👉Malti gupta🌹
👉Malti gupta🌹 Jan 18, 2020

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Radha Bansal Jan 26, 2020

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®singh9399525547 Jan 26, 2020

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jai shri krishna Jan 24, 2020

ॐ के बिना हर मंत्र अधूरा है, ॐ के बिना हर पूजा निष्फल है 🙏 #हरि_ॐ हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस छोटे-से शब्द में पूरा संसार, पूरा ब्रह्मांड समाया है। इस शब्द में इतनी शक्ति है कि आप सोच भी नहीं सकते हैं। केवल इस एक शब्द के किसी मंत्र के आगे जुड़ जाने से उसका प्रभाव कई गुणा बढ़ जाता है। * ॐ जाप साधन * यह आम अवधारणा है कि हम जब भी किसी मंत्र का जाप करने लगते हैं तो ॐ शब्द को छोड़कर अन्य सभी शब्दों के सही उच्चारण पर ध्यान देते हैं। लेकिन क्या कभी हमने यह सोचा है कि ॐ शब्द का सही उच्चारण क्या है? जिस शब्द के कारण प्रत्येक मंत्र का महत्व बढ़ जाता है क्या हम उसे सही रूप से उच्चारित करते हैं? * मंत्र का सही उच्चारण * शास्त्रों के अनुसार ॐ शब्द का नियमित जाप करते रहने से व्यक्ति ब्रह्मांड की शक्तियों को प्राप्त करता है। इतना ही नहीं, उसके जीवन के सभी दुख, रोग समाप्त हो जाते हैं। वैज्ञानिकों ने भी माना है कि ॐ का जाप करने से मानसिक तनाव में कमी आती है। इसलिए आगे जानिए ॐ का जाप करने के नियम, ताकि आप पा सकें इस शब्द का लाभ… * शांत स्थान * ॐ केवल एक शब्द ना होकर एक ध्वनि का काम करता है। इस शब्द का जाप करते समय जिस ध्वनि का उद्भव होता है उसी के कारण हमें विभिन्न लाभ प्राप्त होते हैं। इसलिए जब भी ॐ का जाप करें तो एक शांत स्थान का चयन ही करें। कोई ऐसी जगह जहां दूर तक कोई ना हो, खुली हवा आए, शांत वातावरण हो और आप प्रकृति को करीब से महसूस कर सकें। किसी गार्डन, मैदान या खुली छत जैसा स्थान सर्वश्रेष्ठ है ॐ के जाप के लिए। * समय * शास्त्रों के अनुसार दिन के चौबीस घंटों में से कुछ घंटों का समय ऐसा होता है जब ईश्वरीय शक्ति अपने चरम पर होती है। इस समय में किया गया जप, पाठ, अराधना अधिक फलित होता है। तो सुबह जल्दी और रात सोने से पहले ॐ का जाप करना अधिक फलदायी होगा। * यह एक साधना है * ॐ शब्द को केवल धर्म से ना जोड़कर साधना के रूप में भी जाना जाता है। वैज्ञानिकों ने भी माना है कि ॐ का जाप करना एक प्रकार का ध्यान है जिसकी बदौलत मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है। धर्म से दूर इस शब्द का प्रयोग हर कोई कर सकता है। * ध्वनि * ॐ का उच्चारण करते समय आपकी आवाज कितनी तेज़ और धीमी है, इससे भी लाभ मिलता है। शास्त्रों के अनुसार ॐ शब्द को जितने ऊंचे स्वर में और गहराई से उच्चारित किया जाएगा उतना ही अधिक यह फलित होता है। आप एक काम कर सकते हैं… जमीन पर आसन बिछाकर पद्मासन में बैठें और आंखें बंद कर लें। जिस जगह पर आप बैठे हों वहां आसपास का कोई शोर गुल नहीं होना चाहिए। अब जितना संभव हो सांस खींचें और फिर पेट से ॐ की आवाज़ को निकालते हुए सांस छोड़ते चले जाएं। * ॐ जाप के लाभ * इस प्रक्रिया को यदि आप 2 मिनट भी करेंगे तो आपका मानसिक तनाव छूमंतर हो जाएगा। शरीर के सभी छोटे-छोटे रोग केवल इस 2 मिनट की प्रक्रिया से ही दूर हो जाएंगें। श्री हरि |

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Sushma Wakhure Jan 25, 2020

आज तक का सबसे सुदंर मैसेज .........ये पढने के बाद एक "आह" और एक "वाह" जरुर निकलेगी... कृष्ण और राधा स्वर्ग में विचरण करते हुए अचानक एक दुसरे के सामने आ गए विचलित से कृष्ण- प्रसन्नचित सी राधा... कृष्ण सकपकाए, राधा मुस्काई इससे पहले कृष्ण कुछ कहते राधा बोल💬 उठी- "कैसे हो द्वारकाधीश ??" जो राधा उन्हें कान्हा कान्हा कह के बुलाती थी उसके मुख से द्वारकाधीश का संबोधन कृष्ण को भीतर तक घायल कर गया फिर भी किसी तरह अपने आप को संभाल लिया और बोले राधा से ... "मै तो तुम्हारे लिए आज भी कान्हा हूँ तुम तो द्वारकाधीश मत कहो! आओ बैठते है .... कुछ मै अपनी कहता हूँ कुछ तुम अपनी कहो सच कहूँ राधा जब जब भी तुम्हारी याद आती थी इन आँखों से आँसुओं की बुँदे निकल आती थी..." बोली राधा - "मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ ना तुम्हारी याद आई ना कोई आंसू बहा क्यूंकि हम तुम्हे कभी भूले ही कहाँ थे जो तुम याद आते इन आँखों में सदा तुम रहते थे कहीं आँसुओं के साथ निकल ना जाओ इसलिए रोते भी नहीं थे प्रेम के अलग होने पर तुमने क्या खोया इसका इक आइना दिखाऊं आपको ? कुछ कडवे सच , प्रश्न सुन पाओ तो सुनाऊ? कभी सोचा इस तरक्की में तुम कितने पिछड़ गए यमुना के मीठे पानी से जिंदगी शुरू की और समुन्द्र के खारे पानी तक पहुच गए ? एक ऊँगली पर चलने वाले सुदर्शन चक्रपर भरोसा कर लिया और दसों उँगलियों पर चलने वाळी बांसुरी को भूल गए ? कान्हा जब तुम प्रेम से जुड़े थे तो .... जो ऊँगली गोवर्धन पर्वत उठाकर लोगों को विनाश से बचाती थी प्रेम से अलग होने पर वही ऊँगली क्या क्या रंग दिखाने लगी ? सुदर्शन चक्र उठाकर विनाश के काम आने लगी कान्हा और द्वारकाधीश में क्या फर्क होता है बताऊँ ? कान्हा होते तो तुम सुदामा के घर जाते सुदामा तुम्हारे घर नहीं आता युद्ध में और प्रेम में यही तो फर्क होता है युद्ध में आप मिटाकर जीतते हैं और प्रेम में आप मिटकर जीतते हैं कान्हा प्रेम में डूबा हुआ आदमी दुखी तो रह सकता है पर किसी को दुःख नहीं देता आप तो कई कलाओं के स्वामी हो स्वप्न दूर द्रष्टा हो गीता जैसे ग्रन्थ के दाता हो पर आपने क्या निर्णय किया अपनी पूरी सेना कौरवों को सौंप दी? और अपने आपको पांडवों के साथ कर लिया ? सेना तो आपकी प्रजा थी राजा तो पालाक होता है उसका रक्षक होता है आप जैसा महा ज्ञानी उस रथ को चला रहा था जिस पर बैठा अर्जुन आपकी प्रजा को ही मार रहा था आपनी प्रजा को मरते देख आपमें करूणा नहीं जगी ? क्यूंकि आप प्रेम से शून्य हो चुके थे आज भी धरती पर जाकर देखो अपनी द्वारकाधीश वाळी छवि को ढूंढते रह जाओगे हर घर हर मंदिर में मेरे साथ ही खड़े नजर आओगे आज भी मै मानती हूँ लोग गीता के ज्ञान की बात करते हैं उनके महत्व की बात करते है मगर धरती के लोग युद्ध वाले द्वारकाधीश पर नहीं, i. प्रेम वाले कान्हा पर भरोसा करते हैं गीता में मेरा दूर दूर तक नाम भी नहीं है, पर आज भी लोग उसके समापन पर " राधे राधे" करते है". ?

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👉Malti gupta🌹 Jan 26, 2020

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Purushottam Sharma Jan 25, 2020

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