरी 2021)*

*सूर्य का मकर राशि प्रवेश- 14 जनवरी 8:14 am* *सक्रांति पुण्यकाल:- 14 जन०, 7:15 am से लेकर  सारा दिन विशेषतः 2:38 pm तक)*

मकरसक्रांन्ति भारत के वैदिककालीन पर्वो मे से एक पर्व है, जोकि हर वर्ष प्रायः 14 जनवरी को आता है । वर्ष 2021 मे, 14 जनवरी प्रातः 8:14 am पर सूर्य राशि परिवर्तन करके मकर राशि मे प्रवेश कर रहे हैं, अतः मकरसंक्रांति का पुण्यकाल प्रातः सूर्योदय 7:15 am से प्रांरभ होकर दोपहर 2:38 pm तक अधिक प्रभावी रहेगा । परंतु इस समय के भीतर यदि स्नान-दान इत्यादि पुण्य कर्म न भी कर पाये तो भी पूरे दिनभर संक्रांति का स्नान-दान इत्यादि किया जा सकता है।

*क्या होती है सक्रांति :-*
 सूर्य साल के बारह महीनो मे प्रत्येक माह एक एक राशि मे भ्रमण करते है, और प्रत्येक अंग्रेज़ी माह के मध्य 15 तारीख़ के लगभग एक राशि से दूसरी राशि मे सूर्य के प्रवेश करने के समय को ही सक्रांति कहते है । 

*क्यो शुभ होती है मकर सक्रांति:-*
 मघ्य दिसम्बर से 13 जनवरी तक सूर्य धनु राशि मे होते है, धनु राशि मे सूर्य के होने से "पौष का महीना" अर्थात "मलमास" होता है, जिसमे सभी तरह के ब्याह-शादी आदि समस्त शुभ कार्य वर्जित होते है, और जब सूर्य इसी धनु राशि से निकल कर मकर राशि मे प्रवेश करते है तो "उतरायण अर्थात शुभ मांगलिक" कार्यो की शुरुआत का समय आंरभ हो जाता है । छह माह के काल "उतरायण" आंरभ होने के दिन को ही मकरसंक्रान्ति पर्व के रुप मे मनाया जाता है ।

दरअसल सूर्य वर्ष के बारह महीनो मे प्रत्येक माह अलग-2, बारह राशियो मे भ्रमण करते है:-

*1. सूर्य का दक्षिणायन*
मध्य जुलाई से लेकर 13 जनवरी तक के इस समय यानि ( सूर्य के कर्कराशि से धनु राशि तक के भ्रमण  के समय) भ्रमण को दक्षिणायन कहते है ।
 
दक्षिणायन सूर्य के समय सूर्य मे बल अर्थात तेज नही होता। इस वजह से छः माह के इस काल को मुर्हूत, आदि शुभ तथा मांगलिक कार्यो के लिए अच्छा नही माना जाता ।

दक्षिणायन काल में सूर्य दक्षिण दिशा की ओर झुकाव के साथ गति करने लगता है। मान्यता है कि दक्षिणायन का काल देवताओं की रात्रि है।
दक्षिणायन में रातें लंबी हो जाती है। 

दक्षिणायन व्रत और उपवासों का समय होता है। इस दिन कई शुभ और मांगलिक कार्य का करना निषेध होता है। सूर्य का दक्षिणायन होना कामनाओं और भोग की वृद्धि को दर्शाता है इसलिए इस समय में किए गए कार्य जैसे पूजा, व्रत आदि से दुख और रोग दूर होते हैं।


*2. सूर्य का उत्तरायण*
"14 जनवरी मकर संक्रान्ति" से लेकर  "मिथुन संक्रान्ति- यानि मध्य जुलाई", तक के काल को सूर्य का उतरायण काल माना जाता है । जिसे शुभ काल कहते है । सूर्य के इस उत्तरायण काल को शुभ तथा मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है ।

शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है।

मत्स्य पुराण और स्कंद पुराण में उत्तरायण के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि आध्यात्मिक प्रगति और ईश्वर की पूजा-अर्चना के लिए उत्तरायण काल विशेष फलदायी होता है।

 इस प्रकार सूर्यदेव की यह संक्रमण क्रिया छह-२  महीने की अवधि की होती है, अर्थात दोनो अयन 6-6 महीने के होते हैं।

इस प्रकार मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य छः महीने तक दक्षिणायन मे होने से जो शुभ कार्य प्रतिबन्धित होते है, वह सब कार्य मकर सक्रांति (यानि सूर्य के उतरायण) होने से खुल जाते है, इसी खुशी को मानने का पर्व है मकर सक्रांति । 

इस दिन सूर्य के उत्तरायण मे होने से दिन बडे तथा राते छोटी होना शुरू हो जाती है ।

 मकरसंक्रान्ति वास्तव मे एक ऋतुपर्व है, इस दिन से भगवान सूर्य के उतरायण होने से देवताओ का ब्रह्ममुहूर्त आरम्भ हो जाता है, अर्थात इन छः महीनो को साधनाओ और परा-अपराविद्याओ की प्राप्ति का भी काल माना जाता है ।

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी  गृृहनिर्माण, देवप्रतिष्ठा, यज्ञ, आदि समस्त शुभकार्य और मुर्हूत उत्तरायण काल मे ही होने चाहिए । यहां तक की विभिन्न शुभकार्यो के अतिरिक्त मृृत्यु के लिए भी "उत्तरायण काल" को ही शुभ माना गया है, इन महीनो मे मृृत्यु होने से यमलोक अर्थात नरक जाने की संभावना कम रहती है ।

सूर्य का उत्तरायण प्रवेश जन-जन को प्राणहारी सर्दी की समाप्ति एवं वसन्त का शुभागमन का संदेश होता है । इस शुभ दिन को देश भर के विभिन्न प्रान्तो मे भिन्न-२ नामो से मनाया जाता है, दक्षिण भारत मे इसे पोगल के नाम से मनाया जाता है । 

मकरसंक्रान्ति की शुभता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हिन्दु धर्म मे काले रंग को अशुभ  माना गया है, क्योकि काले रंग मे तमोगुणी तंरगो को ग्रहण करने की अधिक क्षमता होती है, परन्तु मकरसंक्रान्ति के दिन वातावरण मे रज तथा सत्वतंरगो की अधिकता होती है, इसीलिए मकरसंक्रान्ति के दिन काले रंग के वस्त्रो को उपयोग मे लाने की अनुमति सनातन धर्म ने दी है ।

 शास्त्रो मे उल्लेख है की भगवान विष्णु भी मकर संक्रान्ति तथा माघमास की शुभता एवम् इनके स्नान के विषय मे कहते है की भगवान की भक्ति-पूजा करो या न करो, लेकिन यदि "मकरसंक्रान्ति स्नान" या "माघमास" के स्नान करते हो, तो अनन्त पुण्य फल की प्राप्ति अवश्य ही होती है ।

 सूर्य की सातवीं किरण भारत वर्ष में आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देने वाली है। सातवीं किरण का चमत्कारी प्रभाव भारत वर्ष में गंगा-यमुना के जल मे अधिक समय तक रहता है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण ही हरिद्वार और प्रयाग में माघ मेला अर्थात मकर संक्रांति या पूर्ण कुंभ तथा अर्द्धकुंभ के विशेष उत्सव का आयोजन होता है।

ब्रह्मर्षि भृगु जी कहते है, संक्रान्ति एवं माघ के स्नान से सब पाप नष्ट हो जाते है, यह सब व्रतो से बढ़कर है, तथा यह सब प्रकार के दानो का फल प्रदान करने वाला है, जिनके मन मे स्वर्गलोक भोगने की अभिलाषा हो, आयु, आरोग्यता, रुप, सौभाग्य, एवं उत्तम गुणो मे जिनकी रुचि हो वह ,तथा वह व्यक्ति जो दरिद्रता, पाप और दुर्भाग्य रुपी  कीचड़ को धोना चाहते है, उन्हे मकरसंक्रान्ति तथा माघमास के स्नान अवश्य करने चाहिए ।


*मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व:-*

1. शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, और इस दिन सूर्य मकर राशि मे प्रवेश करते है, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है, ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं, और एक मास मकर राशि मे गोचर करने के उपरांत कुंभ राशि मे प्रवेश करते है। 

2. मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा को धरती पर लाने वाले भगीरथ ऋषि ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए इसी दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इसी दिन गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई समुद्र में जाकर मिल गई थी।

 कपिल मुनि ने अपने आश्रम मे गंगा मां के प्रवेश करते हुए प्रसन्नता से आह्लादित होते हुए, वरदान देते हुए कहा, 'मां गंगे त्रिकाल तक जन-जन का पापहरण करेंगी और भक्तजनों की सात पीढ़ियों को मुक्ति एवं मोक्ष प्रदान करेंगी। गंगा जल का स्पर्श, पान, स्नान और दर्शन सभी पुण्यदायक फल प्रदान करेगा।" 

3. मकर संक्रांति का महाभारत में भी वर्णन किया गया है, पुराणों में कहा गया है कि सूर्य के मकर राशि में होने से मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा मोक्ष को प्राप्त करती है,
इसकी एक कथा भीष्म पितामह के जीवन से जुड़ी हुई है। भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। महाभारत के युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल भीष्म पितामाह ने गंगा के तट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का छब्बीस दिनों तक इंतजार किया था. इच्छा मृत्यु का वरदान मिलने के कारण वह मोक्ष की प्राप्ति के लिए सूर्य के उत्तरायण होने तक जीवित रहे।

4.मकर संक्रांति के दिन को बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन माना जाता है क्योंकि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था।

5. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार यशोदा मैय्या ने इस दिन श्रीकृष्ण के जन्म के लिए यह सक्रांति का व्रत रखा था, तब उसी दिन से मकर संक्रान्ति के व्रत की परिपाटी चली आ रही है।


*मकर संक्रांति 2021 के विशेष योग तथा शुभाशुभ फल:-*
मकर-संक्रान्ति 14 जनवरी, बृहस्पतिवार को से. प्रात: 8 बजकर 14 मिनट पर मकर लग्न में प्रवेश करेंगी। इस सक्रांति  का पुण्यकाल यद्यपि सारा दिन रहेगा परन्तु विशेष रूप से प्रात: सूर्योदय से दोपहर 14:38 बजे तक रहेगा। वार के अनुसार "नन्दा" तथा नक्षत्र के अनुसार "महोदरी" नामक यह सक्रांति ब्राह्मणों, लेखकों तथा शिक्षक वर्ग के लिए लाभप्रद रहेगी।

संक्रान्ति के लग्न, मकर लग्न में 'चतुर्ग्रही योग' रहने से विश्व एवं भारत की राजनीति में विशेष उथल-पुथल रहेगी। केन्द्रीय अथवा किसी राज्य के मन्त्रीमण्डल में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होने के संकेत हैं। चूंकि भारत की प्रभाव लग्नराशि पर ही चतुर्गही योग बना रहेगा, इसलिए कुछ राज्यों में छत्रभंग (शासन-परिवर्तन) होने के आसार है ।

पाकिस्तान आदि विरोधी देशों के साथ युद्ध जैसे हालात तथा ओलावृष्टि प्राकृतिक प्रकोपों से खड़ी अथवा तैयार फसलों विशेषकर ईख व धान्य की फसलों को नुकसान पहुँच सकता है ।

सूर्य के मकर राशि में आने से मकर संक्रांति के दिन पांच ग्रहों का शुभ संयोग बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध, चंद्रमा और शनि शामिल हैं। किंतु मकर राशि में ही पहले से शनि और बृहस्पति गोचर कर रहे हैं। इन तीनों ग्रहों की तिकड़ी इस वर्ष के पूर्वार्ध में तीव्र  राजनीतिक, सामाजिक तथा प्रकृतिक उथल-पुथल मचा सकती है। 

मकर राशि में सूर्य के आने पर यानि सूर्य के उतरायण होने पर सभी शुभ मुहूर्त शादी-विवाह, गृह प्रवेश आदि आरंभ हो जाते हैं किंतु इस बार ऐसा नहीं होगा क्योंकि 17 जनवरी से गुरु अस्त हो जाएंगे। गुरु अस्त में विवाह कार्य, घर और गृहस्थी के कार्य करना अशुभ माना गया है। इसलिए इस बार विवाह मुहूर्त नहीं है। 


*मकरसंक्रान्ति पर किए जाने वाले शुभ कार्य तथा दान कर्म:-*

इस संक्रांति में दान का बड़ा महत्व बताया है। कहते हैं इस संक्रांति में किया गया स्नान-दान इत्यादि शुभ कर्म लोक-परलोक दोनों में ही सुख और समृद्धि प्रदान करता है। 

1. मकरसंक्रान्ति के शुभ दिन प्रातःकाल से लेकर सूर्यास्त तक देश के किसी भी पवित्र तीर्थ स्थान, संगमस्थल, नदी, कुंओ, बावडी, सरोवर इत्यादि मे स्नान करे। गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा व कावेरी इन तीन नदियो मे, तथा गंगासागर जैसे तीर्थों मे स्नान करने से अधिक पुण्य मिलता है । 

जो लोग व्यस्तताओ के कारण इन स्थानो पर न जा पाये वह प्रातःकाल स्नान के जल मे गंगाजल मिलाकर स्नान करे, संभव हो तो नहाने के जल की बाल्टी लेकर बाहर खुले मे स्नान करे, क्योकि इस दिन वातावरण मे शुभ सत्च तंरगे अघिक होती है ।

2. स्नान करने के उपरांत एक तांबे के लोटे मे जल भरकर उसमे थोडा गुड, लाल चंदन, रोली, चावल, तथा लाल फूल डालकर मंत्र बोलते हुए सूर्यदेव को अर्ध्य दे ।

3.शिव मंदिर मे जलाभिषेक करके तिल के तेल से ज्योत जलाये ।  

4. श्रीविष्णु पूजन, सूर्यजप, सूर्याष्टकम,  पुरुषसूक्त तथा स्तोत्र पाठ करे ।

5. काले तिलो से पितृृश्राद्ध अर्थात तिलांजलि दे । विधिवत पितृरो के उद्धार के लिए इस दिन पिंडदान करना अत्यंत पुण्यदायी है ।

6. विद्धान को अन्नदान, घृत यानि धी दान, वस्त्रदान, रजाई-कम्बल, फल, तथा तिल और गुड से बने लड्डू-रेवडी इत्यादि दान करने से अनन्त पुण्य की प्राप्ति होती है ।

7. जो व्यक्ति अपने ऊपर से ग्रहो का,या मारकेष का बुरा प्रभाव हटाना चाहे वह इस दिन तुलादान अवश्य करे ।

8. मकर सक्रांति के दिन उडद की दाल, चावल, देसी धी, तथा नमक का दान धर्म स्थान पर करे ।

9. इस दिन उडद की दाल की खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाकर अधिक से अधिक मात्रा मे बांटने से अत्यधिक पुण्य प्राप्ति होती है ।

*(समाप्त)*
_________________________

*आगामी लेख:-*
*1. 14 जन० को मकरसंक्रांति पर सम्पूर्ण लेख ।*
*2. 15 जन० को संकट दूर करने के सरल उपाय।*
*3. 16 जन० सम्पति तथा धन प्राप्ति के सरल उपाय*
*4. 17 जन०विभिन्न रिश्ते सुधारने हेतु सरल उपाय*
_________________________
☀️

*जय श्री राम*
*आज का पंचांग 🌹🌹🌹*
*वृहस्पतिवार,14.1.2021*
*श्री संवत 2077*
*शक संवत् 1942*
*सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-दक्षिण गोल*
*ऋतुः- शिशिर ऋतुः ।*
*मास- पौष मास।*
*पक्ष- शुक्ल पक्ष ।*
*तिथि- प्रतिपदा तिथि 9:02 am तक*
*चंद्रराशि- चंद्र मकर राशि मे ।*
*नक्षत्र- श्रवण नक्षत्र अगले दिन 5:04 am तक*
*योग- वज्र योग अगले दिन 10:04 pm तक (अशुभ है)*
*करण- बव करण 9:03 am तक* 
*सूर्योदय 7:15 am, सूर्यास्त 5:45 pm*
*शुभ मुहूर्त:-*
*अभिजित् नक्षत्र- 12:09 pm से 12:51 pm*
*अशुभ मुहूर्त:-*
*राहुकाल - 1:48 pm से 3:07 pm तक, (शुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )*
*दिशाशूल- दक्षिण दिशा ।*

*जनवरी शुभ दिन:-* 14, 17 (सवेरे 8 उपरांत), 18, 19, 20 (दोपहर 1 तक), 21, 22 (सायंकाल 7 तक), 24 (सवेरे 10 तक), 25, 26, 27, 28 (दोपहर 1 उपरांत), 29, 30, 31 (सवेरे 9 तक)

*जनवरी अशुभ दिन:-* 15, 16, 23  
______________________

*विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है*

*आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*  14 जन०- मकर संक्रांति, पोंगल । 15 जन०- माघ बिहू । 16 जन०- विनायक चतुर्थी । 20 जन०- गुरू गोविंद सिंह जयंती । 24 जन०- पौष पुत्रदा एकादशी । 26 जन०- भौम प्रदोष व्रत । 28 जन०- पौष पूर्णिमा ।31 जन०- संकष्टी चतुर्थी ।

आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐
*आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )*
*9810449333, 7982803848*

+17 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 182 शेयर

कामेंट्स

आशुतोष Jan 13, 2021
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे । हे नाथ नारायण वासुदेवाय ।। मकर संक्रांति के पावन पर्व की मंगलकामनाएं... ।। सुप्रभात ।।

M.S.Chauhan Jan 14, 2021
शुभ प्रभात वंदन* *जय लक्ष्मीनारायण* *शुभ मकर संक्रान्ति* *अच्छी भूमिका,अच्छे लक्ष्य* *और* *अच्छे विचारों वाले लोगों को,* *हमेशा याद किया जाता है* *मन में भी, शब्दों में भी* *और....* *जीवन में भी।* 🌹🙏🏼🌹

Govind Singh Chauhan Jan 14, 2021
आपको एवं आपके परिवार को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः सुप्रभात आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो 🙏🙏

Acharya Rajesh Jan 25, 2021

☀️ *संक्षिप्त लेख:-मानसिक कष्ट निवारण हेतु उपाय:-* किसी भी तरह की मानसिक परेशानी या तनाव अत्यधिक बढ गया हो, जिसकी वजह से मन में बहुत ही नकारात्मक विचार आ रहे हो तथा मन जीवन से ही विरक्त हो गया हो तो निम्नलिखित उपाय करने से संकटो से निवारण मिलता है तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है 1. प्रतिदिन शिव पूजन तथा जलाभिषेक के उपरांत शिव चालीसा तथा चंद्र कवच का पाठ करना चाहिये। 2. शनिवार को शनिदेव पर सरसों का तेल चढ़ा कर अपनी पहनी हुई चप्पल किसी भी गरीब को दान कर दे, अथवा तारकोल से सङक बना रहे मजदूरों को चमडे के काले रंग के जूतों का दान करे । 3. किसी भी धर्म स्थान पर जाकर श्रमदान अर्थात सेवा-कार्य करे, ऐसा करने से बहुत जल्द समस्त कष्टों से छुटकारा पाकर मानसिक रूप से सुकून प्राप्त होता है । 4. मार्ग मे, अस्पताल, श्मशान भूमि अथवा किसी भी धर्म स्थान पर प्याऊ लगवाने से बुरा समय समाप्त होता है, तथा मानसिक रूप से सुदृढता प्राप्त होती है *(समाप्त)* _________________________ *आगामी लेख:-* *1. शीघ्र ही गुरूपुष्यामृत योग पर लेख ।* *2. शीघ्र ही पौष पूर्णिमा पर लेख ।* *3. शीघ्र ही माघ मास पर लेख ।* *4. शीघ्र ही नवग्रहो की कृपा प्राप्ति हेतु उपाय पर धारावाहिक लेख ।* _________________________ ☀️ *जय श्री राम* *आज का पंचांग 🌹🌹🌹* *मंगलवार ,26.1.2021* *श्री संवत 2077* *शक संवत् 1942* *सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-दक्षिण गोल* *ऋतुः- शिशिर ऋतुः ।* *मास- पौष मास।* *पक्ष- शुक्ल पक्ष ।* *तिथि- त्रयोदशी तिथि अर्धरात्रि 1:12 am तक* *चंद्रराशि- चंद्र मिथुन राशि मे ।* *नक्षत्र- आर्द्रा नक्षत्र अर्धरात्रि 3:11 am तक* *योग- वैधृति योग 9:56 pm तक (अशुभ है)* *करण- कौलव करण 12:54 pm तक* *सूर्योदय 7:12 am, सूर्यास्त 5:55 pm* *अभिजित् नक्षत्र- 12:12 pm से 12:55 pm* *राहुकाल - 3:14 pm से 4:34 pm तक, (शुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )* *दिशाशूल-पूर्व दिशा ।* *जनवरी शुभ दिन:-*  26, 27, 28 (दोपहर 1 उपरांत), 29, 30, 31 (सवेरे 9 तक) *यमघण्टक योग :- 26 जन० 7:12 am से 27 जन० 3:12 am तक* यह एक अशुभ योग हैं, यह कष्टदायक योग है, इसमे विशेष रूप से शुभ कार्य के लिए की जाने वाली यात्रा तथा बच्चो के शुभ कार्य न करे । परंतु इस कुयोग के साथ ही यदि कोई सर्वार्थ सिद्ध योग जैसा शुभ योग भी हो तो इस योग का दुष्प्रभाव जाता रहता है । ______________________ *विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है* *आगामी व्रत तथा त्यौहार:-* 26 जन०- भौम प्रदोष व्रत । 28 जन०- पौष पूर्णिमा ।31 जन०- संकष्टी चतुर्थी । आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐 *आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )* *9810449333, 7982803848*

+8 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 31 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Acharya Rajesh Jan 24, 2021

☀️ *सप्तश्लोकी दुर्गा:-* "सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र" माता को सर्वाधिक प्रिय स्तोत्र है । इस पवित्र स्तोत्र मे सात अलग-अलग महामंत्रो का समावेश है, सभी सातो मंत्र भक्त का अलग-अलग प्रकार से कल्याण करते है, जैसे कोई मंत्र रोगों का नाश करता है, कोई दरिद्रता मिटाता है, तो कोई मंत्र सब प्रकार से मंगल करता है, इत्यादि-इत्यादि । इस स्तोत्र को कोई भी स्त्री अथवा पुरूष प्रतिदिन ग्यारह बार, सात बार या एक बार मानसिक विनियोग करके मानसिक जप करते रहने से किसी भी प्रकार के दुख तथा कष्टों से छुटकारा मिलता है और जीवन मे सदैव सुख और सौभाग्य बना रहता है नवरात्री मे प्रतिदिन इस स्तोत्र का 108 बार पाठ करना चाहिए । (ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमहामन्त्रस्य नारायण ऋषिः । अनुष्टुपादीनि छन्दांसि । श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः । श्री जगदम्बाप्रीत्यर्थ पाठे विनियोगः ॥) ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा । बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥१॥ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्रयदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता ॥२॥ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥३॥ शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥४॥ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते ॥५॥ रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥६॥ सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम् ॥७॥ श्री सप्तश्लोकी दुर्गा स्त्रोत्रं संपूर्णम् । *विधि:-* पूजाकक्ष में या मंदिर मे मां दुर्गा का पौराणिक चित्र लगाकर, उनके सम्मुख बैठकर । देसी धी की ज्योति जलाकर । नैवेद्य अर्पित कर । उपरोक्त मंत्र का भक्तिपूर्वक, शुद्ध लाल चंदन की माला से, अपने सामर्थ्यनुसार  9 माला / 3 माला या 1 माला का प्रतिदिन जाप करे और मां से कृपा की कामना करे । *(समाप्त)* _________________________ *आगामी लेख:-* *1. शीघ्र ही गुरूपुष्यामृत योग पर लेख ।* *2. शीघ्र ही माघ पूर्णिमा पर लेख ।* *3. शीघ्र ही माघ मास पर लेख ।* *4. शीघ्र ही नवग्रहो की कृपा प्राप्ति हेतु उपाय पर धारावाहिक लेख ।* _________________________ ☀️ *जय श्री राम* *आज का पंचांग 🌹🌹🌹* *सोमवार ,25.1.2021* *श्री संवत 2077* *शक संवत् 1942* *सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-दक्षिण गोल* *ऋतुः- शिशिर ऋतुः ।* *मास- पौष मास।* *पक्ष- शुक्ल पक्ष ।* *तिथि- द्वादशी तिथि अर्धरात्रि 00:26 am तक* *चंद्रराशि- चंद्र वृष राशि मे 1:02 pm तक तदोपरान्त मिथुन राशि ।* *नक्षत्र- मृगशिरा नक्षत्र अर्धरात्रि 1:55 am तक* *योग- ऐन्द्रे योग 10:27 pm तक (अशुभ है)* *करण- बव करण 11:47 am तक* *सूर्योदय 7:12 am, सूर्यास्त 5:54 pm* *अभिजित् नक्षत्र- 12:12 pm से 12:54 pm* *राहुकाल - 8:33 am से 9:53 pm तक, (शुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )* *दिशाशूल-पूर्व दिशा ।* *जनवरी शुभ दिन:-* 25, 26, 27, 28 (दोपहर 1 उपरांत), 29, 30, 31 (सवेरे 9 तक) *सर्वार्थ सिद्ध योग :- 25 जन० 7:12 am to 25/26 जन० अर्धरात्रि 1:56 am तक*, ( शुभ  समय , इस योग मे किए गये काम, परीक्षा देना, नौकरी ज्वाइन करना, चुनाव के लिए आवेदन, भूमि, वाहन, वस्त्र आभूषण इत्यादि को खरीदना बेचना  अथवा  मुहूर्त शुभ परिणाम देते है । *अमृत सिद्धि योग :- 25 जन० 7:12 am से लेकर 25/26 जन० अर्धरात्रि 1:56 am तक*, इस योग मे  सर्वाथ सिद्ध योगवाले कामो के अलावा प्रेमविवाह, विदेशयात्रा तथा सकाम अनुष्ठान करना शुभ होता है । ______________________ *विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है* *आगामी व्रत तथा त्यौहार:-* 26 जन०- भौम प्रदोष व्रत । 28 जन०- पौष पूर्णिमा ।31 जन०- संकष्टी चतुर्थी । आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐 *आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )* *9810449333, 7982803848*

+14 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 33 शेयर
sn vyas Jan 25, 2021

*🌸🍀शुभ सन्ध्या🍀🌸* *आइये देखते हैं कितना सुन्दर* *हिन्दी वर्णमाला का क्रम से कवितामय प्रयोग* *अ* चानक *आ* कर मुझसे *इ* ठलाता हुआ पंछी बोला *ई* श्वर ने मानव को तो *उ* त्तम ज्ञान-दान से तौला *ऊ* पर हो तुम सब जीवों में *ऋ* ष्य तुल्य अनमोल *ए* क अकेली जात अनोखी *ऐ* सी क्या मजबूरी तुमको *ओ* ट रहे होंठों की शोख़ी *औ* र सताकर कमज़ोरों को *अं* ग तुम्हारा खिल जाता है *अ:* तुम्हें क्या मिल जाता है.? *क* हा मैंने- कि कहो *ख* ग आज सम्पूर्ण *ग* र्व से कि- हर अभाव में भी *घ* र तुम्हारा बड़े मजे से *च* ल रहा है *छो* टी सी- टहनी के सिरे की *ज* गह में, बिना किसी *झ* गड़े के, ना ही किसी *ट* कराव के पूरा कुनबा पल रहा है *ठौ* र यहीं है उसमें *डा* ली-डाली, पत्ते-पत्ते *ढ* लता सूरज *त* रावट देता है *थ* कावट सारी, पूरे *दि* वस की-तारों की लड़ियों से *ध* न-धान्य की लिखावट लेता है *ना* दान-नियति से अनजान अरे *प्र* गतिशील मानव *फ़* रेब के पुतलो *ब* न बैठे हो समर्थ *भ* ला याद कहाँ तुम्हें *म* नुष्यता का अर्थ.? *य* ह जो थी, प्रभु की *र* चना अनुपम... *ला* लच-लोभ के *व* शीभूत होकर *श* र्म-धर्म सब तजकर *ष* ड्यंत्रों के खेतों में *स* दा पाप-बीजों को बोकर *हो* कर स्वयं से दूर *क्ष* णभंगुर सुख में अटक चुके हो *त्रा* स को आमंत्रित करते *ज्ञा* न-पथ से भटक चुके हो।🔥🔥🔥❤️🔥🔥🔥 *🌹🙏जय श्री कृष्ण🙏🌹*

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
God Life Jan 24, 2021

जीने की राह #पुस्तक घर-घर में रखने योग्य है। इसके पढ़ने तथा अमल करने से लोक तथा परलोक दोनों में सुखी रहोगे। पापों से बचोगे, घर की कलह समाप्त हो जाएगी। बहू-बेटे अपने माता-पिता की विशेष सेवा किया करेंगे। घर में परमात्मा का निवास होगा। भूत-प्रेत, पित्तर-भैरव-बेताल जैसी आत्माऐं उस परिवार के आसपास नहीं आएंगी। देवता उस भक्त परिवार की सुरक्षा करते हैं। अकाल मृत्यु उस भक्त की नहीं होगी जो इस पुस्तक को पढ़कर दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर साधना करेगा। इस पुस्तक को पढ़ने से उजड़े परिवार बस जाऐंगे। जिस परिवार में यह पुस्तक रहेगी, इसको पढ़ेंगे। जिस कारण से नशा अपने आप छूट जाएगा क्योंकि इसमें ऐसे प्रमाण हैं जो आत्मा को छू जाते हैं। शराब, तम्बाकू तथा अन्य नशे के प्रति ऐसी घृणा हो जाएगी कि इनका नाम लेने से रूह काँप जाया करेगी। पूरा परिवार #सुख का जीवन जीएगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारी वेबसाइट https://www.jagatgururampalji.org

+7 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB