मायमंदिर फ़्री कुंडली
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dinesh chouhan
dinesh chouhan May 20, 2019

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Rudera Rudera Jun 19, 2019

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Dharmendra Jun 19, 2019

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RPAGARWAL Jun 18, 2019

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Vaibhav Singh Jun 17, 2019

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार | बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि | बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौ पवन कुमार | बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार || ।।चौपाई।। जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर | रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा ||2|| महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी | कंचन बरन बिराज सुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचित केसा ||4| हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे कान्धे मूंज जनेऊ साजे | शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन ||6| विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर | प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया ||8|| सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा | भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज सवारे ||10|| लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये | रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई ||12|| सहस बदन तुम्हरो जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें | सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा ||14|| जम कुबेर दिगपाल कहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते | तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा ||16|| तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना लंकेश्वर भये सब जग जाना | जुग सहस्र जोजन पर भानु लील्यो ताहि मधुर फल जानु ||18| प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं | दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||20|| राम दुवारे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे | सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहें को डरना ||22|| आपन तेज सम्हारो आपे तीनों लोक हाँक ते काँपे | भूत पिशाच निकट नहीं आवें महाबीर जब नाम सुनावें ||24|| नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा | संकट ते हनुमान छुड़ावें मन क्रम बचन ध्यान जो लावें ||26|| सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा | और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे ||28|| चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा | साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे ||30|| अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा ||32|| तुम्हरे भजन राम को पावें जनम जनम के दुख बिसरावें | अन्त काल रघुबर पुर जाई जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ||34|| और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई | संकट कटे मिटे सब पीरा जपत निरन्तर हनुमत बलबीरा ||36|| जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करो गुरुदेव की नाईं | जो सत बार पाठ कर कोई छूटई बन्दि महासुख होई ||38|| जो यह पाठ पढे हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा | तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ||40|| ।।दोहा।। पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप | राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप || #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏

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ramashankar Jun 18, 2019

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Naresh Shakya Jun 18, 2019

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Shakuntla Sharma Jun 18, 2019

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