Neha Sharma, Haryana
Neha Sharma, Haryana Mar 26, 2020

*तू नाराज तो है अपने इंसान से भगवान.. *नहीं तो मंदिरों के दरवाजे बंद ना करता.. *सज़ा दे रहा है कुदरत से खिलवाड़ की.. *नहीं तो गुरुद्वारों से लंगर कभी ना उठता.. *आज उन बारिश की बूंदों से संदेश मिला.. *रोता तो तू भी है जब इंसान आंसू बहाता.. *माफ़ करदे अपने बच्चों के हर गुनाह.. *सब कहते हैं, तेरी मर्ज़ी के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता!!! 🍁👏*जय श्री राधेकृष्णा*👏🍁 🙏🥀*शुभ रात्रि नमन*🥀🙏 *आप सभी भाई-बहनों की रात्रि मंगलमय हो* *कुछ दिन महेंगे समान बेच कर* *आप अंबानी नही बन जाओगे* 😡 *किसी गरीब की बद्दुआ लग गयी तो सब हॉस्पिटल में दे आओगे 🤛🤛🤛🤛🤛🤛 *इसलिए..... *कालाबाजारी नही*🙏🙏🙏 *ये है विश्व का सबसे पहला लॉक डाउन.......* *जब सभी बृजवासी गोवेर्धन पर्वत के नीचे 7 दिन एवम् 7 रात्रि तक रहे थे।उनके मध्य थे हमारे श्याम सुंदर।* *बिहारी जी ऐसे ही सभी मानव जीवन की रक्षा करें।* 🙏🏻🙏🏻🌸🌸🕉️🕉️🌺🌺🚩 *यदि कोई भी दुकानदार सामान से अधिक रेट मांगे या कीमत बढ़ाकर मांगे पूछने पर यह बताएं कि ऊपर से महंगा आ रहा है तो तुरंत 7667 532042/9708320025 पर बेहिचक कॉल करें दुकान का नाम बताएं 10 मिनट के अंदर प्रशासन पहुंचकर दुकान को सील करेगा इस मुश्किल घड़ी में लोगों की मदद करें ना कि लोगों को लूटने का काम करें। जनहित में जारी। *हमारे जीवन में किस व्यक्ति की उपस्थिति कितनी एवं क्यों बनी रहेगी, यह सभी का अपना पृथक चयन होगा। किसे कितना महत्व देना है, किसे परिस्थितिवश देना पड़ता है यह भी लगभग व्यक्ति विशेष पर ही निर्भर करता है। स्मरण रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कोई भी व्यक्ति, यदि जीवन में किसी न किसी प्रकार से अपनी उपस्थिति बनाये रखना चाहता है, तो उनकी ओर विशेष रूप में ध्यान देने की आवश्यकता है। उद्देश्य, कारण, परिस्थिति इन सबका विश्लेषण करते हुए मंथन अति आवश्यक है। व्यक्ति चाहे दुष्ट प्रवृत्ति का हो अथवा सुंदर, सज्जन प्रवृत्ति का हो, दोनों की ही अति उपेक्षा हानिकारक हो सकती है, उचित नहीं कही जा सकती...विश्लेषण तथा मंथन कर निर्णय आवश्यक है..!! प्रसन्न रहें!!* *जय श्री कृष्ण*🙏🙏 *आज का दिन शुभ मंगलमय हो* [🙏💐 श्री हरि बोल।🙏💐 एक भक्त ईश्वर से कहता है मुझे जीवन भर सुखशांति चाहिये।" ईश्वर ने तुरंत हां कर दी। भक्त......"मुझे परिवार का भी जिंदगी भर सुख चैन चाहिये"।? ईश्वर ने तुरंत हां कर दी। फिर भक्त..."मुझे अपने रिश्तेदारों की भी सलामती चाहिये।" ईश्ववर ने हां कर दी। भक्त बहुत प्रसन्न हुआ कहा .....मुझे मेरे जीवन में कोई दुःख तकलीफ नही चाहिये। ईश्वर ने तुरंत हामी भर दी। भक्त बोला... .."आपकी कोई शर्त ?" ईश्वर हंसे और बोले .. बस छोटी सी...... रोज सिर्फ एक घंटा नाम सिमरन...। भक्त बोला... मैं ये नही कर सकता.। ईश्वर बोले "तेरे एक घंटा नाम सिमरन के बदले मैं तुझे तेरे, तेरे परिवार, और रिश्तेदारों को उम्र भर सुख चैन खुशियां देने का वादा करता हूं।" जिंदगी में तुझे कोई दुख दर्द तकलीफ नही होगी। तुम हर टेंशन से मुक्त रहोगे। भक्त बोला... ना बाबा ना, मैं एक घंटा नाम सिमरन नही कर सकता. ईश्वर बोले...... एक बार फिर सोच लो। भक्त.."नहीं होगा। तब से आज तक ये इंसान दुख दर्द तकलीफें भुगत रहा है। वो नाम दान तो ले लेता है। ईश्वर से वादा भी करता है...दावा तक करता है। पर सिर्फ एक घंटा नाम सिमरन नही कर सकता। ईश्वर कहते है... "यह इंसान भी अजीब है.. ढाई घंटे फिल्म देख सकता है। ढाई घंटे डाक्टर के पास जाकर लाईन में बैठ सकता है। ढाई घंटे योगा तक कर सकता है, अपनी तबियत ठीक करने के लिये। पूरा पूरा दिन ट्रेन में सफर कर सकता है। पार्टियों में घंटों टाईम-पास कर सकता है।" लेकिन................. जो ईश्वर मात्र एक घंटा नाम सिमरन के बदले मनुष्य के हर दुख दर्द तकलीफ संकट बीमारियां तक दूर करने की गारंटी देता हैं।जिंदगी में खुशियां ही खुशियाँ लाने का वादा करता है। उसकी यह छोटी सी शर्त इस इंसान को मंजूर नहीं है। शायद........... इसी वजह से ये इंसान आज, बहुत कुछ, भुगत रहा है। हो सके तो नाम सिमरन जरुर करें। 🙏अपने लिए,अपनी आत्मा और अपनो के कल्याण के लिए। भजते रहिए।🙏 [ 2️⃣6️⃣❗0️⃣3️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣0️⃣ *"बहुत ही सुंदर सुविचार*......*चार मित्र"* *चार मित्र थे। एक ब्राह्मण था, एक क्षत्रिय, एक वैश्य और एक शूद्र। चारों में इतना प्रेम था, जैसे एक प्राण, चार तन हों। चारों सदा साथ रहते, परदेश भी जाते तो एक साथ। *ब्राह्मण सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञाता था। क्षत्रिय शस्त्र-विद्या में पूर्ण पारंगत था। वैश्य को व्यापार की एक-एक बारीक कला ज्ञात थी। शूद्र में सभी के प्रति सहज सेवा-भाव था। न किसी में अहंकार था, न हीनभाव। *एक बार वे चारों घूमते-घूमते दूसरे नगर में पहुँच गये। वहाँ का राजा सन्तानहीन था। सन्तान की आशा करते-करते वह वृद्ध हो चला। उसे अब किसी योग्य उत्तराधिकारी की तलाश थी। राजा के सिंहासन के सामने एक सुन्दर-सी मिट्टी की प्रतिमा रखी रहती। राजा स्वयं कलाकार था। उसने स्वयं ही गढ़कर यह प्रतिमा तैयार की थी। वह प्रतिमा सदा उसके सामने रहती और वह अक्सर सोचता 'काश! इस प्रतिमा में कोई प्राण फूँक देता तो यह सजीव हो उठती।' *वे चारों मित्र एक दिन घूमते-घूमते उस राजा के दरबार में जा पहुँचे। चारों राजाको झुककर प्रणाम कर रहे थे कि उनकी दृष्टि उस प्रतिमा पर पड़ी । प्रतिमा का अनूठा सौन्दर्य उन्हें आकर्षित करने लगा । चारों विचार करने लगे 'क्या ही अच्छा होता कि यह प्रतिमा सजीव हो उठती।' तभी शूद्र ने अपनी इच्छा-शक्ति से उसके पैरों में प्राण-शक्ति आरोपित की। वैश्य ने उसके हृदयप्रदेश में चेतना का संचार किया। क्षत्रिय ने अपनी सम्पूर्ण क्षात्र-शक्ति की सहायता से उसकी बाहुओं में प्राण फूँके। अब ब्राह्मण ने अपने ब्रह्मज्ञान के बल पर उसके मस्तिष्क में प्राणों का प्रवेश कराया। इतने में ही वह मिट्टी की प्रतिमा जो अब तक निर्जीव खड़ी थी, एक सुन्दर सर्वगुण सम्पन्न नवयुवक के रूप में सजीव होकर सामने खड़ी हो गयी। सहसा यह चमत्कार देख राजा अपार हर्ष से झूम उठा। उसका ध्यान उन चारों मित्रों पर गया। उसने उन्हें अपने पास बुलाकर कहा, 'आप चारों में से जिसने भी इस प्रतिमा में प्राण डाले हैं, मैं उसे अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता हूँ।' ब्राह्मण विनम्रता से बोला, 'महाराज! हम चारों में कोई अलग नहीं है, हम चार शरीर एक प्राण हैं, हम एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।' राजा ने कहा, 'फिर आप ही निर्णय करके बतायें कि मैं किसे अपना उत्तराधिकारी घोषित करूँ?' *चारों मित्र कहने लगे, 'महाराज! हममें से किसी को भी राज्य का मोह नहीं है, आप हम चारों के प्रतिनिधिरूप इस प्रतिमा को ही अपना उत्तराधिकारी बना लें, हम चारों ने समानरूप से प्रयत्न करके इस प्रतिमा को सजीव बनाया है। इस प्रतिमा के रूप में हम चारों आपके सामने उपस्थित रहेंगे, जब तक आपके राज्य में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र प्रेम एवं सद्भाव से रहेंगे, तब तक यह प्रतिमा सजीव रहेगी।' राजा ने प्रसन्न होकर अपने उत्तराधिकारी का राज्याभिषेक किया। तभी सबने देखा कि उन चारों मित्रों के नेत्रों से प्रकाश की किरणें निकलीं और नये शासक के नेत्रों में समा गयीं। *🙏🏿🙏🙏🏽जय जय श्री राधेकृष्णा*🙏🏼🙏🏾🙏🏻

*तू नाराज तो है अपने इंसान से भगवान.. 
*नहीं तो मंदिरों के दरवाजे बंद ना करता.. 
*सज़ा दे रहा है कुदरत से खिलवाड़ की.. 
*नहीं तो गुरुद्वारों से लंगर कभी ना उठता.. 
*आज उन बारिश की बूंदों से संदेश मिला.. 
*रोता तो तू भी है जब इंसान आंसू बहाता.. 
*माफ़ करदे अपने बच्चों के हर गुनाह.. 
*सब कहते हैं, तेरी मर्ज़ी के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता!!! 
🍁👏*जय श्री राधेकृष्णा*👏🍁
  🙏🥀*शुभ रात्रि नमन*🥀🙏
*आप सभी भाई-बहनों की रात्रि मंगलमय हो*

 *कुछ दिन महेंगे समान बेच कर* 
*आप अंबानी नही बन जाओगे* 😡

*किसी गरीब की बद्दुआ लग गयी तो सब हॉस्पिटल में दे आओगे 🤛🤛🤛🤛🤛🤛

*इसलिए.....
 *कालाबाजारी नही*🙏🙏🙏
    *ये है विश्व का सबसे पहला लॉक डाउन.......* 
*जब सभी बृजवासी गोवेर्धन पर्वत के नीचे 7 दिन एवम् 7 रात्रि तक रहे थे।उनके मध्य थे हमारे श्याम सुंदर।*
*बिहारी जी ऐसे ही सभी मानव जीवन की रक्षा करें।*
🙏🏻🙏🏻🌸🌸🕉️🕉️🌺🌺🚩

 *यदि कोई भी दुकानदार सामान से अधिक रेट मांगे या कीमत बढ़ाकर मांगे पूछने पर यह बताएं कि ऊपर से महंगा आ रहा है तो तुरंत 7667 532042/9708320025 पर बेहिचक कॉल करें दुकान का नाम बताएं 10 मिनट के अंदर प्रशासन पहुंचकर दुकान को सील करेगा इस मुश्किल घड़ी में लोगों की मदद करें ना कि लोगों को लूटने का काम करें।
जनहित में जारी।

  *हमारे जीवन में किस व्यक्ति की उपस्थिति कितनी एवं क्यों बनी रहेगी, यह सभी का अपना पृथक चयन होगा। किसे कितना महत्व देना है, किसे परिस्थितिवश देना पड़ता है यह भी लगभग व्यक्ति विशेष पर ही निर्भर करता है। स्मरण रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कोई भी व्यक्ति, यदि जीवन में किसी न किसी प्रकार से अपनी उपस्थिति बनाये रखना चाहता है, तो उनकी ओर विशेष रूप में ध्यान देने की आवश्यकता है। उद्देश्य, कारण, परिस्थिति इन सबका विश्लेषण करते हुए मंथन अति आवश्यक है। व्यक्ति चाहे दुष्ट प्रवृत्ति का हो अथवा सुंदर, सज्जन प्रवृत्ति का हो, दोनों की ही अति उपेक्षा हानिकारक हो सकती है, उचित नहीं कही जा सकती...विश्लेषण तथा मंथन कर निर्णय आवश्यक है..!! प्रसन्न रहें!!*

  *जय श्री कृष्ण*🙏🙏

 *आज का दिन शुभ मंगलमय हो*
[🙏💐 श्री हरि बोल।🙏💐

एक भक्त ईश्वर से कहता है
मुझे जीवन भर सुखशांति चाहिये।"
ईश्वर ने तुरंत हां कर दी।
भक्त......"मुझे परिवार का भी जिंदगी भर सुख चैन चाहिये"।?
ईश्वर ने तुरंत हां कर दी।
फिर भक्त..."मुझे अपने रिश्तेदारों की भी सलामती चाहिये।"
ईश्ववर ने हां कर दी।
भक्त बहुत प्रसन्न हुआ
कहा .....मुझे मेरे जीवन में कोई दुःख तकलीफ नही चाहिये।
ईश्वर ने तुरंत हामी भर दी।
भक्त बोला... .."आपकी कोई शर्त ?"
ईश्वर हंसे और बोले ..
बस छोटी सी......
रोज सिर्फ एक घंटा
नाम सिमरन...।
भक्त बोला...
मैं ये नही कर सकता.।
ईश्वर बोले
"तेरे एक घंटा नाम सिमरन के बदले मैं 
तुझे तेरे, तेरे परिवार, और रिश्तेदारों को उम्र भर सुख चैन खुशियां देने का वादा करता हूं।"
जिंदगी में तुझे कोई दुख दर्द तकलीफ नही होगी।
तुम हर टेंशन से मुक्त रहोगे।
भक्त बोला...
ना बाबा ना, मैं एक घंटा नाम सिमरन नही कर सकता.
ईश्वर बोले......
एक बार फिर सोच लो।
भक्त.."नहीं होगा।
तब से आज तक ये इंसान दुख दर्द तकलीफें भुगत रहा है।
वो नाम दान तो ले लेता है।
ईश्वर से वादा भी करता है...दावा तक करता है।
पर सिर्फ एक घंटा
नाम सिमरन नही कर सकता।
ईश्वर कहते है...
"यह इंसान भी अजीब है..
ढाई घंटे फिल्म देख सकता  है।
ढाई घंटे डाक्टर के पास जाकर लाईन में बैठ सकता है।
ढाई घंटे योगा तक कर सकता है, अपनी तबियत ठीक करने के लिये।
पूरा पूरा दिन ट्रेन में सफर कर सकता है।
पार्टियों में घंटों टाईम-पास कर सकता है।" 
लेकिन.................
जो ईश्वर मात्र एक घंटा नाम सिमरन के बदले मनुष्य के हर दुख दर्द तकलीफ संकट बीमारियां तक दूर करने की गारंटी देता हैं।जिंदगी में खुशियां ही खुशियाँ लाने का वादा करता है। उसकी यह छोटी सी शर्त इस इंसान को मंजूर नहीं है।
शायद...........
इसी वजह से ये इंसान आज, बहुत कुछ, भुगत रहा है।
हो सके तो नाम सिमरन
जरुर करें।
🙏अपने लिए,अपनी आत्मा और अपनो के कल्याण के लिए। 
भजते रहिए।🙏

[ 2️⃣6️⃣❗0️⃣3️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣0️⃣
   *"बहुत ही सुंदर सुविचार*......*चार मित्र"*

          *चार मित्र थे। एक ब्राह्मण था, एक क्षत्रिय, एक वैश्य और एक शूद्र। चारों में इतना प्रेम था, जैसे एक प्राण, चार तन हों। चारों सदा साथ रहते, परदेश भी
जाते तो एक साथ।
          *ब्राह्मण सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञाता था। क्षत्रिय शस्त्र-विद्या में पूर्ण पारंगत था। वैश्य को व्यापार की एक-एक बारीक कला ज्ञात थी। शूद्र में सभी के प्रति सहज सेवा-भाव था। न किसी में अहंकार था, न हीनभाव।
          *एक बार वे चारों घूमते-घूमते दूसरे नगर में पहुँच गये। वहाँ का राजा सन्तानहीन था। सन्तान की आशा करते-करते वह वृद्ध हो चला। उसे अब किसी योग्य उत्तराधिकारी की तलाश थी। राजा के सिंहासन के सामने एक सुन्दर-सी मिट्टी की प्रतिमा रखी रहती। राजा स्वयं कलाकार था। उसने स्वयं ही गढ़कर यह प्रतिमा तैयार की थी। वह प्रतिमा सदा उसके सामने रहती और वह अक्सर सोचता 'काश! इस प्रतिमा में कोई प्राण फूँक देता तो यह सजीव हो उठती।'
          *वे चारों मित्र एक दिन घूमते-घूमते उस राजा के दरबार में जा पहुँचे। चारों राजाको झुककर प्रणाम कर रहे थे कि उनकी दृष्टि उस प्रतिमा पर पड़ी । प्रतिमा का अनूठा सौन्दर्य उन्हें आकर्षित करने लगा । चारों विचार करने लगे 'क्या ही अच्छा होता कि यह प्रतिमा सजीव हो उठती।' तभी शूद्र ने अपनी इच्छा-शक्ति से उसके पैरों में प्राण-शक्ति आरोपित की। वैश्य ने उसके हृदयप्रदेश में चेतना का संचार किया। क्षत्रिय ने अपनी सम्पूर्ण क्षात्र-शक्ति की सहायता से उसकी बाहुओं में प्राण फूँके। अब ब्राह्मण ने अपने ब्रह्मज्ञान के बल पर उसके मस्तिष्क में प्राणों का प्रवेश कराया। इतने में ही वह मिट्टी की प्रतिमा जो अब तक निर्जीव खड़ी थी, एक सुन्दर सर्वगुण सम्पन्न नवयुवक के रूप में सजीव होकर सामने खड़ी हो गयी। सहसा यह चमत्कार देख राजा अपार हर्ष से झूम उठा। उसका ध्यान उन चारों मित्रों पर गया। उसने उन्हें अपने पास बुलाकर कहा, 'आप चारों में से जिसने भी इस प्रतिमा में प्राण डाले हैं, मैं उसे अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता हूँ।' ब्राह्मण विनम्रता से बोला, 'महाराज! हम चारों में कोई अलग नहीं है, हम चार शरीर एक प्राण हैं, हम एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।' राजा ने कहा, 'फिर आप ही निर्णय करके बतायें कि मैं किसे अपना उत्तराधिकारी घोषित करूँ?'
          *चारों मित्र कहने लगे, 'महाराज! हममें से किसी को भी राज्य का मोह नहीं है, आप हम चारों के प्रतिनिधिरूप इस प्रतिमा को ही अपना उत्तराधिकारी बना लें, हम चारों ने समानरूप से प्रयत्न करके इस प्रतिमा को सजीव बनाया है। इस प्रतिमा के रूप में हम चारों आपके सामने उपस्थित रहेंगे, जब तक आपके राज्य में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र प्रेम एवं सद्भाव से रहेंगे, तब तक यह प्रतिमा सजीव रहेगी।' राजा ने प्रसन्न होकर अपने उत्तराधिकारी का राज्याभिषेक किया। तभी सबने देखा कि उन चारों मित्रों के नेत्रों से प्रकाश की किरणें निकलीं और नये शासक के नेत्रों में समा गयीं।
  *🙏🏿🙏🙏🏽जय जय श्री राधेकृष्णा*🙏🏼🙏🏾🙏🏻

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कामेंट्स

Renu Singh Mar 26, 2020
Shubh Ratri Vandan Dear Sister ji 🙏🌹 Mata Rani ki kripa Aap aur Aàpki family pr hamesha Bni rhe Aàpka Har pal Shubh V Mangalmay ho Sister Ji 🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏

Mamta Chauhan Mar 26, 2020
Radhe radhe ji shubh ratri vandan dear sister ji aap har pal khush rhe ji 🌷🙏🙏

Ansouya Ansouya Mar 26, 2020
जय माता दी शुभ रात्रि वनदन बहना सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वाथ साघिके शरणये त्रयमबके गौरी नारायणी नमोस्तुते 🌷🙏🌷🙏🙏🌷

🌹🌹pappu 🌹🌹jha🌹🌹 Mar 26, 2020
जय माता दी शुभ रात्रि प्यारी बहना आप का हर पल मंगलमय हो माता रानी की कृपा सदैव आप पर बनी रहे

Rajpal Bhardwaj Mar 27, 2020
ॐ जय माता श्री ‌। शुभ सुप्रभात आपका हर पल मंगलमय हो

neeta trivedi Mar 27, 2020
जय माता रानी की शुभ प्रभात वंदन प्यारी नेहा बहना जी आप का हर एक पल शुभ और मंगल मय हो माता रानी की कृपा सदा आपके ऊपर बनी रहे 🙏🙏🌹🌹

Kailash Pandey Mar 27, 2020
जय माता दी शुभ रात्रि वंदन बहन जी माता रानी की कृपा दृष्टि आप पर सदैव बनी रहे

Mamta Chauhan Mar 27, 2020
Jai mata di suprabhat vabdan dear sister ji aapka har pal khushion bhra ho 🌷🙏🙏

O.P.Rajpurohit Mar 27, 2020
🌹🙏🏻जय श्री कृष्णा 🙏🏻🌹

Kamlesh Mar 27, 2020
जय माँ चन्द्रघंटा 🙏🙏

Madan Lal Kumawat Mar 27, 2020
ओम परम पिता परमेश्वर आए नमः प्रभु इस कोरोना से हमारे देश की सभी मनुष्य की सहायता करें

ಗಿರಿಜಾ ನೂಯಿ Mar 28, 2020
🚩Jai Shri Radhe Krishna Ji🌹 Super Post Ji👍👍👍👍🙏🙏🙏🙏🌷🌷🌷🌷🌸🌸🌸🌸💐💐💐💐

Neha Sharma, Haryana May 10, 2020

*माफ़ करना🙏पोस्ट बड़ी है मगर आध्यात्मिकता, राष्ट्रीयता, आरोग्यता, ऐतिहासिकता, सभ्यता और संस्कृति का सार समेटे हुए 'All in One' अद्भुत प्रस्तुति*...*कमी जान पड़े तो काॅमैंट कर उचित मार्गदर्शन करने का कष्ट अवश्य करें... धन्यवाद।✍️✍️✍️ 🙏🦚🌹*जय श्री राधेकृष्णा*🌹🦚🙏* *शख्शियत अच्छी होगी तभी दुश्मन बनेंगे* *वरना बुरे की तरफ देखता ही कौन है* *पत्थर भी उसी पेड़ पर फेंके जाते है* *जो फलों से लदा होता है.* *🙏🌤🌹*शुभ प्रभात नमन*🌹🌤🙏* *।।आप सभी भाई-बहनों का दिन शुभ एवं मंगलमय हो।।* *मातृ दिवस पर विशेष!!!!! * सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी॥ *तनय मातु पितु तोषनिहारा। दुर्लभ जननि सकल संसारा॥ *भावार्थ:-हे माता! सुनो, वही पुत्र बड़भागी है, जो पिता-माता के वचनों का अनुरागी (पालन करने वाला) है। (आज्ञा पालन द्वारा) माता-पिता को संतुष्ट करने वाला पुत्र, हे जननी! सारे संसार में दुर्लभ है॥ *आज मातृ दिवस है, एक ऐसा दिन है, आज के दिन हमें संसार की समस्त माताओं का सम्मान और सत्कार करना चाहियें, वैसे माँ किसी के सम्मान की मोहताज नहीं होती, माँ शब्द ही सम्मान के परिपूर्ण होता है, मातृ दिवस मनाने का उद्देश्य पुत्र के उत्थान में उनकी महान भूमिका को महसूस करना है। *श्रीमद् भागवत गीता में कहा गया है कि माँ की सेवा से मिला आशीर्वाद सात जन्म के पापों को नष्ट करता है, यही माँ शब्द की महिमा है, असल में कहा जाए तो माँ ही बच्चे की पहली गुरु होती है, एक माँ आधे संस्कार तो बच्चे को अपने गर्भ मैं ही दे देती है यही माँ शब्द की शक्ति को दशार्ता है, वह माँ ही होती है जो प्रसव की पीडा सहकर अपने शिशु को जन्म देती है। *जन्म देने के बाद भी मॉं के चेहरे पर एक सन्तोषजनक मुस्कान होती है, इसलिए माँ को सनातन धर्म में भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है, ‘माँ’ शब्द से समस्त संसार का बोध होता है, जिसके उच्चारण मात्र से ही हर दुख दर्द का अंत हो जाता है, ‘माँ’ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। *गीता में कहा गया है कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी’’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है, कहा जाये तो जननी और जन्मभूमि के बिना स्वर्ग भी बेकार है, क्योंकि माँ कि ममता कि छाया ही स्वर्ग का एहसास कराती है, जिस घर में माँ का सम्मान नहीं किया जाता है वो घर नरक से भी बदतर होता है। *भगवान श्रीरामजी माँ शब्द को स्वर्ग से बढकर मानते थे, क्योंकि संसार में माँ नहीं होगी तो संतान भी नहीं होगी और संसार भी आगे नहीं बढ पाएगा, संसार में माँ के समान कोई छाया नहीं है, संसार में माँ के समान कोई सहारा नहीं है, संसार में माँ के समान कोई रक्षक नहीं है और माँ के समान कोई प्रिय चीज नहीं है, एक माँ अपने पुत्र के लिए छाया, सहारा, रक्षक का काम करती है। *माँ के रहते कोई भी बुरी शक्ति उसके जीवित रहते उसकी संतान को छू नहीं सकती, इसलिये एक माँ ही अपनी संतान की सबसे बडी रक्षक है, दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग मिलता है तो वो माँ के चरणों में मिलता है, जिस घर में माँ का अनादर किया जाता है, वहाँ कभी देवता वास नहीं करते। *एक माँ ही होती है जो बच्चे कि हर गलती को माफ कर गले से लगा लेती है, यदि नारी नहीं होती तो सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी, स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश तक सृष्टि की रचना करने में असमर्थ बैठे थे, जब ब्रह्मा जी ने नारी की रचना की तभी से सृष्टि की शुरूआत हुयीं। *बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार ये सब ही तो हर ‘माँ’ की मूल पहचान है, दुनियाँ की हर नारी में मातृत्व वास करता है, बेशक उसने संतान को जन्म दिया हो या न दिया हो, नारी इस संसार और प्रकृति की जननी है। *नारी के बिना तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती, इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की मूल पहचान माँ होती है, अगर माँ न हो तो संतान भी नहीं होगी और न ही सृष्टि आगे बढ पाएगी, इस संसार में जितने भी पुत्रों की मां हैं, वह अत्यंत सरल रूप में हैं, कहने का मतलब कि मां एकदम से सहज रूप में होती हैं, वे अपनी संतानों पर शीघ्रता से प्रसन्न हो जाती हैं। *माँ अपनी समस्त खुशियां अपनी संतान के लिए त्याग देती हैं, क्योंकि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पुत्री कुपुत्री हो सकती है, लेकिन माता कुमाता कभी नहीं हो सकती, एक संतान माँ को घर से निकाल सकती है लेकिन माँ हमेशा अपनी संतान को आश्रय देती है, एक माँ ही है जो अपनी संतान का पेट भरने के लिए खुद भूखी सो जाती है और उसका हर दुख दर्द खुद सहन करती है। *लेकिन आज के समय में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने मात-पिता को बोझ समझते हैं, और उन्हें वृध्दाआश्रम में रहने को मजबूर करते हैं, ऐसे लोगों को आज के दिन अपनी गलतियों का पश्चाताप करते हुयें अपने माता-पिताओं को जो वृध्द आश्रम में रह रहे हैं उनको घर लाने के लिए अपना कदम बढाना चाहियें, क्योंकि माता-पिता से बढकर दुनिया में कोई नहीं होता। *माता के बारे में कहा जायें तो जिस घर में माँ नहीं होती या माँ का सम्मान नहीं किया जाता वहाँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का वास नहीं होता, हम नदियों को, अपनी धरती को, गाय को, गीता को, गायत्री को माता का दर्जा दे सकते हैं, तो अपनी जननी से वो हक क्यों छीन रहे हैं, और उन्हें वृध्दाआश्रम भेजने को मजबूर कर रहे है, यह सोचने वाली बात है। *माता के सम्मान का यह एक दिन नहीं होता, माता का सम्मान हमें 365 दिन करना चाहियें, लेकिन क्यों न हम इस मातृ दिवस से अपनी गलतियों का पश्चाताप कर उनसे माफी मांगें, और माता की आज्ञा का पालन करने और अपने दुराचरण से माता को कष्ट न देने का संकल्प लेकर मातृ दिवस को सार्थक बनायें, आज मातृ दिवस के पावन दिवस की पावन सुप्रभात् आप सभी भाई-बहनों के लिये मंगलमय् हो।जय माँ 🙏 🌷❤️मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं❤️🌷 *Happy Mother's Day ...!!!! *दुनिया में भगवान है या नहीं इस प्रश्न पर हमेशा से सवाल उठता रहा है और आगे भी उठेगा ... *पर दुनिया में ' माँ ' है , जो किसी भी भगवान से ऊपर है...!!!! *अपने माँ-बाप को प्यार दे , सेवा करें , उसके बाद किसी भगवान को खुश नहीं करना पड़ेगा !!!! *तेरे ही आंचल में निकला बचपन, *तुझ से ही तो जुड़ी हर धड़कन, *कहने को तो मां सब कहते *पर मेरे लिए तो है तु भगवान! " Love You Maa❤️ ❤️चीनी से भी स्वीट है मेरी मां , 🌷फूलों से भी सुंदर है मेरी मां ... ❤️आज पढ़ा कि मदर्स डे मां का दिन है , 🌷कौन बताएगा कि वो कौन सा दिन है, ❤️जो मां के बिन है ... ❤️रुके तो चांद जैसी, चले तो हवाओं जैसी , 🌷मां ही है इस दुनिया में भगवान जैसी, 🌹🙏🏼❤️🌷🙏🏼❤️🌷❤️🙏🏼🌷🙏🏼❤️ 🥀उसके रहते जीवन में कोई गम नहीं होता ❤️*दुनिया साथ दे ना दे पर; 🥀मां का प्यार कभी कम नहीं होता. 🌹❤️🙏🏼🌷❤️🌹🌷🙏🏼❤️🌹 🌷वह जमी मेरा वही आसमान है ; ❤️वह खुदा मेरा वही भगवान है; 🌷क्यों मैं जाऊं उसे कहीं छोड़कर ❤️मां के कदमों में सारा जहान है, 🌷रूह के रिश्तो की यह गहराइयां तो देखिए, ,❤️चोट लगती है हमें और चिल्लाती है मां, 🌷हम खुशियों में मां को भले ही भूल जाएं, ❤️जब मुसीबत आ जाए तो याद आती है मां, ❤️🌷❤️🌹❤️🌷❤️🥀❤️🌹❤️🌷 🌷*तेरे ही आंचल में निकला बचपन, ❤️तुझसे ही तो जुड़ी हर धड़कन, 🌷कहने को तो मां सब कहते पर, 🌹मेरे लिए तू है तू भगवान, ❤️रुके तो चांद जैसी है, 🌹चले तो हवाओं जैसी है, 🌷वह मा ही है, ❤️जो धूप में भी छांव जैसी है! ❤️❤️हैप्पी मदर्स डे❤️❤️ ❤️I love you मां🙏🏼❤️ ************************************************* 🙏😊 जिंदगी में रोने की वज़ह चाहे जो भी हो..🌹 😊 मुस्कुराने की वज़ह सिर्फ़ आप है..🌹. 💞 मेरे प्यारे राधा-माधव ..... 🌹*जय श्री राधेकृष्णा*🌹🙏 🙏 तू ही तू ...🌹 🙏 तू ही तू ...🌹 🙏 तू ही तू.....🌹 *जय श्री राधेकृष्णा*🌹🙏 ************************************************* *सनातन धर्म की जय"🙏🙏 *हिंदू ही सनातनी है..... *दधीचि ऋषि - हड्डियों का दान शस्त्र की महत्ता...!!* *दधीचि ऋषि ने देश के हित में अपनी हड्डियों का दान कर दिया था !* *उनकी हड्डियों से तीन धनुष बने- १. गांडीव, २. पिनाक और ३. सारंग !* *जिसमे से गांडीव अर्जुन को मिला था जिसके बल पर अर्जुन ने महाभारत का युद्ध जीता !* *सारंग नाम से भगवान विष्णु का प्रलयंकारी धनुष है ।* *और, पिनाक भगवान शिव जी के पास था जिसे तपस्या के माध्यम से खुश रावण ने शिव जी से मांग लिया था !* *परन्तु... वह उसका भार लम्बे समय तक नहीं उठा पाने के कारण बीच रास्ते में जनकपुरी में छोड़ आया था !* *इसी पिनाक की नित्य सेवा सीताजी किया करती थी ! पिनाक का भंजन करके ही भगवान राम ने सीता जी का वरण किया था !* *ब्रह्मर्षि दधिची की हड्डियों से ही "एकघ्नी नामक वज्र" भी बना था ... जो भगवान इन्द्र को प्राप्त हुआ था !* *इस एकघ्नी वज्र को इन्द्र ने कर्ण की तपस्या से खुश होकर उन्होंने कर्ण को दे दिया था! इसी एकघ्नी से महाभारत के युद्ध में भीम का महाप्रतापी पुत्र घतोत्कक्ष कर्ण के हाथों मारा गया था ! और भी कई अश्त्र-शस्त्रों का निर्माण हुआ था उनकी हड्डियों से !* *लेकिन ......... दधिची के इस अस्थि-दान का उद्देश्य क्या था ??????* *क्या उनका सन्देश यही था कि..... उनकी आने वाली पीढ़ी नपुंसकों और कायरों की भांति मुंह छुपा कर घर में बैठ जाए और शत्रु की खुशामद करे....??? नहीं..* *कोई ऐसा काल नहीं है जब मनुष्य शस्त्रों से दूर रहा हो..* *हिन्दुओं के धर्मग्रन्थ से ले कर ऋषि-मुनियों तक का एक दम स्पष्ट सन्देश और आह्वान रहा है कि....* *''हे सनातनी वीरो. शास्त्र केसाथ शस्त्र उठाओ और अन्याय तथा अत्याचार के विरुद्ध युद्ध करो *राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए अंततः बस एक ही मार्ग है !* *सशक्त बनो.* *⚔सशस्त्र बनो🏹* *_जनजागृति हेतु लेख का प्रसारण अवश्य करें ...🚩जगतजननी माँ जगदम्बे की जय,,_ *आपने महाभारत या रामायण में कहीं भी शहीद शब्द सुना है ?? यह शहीद शब्द इस्लामिक हैं, और इस्लाम में शहीद उन्हें कहा जाता है जो, इस्लामिक जिहाद करते हुए मारा जाता है। किन्तु अज्ञानवश हम लोग भी हमारी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त करने वाले जवानों को भी शहीद कहते हैं। जो धर्म राष्ट्र और वीर जवानों का भी अपमान है। इस प्रथा या शब्द प्रयोग को हमें बदलना होगा। अब कोई जवान शहीद हुआ है ऐसा न कहते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ है ऐसा कहें 🙏🏻 *मैं खुद जबसे इस शहीद शब्द का अर्थ समझा तब से मैं इस शब्द का प्रयोग करना छोड़ दिया है। *जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम्*🇮🇳🙏 ************************************************* *पैरों में सूजन होने के कारण*....... *अधिक वजन के कारण पैरों में सूजन होना*अधिक वजन होने के कारण अनेक प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं. अनेक बार अधिक वजन होने के कारण पैरों में भी सूजन आने लगती हैं. *ज्यादा देर तक बैठने या खड़े होने के कारण पैरों में सूजन होना* अनेक लोगों को अधिक देर तक बैठ के या खड़े होकर काम करना पड़ता है जिसके कारण उनके पैरों में सूजन आने लगती है. *बढ़ती उम्र होने के कारण पैरों में सूजन होना* अनेक बार बढ़ती उम्र के कारण लोगों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार पैरों में सूजन की समस्या आने लगती है. *सही से ना खाने-पीने के कारण पैरों में सूजन होना-*सही से खान-पान ना करने के कारण मानव शरीर में उचित पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते जिसके कारण अनेक समस्याएं होने लगती है. कभी-कभी पोषक तत्वों की कमी होने के कारण पैरों में सूजन भी आने लगती है. *पैरो की सूजन कम करने के उपाय* 👌पैरों की सिंकाई करें पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌पैरों की सूजन दूर करने के लिए पैरों की सिकाई करनी जरुरी होती है. इसके प्रयोग के लिए दो अलग-अलग टब में गर्म तथा ठंडा पानी रखें. अब अपने पैरों को करीब चार मिनट तक गर्म पानी में डालें. इसके बाद एक मिनट के लिए अपने पैरों को ठंडे पानी में डालें. इस विधि का प्रयोग करीब 20 बार करें. इससे पैरों की सूजन कम होने लगेगी. 👌पैरों की मसाज करें पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌अत्यधिक लोगों को पैर में सूजन की शिकायत रहती है. इस समस्या का अधिक असर जाड़ो के दिनों में देखने को मिलता है. इस समस्या से राहत पाने के लिए जैतून का या सरसों का तेल हल्का गर्म कर लें. तेल हाथों पर लेकर रब करें और 5 मिनट तक ऊपर की ओर पैरों की मसाज करें. इससे पैरों की सूजन कम होने लगती है. 👌अदरक के फायदे पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌अदरक भी पैरों की सूजन दूर करने में सहायक होता है. अपने पैरों की सूजन को दूर करने के लिए अदरक को छिल कर खाये या अदरक की चाय भी पी सकते हैं. 👌धनिए के बीज का उपयोग पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌धनिए के बीज पैरों की सूजन को दूर करने में बहुत फायदेमंद है. एक कप पानी में 2 से 3 चम्मच धनिए के डालें. इसको तब तक उबालें जब तक कप का पानी आधा ना हो जाए. जब यह काढ़ा तैयार हो जाए तो इसे दिन में दो बार पीए. इस काढ़े का सेवन जब तक पैरों की सूजन कम ना हो जाए करते रहे. 👌नींबू पानी है फायदेमंद पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌निम्बू पानी भी पैरों की सूजन दूर करने का एक अच्छा उपाय है. एक कप हल्के गर्म पानी में 2 टेबलस्पून लेमन जूस मिक्स करें और इसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं. अब इस निम्बू पानी का रोजाना सेवन करें. इससे पैरों की सूजन को आसानी से दूर किया जा सकता है. 👌एक्सएरसाइज भी है जरुरी पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌पैरों की सूजन से राहत पाने के लिए प्रतिदिन एक्सरसाइज करनी चाहिए. एक्सरसाइज में आप स्विमिंग भी कर सकते हैं. सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 मिनट तक जॉगिंग या वॉकिंग करें. पैरों को स्ट्रेच करने वाली एक्सरसाइज करें और अपने रोजमर्रा के शूड्यूल में योगा करें. इससे पैरों की सूजन को आसानी से कम किया जा सकता है.👌 *टमाटर खाओ, डिप्रेशन से छुट्टी पाओ.!* * टमाटर हर सब्जी को जायकेदार बनाता है, यह तो सब जानते हैं लेकिन एक नए अध्ययन में इसके एक अन्य गुण का पता चला है कि यह डिप्रेशन से दूर रखने में भी सहायक है। * अनुसंधानकर्ताओं ने इसके लिए 70 अथवा उससे अधिक उम्र के करीब 1000 पुरुष और महिलाओं के भोजन की आदत और उनके मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि जो लोग एक हफ्ते में दो से छह बार टमाटर खाते हैं उन्हें उन लोगों की तुलना में डिप्रेशन से पीडि़त होने का खतरा 46 प्रतिशत कम होता है जो हफ्ते में केवल एक बार टमाटर खाते हैं अथवा नहीं खाते। * चीन और जापान के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि अन्य फलों और सब्जियों के सेवन से यह लाभ नहीं मिलता। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में गोभी, गाजर, प्याज और कद्दू बहुत कम लाभदायक हैं या बिल्कुल भी फायदेमंद नहीं हैं। टमाटर में एंटीआक्सीडेंट रसायन काफी होता है जो कुछ बीमारियों से बचाने में मददगार होता है। ************************************************* 🌞 🕉~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🕉🌞 *।। श्री हरि : ।।* ⛅ *दिनांक - 10 मई 2020* ⛅ *दिन - रविवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - ग्रीष्म* ⛅ *मास - ज्येष्ठ* ⛅ *पक्ष - कृष्ण* ⛅ *तिथि - सुबह 08:04 तक तृतीया* ⛅ *नक्षत्र - रात्रि 04:13 तक मूल* ⛅ *योग - सुबह 06:43 से सिद्ध* ⛅ *राहुकाल - शाम 05:17 से 06:55* ⛅ *सूर्योदय - 06:04* ⛅ *सूर्यास्त - 19:06* ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय 10:26)* 💥 *विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌷 *गर्मी की बीमारियों की जड़ें काटनेवाला है पेठा* 🌷 🍈 *पका हुआ पेठा त्रिदोषशामक, विशेषत: पित्तशामक है, गर्मी से जो बीमारियाँ होती हैं यह उन सबकी जड़ें काटता है।* 🚶🏻 *पेठा थकान तो मिटाता है, साथ में नींद भी अच्छी लाता है, पका पेठा अमृत के समान है, पेठे के बीज भी बादाम के समान गुणकारी हैं ।* 🌷 *परेशानियां दूर करने के लिए* 🌷 🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार शिवजी की इच्छा से ही इस संपूर्ण सृष्टि की रचना ब्रह्माजी ने की है और इसका पालन भगवान विष्णु कर रहे हैं, इसलिए शिवजी की पूजा से बड़ी-बड़ी परेशानियां भी दूर हो सकती हैं, सोमवार शिवजी की पूजा के लिए श्रेष्ठ दिन माना जाता है, यहां जानिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शिव पूजा के 10 उपाय, इनमें से कोई 1 भी हर सोमवार को करेंगे तो शिवजी की कृपा से आपकी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं...* 1⃣ *अगर किसी व्यक्ति की शादी में बाधाएं आ रही हैं तो शिवलिंग पर केसर मिला कर दूध चढ़ाएं, माता पार्वती की भी पूजा करें।* 2⃣ *मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं, इस दौरान ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें, ये उपाय सोमवार से शुरू करें और इसके बाद रोज करें, इससे बुरा समय दूर हो सकता है।* 3⃣ *21 बिल्व पत्रों पर चंदन से ऊँ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, इससे शिवजी की कृपा मिलती है।* 4⃣ *शिवजी के वाहन नंदी यानी बैल को हरा चारा खिलाएं, इससे जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है और परेशानियाँ खत्म होती हैं।* 5⃣ *अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी, साथ ही पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।* 6⃣ *तांबे के लोटे में पानी लेकर काले तिल मिलाएं और शिवलिंग पर चढ़ाएं, ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें, इससे शनि के दोष दूर होते हैं।* 7⃣ *घर में पारद शिवलिंग लेकर आए और रोज इस शिवलिंग की पूजा करें, इससे आपकी आमदनी बढ़ाने के योग बन सकते हैं।* 8⃣ *आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। 11 बार इनका जलाभिषेक करें, इस उपाय से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।* 9⃣ *शिवलिंग पर शुद्ध घी चढ़ाएं, फिर जल चढ़ाएं, इससे संतान संबंधी परेशानियां दूर हो सकती हैं।* 1⃣0⃣ *भगवान शिव का अभिषेक करें। ऊँ नमः शिवाय मंत्र जप करें, शाम को शिव मंदिर में 11 घी के दीपक जलाएं। 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻 ************************************************ *कोरोना को lightly लेते हुए , Lockdown में बाहर निकलने वालों का हश्र... *एक दिन................... *अचानक बुख़ार आता है! *गले में दर्द होता है! *साँस लेने में कष्ट होता है! *Covid टेस्ट की जाती है! *3 दिन तनाव में बीतते हैं... *अब टेस्ट +ve आने पर-- *रिपोर्ट नगर निगम जाती है🙇 *रिपोर्ट से हॉस्पिटल तय होता है🤦‍♂️ *फिर एम्बुलेंस कॉलोनी में आती है💁‍♂️ *कॉलोनीवासी खिड़की से झाँक कर आपको देखते हैं🤦‍♀️ *कुछ एक की संवेदना आप के साथ है😌 *कुछ मन ही मन हँस रहे होते हैं💁‍♀️ *एम्बुलेंस वाले उपयोग के कपड़े रखने का कहते हैं...🙇 *बेचारे घरवाले आपको जी भर कर देखते हैं😓 *आपकी आँखों से आँसू बोल रहे होते हैं...😢 तभी... *"चलो जल्दी बैठो" आवाज़ दी जाती है, *एम्बुलेंस का दरवाजा बन्द... *सायरन बजाते रवानगी... *फिर कॉलोनी सील कर दी जाती है...🤷‍♂ *14 दिन पेट के बल सोने को कहा जाता है... *दो वक्त का जीवन जीने योग्य खाना मिलता है...🙇 *Tv, mobile सब अदृश्य हो जाते हैं... *सामने की दीवार पर अतीत, और भविष्य के दृश्य दिखने लगते *हैं... *अब *आप ठीक हो गए... तो ठीक... *वो भी जब 3 टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आ जाएँ... *तो घर वापसी... *लेकिन *इलाज के दौरान यदि आपके साथ कोई अनहोनी हो गई😢 तो... आपके शरीर को प्लास्टिक में रैप करके सीधे शवदाहगृह... *शायद अपनों को अंतिमदर्शन भी नहीं...😱 *कोई अंत्येष्टि क्रिया भी नहीं...🤷‍♂ *सिर्फ *परिजनों को एक डेथ सर्टिफिकेट💁‍♂️ *और....खेल खत्म🙆‍♂️🤷‍♂😒 *बेचारा चला गया... अच्छा था *इसीलिए, *बेवजह बाहर मत निकलिए... *घर में सुरक्षित रहिए... *'बाह्यजगत का मोह' और 'हर बात को हल्के में लेने' की आदतें त्यागिए... *जीवन अनमोल है....🙏🏻🙏🏻 ************************************************* *एक औरत, रोटी बनाते बनाते "ॐ भगवते वासूदेवाय नम: " का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही....* *एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर झांकी तो आठ साल का चुन्नू चित्त पड़ा था, खुन से लथपथ। मन हुआ दहाड़ मार कर रोये। परंतु घर मे उसके अलावा कोई था नही, रोकर भी किसे बुलाती, फिर चुन्नू को संभालना भी तो था। दौड़ कर नीचे गई तो देखा चुन्नू आधी बेहोशी में माँ माँ की रट लगाए हुए है। *अंदर की ममता ने आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि चुन्नू को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर भगवान को जी भर कर कोसती रही, बड़बड़ाती रही, हे कन्हैया क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा, जो मेरे ही बच्चे को *खैर डॉक्टर सा. मिल गए और समय पर इलाज होने पर चुन्नू बिल्कुल ठीक हो गया। चोटें गहरी नही थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई। *रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। भगवान से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता प्रभुसत्ता को चुनौती दे रही थी। *उसके दिमाग मे दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे चुन्नू आंगन में गिरा की एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने चापाकल का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां चिंटू गिरा पड़ा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो..? उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के चुन्नू को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था चुन्नू। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती। *फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था। *उसका सर प्रभु चरणों मे श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन प्रभु से अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी। *तभी टीवी पर ध्यान गया तो प्रवचन आ रहा था । प्रभु कहते हैं, "मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, लेकिन तुम्हे इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।" *उस औरत ने घर के मंदिर में झांक कर देखा, कन्हैया मुस्कुरा रहे थे। *मेरे कान्हा !! *तेरी आँखो में क्या खूब नूर होता है, *तेरी नजरों से कहां कोई दूर होता हैं! *एक बार रख दे कदम जो तेरी चौखट पर, *वो बार-बार आने को मजबूर होता है! *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🏻 *तुलसी के शब्दों में क्या ही सुन्दर चित्रण है...... *'ग्रह गृहीत पुनि वात वस, ता पुनि बीछी मार।* *ताहि पियाइय वारुणी, कहिय कहा उपचार॥* *अर्थात् एक तो बन्दर स्वभावतः चंचल, दूसरे उसे वातरोग (histeria), तीसरे उसे बिच्छू ने डंक मार दिया, चौथे उसे शराब भी पिला दी गयी। अब विचार करो, उस बन्दर की क्या दशा होगी? यही बात जीवों के विषय में भी है। एक तो अनादिकाल का पापमय जीव, दूसरे कुसंस्कार-जन्य कुप्रवृत्तियाँ, तीसरे कुसंग का बाह्य वातावरण, चौथे बुद्धि का तीनों ही गुणों के वशीभूत होकर नशे में हो जाना; अब इस बेचारे जीव रूपी बन्दर का भगवान् ही भला करे। किन्तु, घबड़ाने की बात नहीं; अभ्यास करते-करते सब ठीक हो जायेगा। एक महान् जंगली शेर भी बिजली के दण्ड ( हण्टर) के इशारे पर नाचता है। देखो, साधक सर्वप्रथम अपनी बुद्धि को ही ठीक करें, क्योंकि गीताकार के सिद्धान्तानुसार, *'बुद्धिनाशात् प्रणश्यति'* अर्थात् बुद्धि के विकृत होने से ही जीव का पतन होता है। हाँ, तो साधक ने अपनी बुद्धि को जब महापुरुष एवं भगवान के ही हाथ बेचा है, तब उसे अपनी बुद्धि को महापुरुष के आदेश से ही सम्बद्ध रखना चाहिये। लोक में भी देखो, एक कूपमण्डूक अत्यन्त मूर्ख ग्रामीण भी अपने मुकदमे में किसी व्युत्पन्न वकील के द्वारा प्रमुख कानूनी विषयों को अपनी बुद्धि में रखकर धुरन्धर वकील की जिरह में भी नहीं उखड़ता। *कुछ लोगों का कहना है कि इसमें क्या रखा है? यह तो अत्यन्त ही साधारण सी बात है। साधक मन-बुद्धि को निरन्तर भगवद्विषय में लगाये रहे तो बहिरंग, अन्तरंग दोनों ही कुसंग न व्याप्त होंगे। किन्तु निरन्तर भगवद्विषय में मन-बुद्धि का लगाव पूर्व में सहसा नहीं हो सकता। वह तो धीरे-धीरे अभ्यास के द्वारा ही होगा। तुलसी के शब्दों में *'कहत सुगम करनी अपार, जाने सोइ जेहि बनि आई।'* यह कुसंग भी कई प्रकार का होता है। एक तो भगवद्विषयों से विपरीत विषयों का पढ़ना, दूसरे सुनना, तीसरे देखना, चौथे सोचना आदि। किन्तु, इन सब में सबसे भयानक कुसंग सोचना ही है, क्योंकि अन्त में पढ़ने, सुनने एवं देखने आदि वाले कुसंग भी यहीं पर आ जाते हैं। फिर यहीं से कार्यवाही आरम्भ हो जाती है। सोचते-सोचते मनोवृत्तियाँ उसी के अनुकूल होती जाती हैं एवं बुद्धि भी मोहित हो जाती है, जिसका दुष्परिणाम यह होता है कि कुछ काल बाद मन पूर्णतया उन विपरीत विषयों में लीन हो जाता है। मुझे इस सम्बन्ध में गीता की अधोनिर्दिष्ट अर्धाली अत्यन्त ही प्रिय है- *ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।* (गीता 2-62) *अर्थात् जिस विषय का हम बार-बार चिन्तन करते हैं, उसी में हमारी आसक्ति हो जाती है। *किन्तु ध्यान में रखने की बात यह है कि चिन्तन तो पश्चात् होता है, पूर्व में तो भगवद्विपरीत विषयों को सुनना, पढ़ना आदि है । अतएव यदि पूर्व कारण से बचा जाय तो अत्यन्त ही सरलतापूर्वक कुसंग से निवृत्ति हो सकती है। यदि आग को लकड़ी न मिले तो अग्नि कैसे बढ़ेगी? फिर यदि साथ ही उस अन्तरंग कुसंग रूपी आग में श्रद्धायुक्त सत्संग रूपी जल भी छोड़ा जाय, तब तो आग धीरे-धीरे स्वयं ही बुझ जायगी। देखो, प्रायः हम लोग यह सब जानते हुए भी बहादुरी दिखाने का स्वांग रचते हैं, अर्थात् कुसंग की प्रारम्भिक अवस्था में ही सावधान न होकर यह कह देते हैं 'अरे, कुसंग हमारा क्या कर लेगा, हम सब कुछ समझते हैं ।' अरे भाई! विचार करो कि यद्यपि डॉक्टर यह समझता है कि अमुक विष कारक है, किन्तु यदि परिहास में भी पी लेता है तो उसका वह जानना थोड़े ही काम देगा, विष तो अपना मारक गुण दिखायेगा ही *अतएव साधारण कुसंग को भी साधारण न समझना चाहिये, वरन् इसे अत्यन्त महान् शत्रु समझकर तब तक इसे दूर रखना चाहिये, जब तक शुभ मुहूर्त न आ जाय । तुलसी के शब्दों में- *अब मैं तोहि जान्यो संसार।* *बाँधि न सकइ मोहि हरि के बल, प्रकट कपट आगार।* *सहित सहाय तहाँ बसु शठ जेहि, हृदय न नन्द कुमार॥* *अर्थात् हे संसार ! अब मैं तुझे भली भाँति समझ गया। अब तू मुझे किसी प्रकार नहीं बाँध सकता, क्योंकि मेरे पास श्रीकृष्ण का बल है। अरी माया! अब तू अपने दलबल को लेकर वहाँ जाकर अपना डेरा जमा, जिसके हृदय में नंदकुमार का वास न हो। यहाँ अब तेरी कुछ भी दाल न गल सकेगी। तात्पर्य यह है कि भगवत्प्राप्ति के पूर्व किसी भी जीव को यह दावा करने का अधिकार नहीं है कि कुसंग मेरा कुछ भी नहीं कर सकता। यह तो सिद्ध महापुरुषों के ही क्षेत्र की बात है कि उनके ऊपर कुसंग का प्रभाव नहीं पड़ सकता। *'चन्दन विष व्यापै नहीं, लिपटे रहत भुजंग'*, इस रहीम की उक्ति के अनुसार, सिद्ध महापुरुष रूपी चन्दन के वृक्ष पर ही कुसंग रूपी साँपों के विष का प्रभाव नहीं पड़ता। *जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु महाप्रभु जी। *इस पंक्ति को, एक बार जरूर पढ़े.....* *🌹 भावनाएं 🌹* *काम, क्रोध, लोभ, मोह,* *ईर्ष्या, प्रेम, अहंकार आदि, सभी भावनाएं, एक साथ एक द्वीप पर रहतीे थी;* *एक दिन समुद्र में एक तूफान आया और द्वीप डूबने लगा;* *हर भावना डर ​​गई और अपने अपने बचाव का रास्ता ढूंढने लगी;* *लेकिन प्रेम ने सभी को बचाने के लिए एक नाव बनायी;* *सभी भावनाओं ने प्रेम का आभार जताते हुए; शीघ्रातिशीघ्र नाव में बैठने का प्रयास किया;* *प्रेम ने अपनी मीठी नज़र से सभी को देखा कोई छूट न जाये;* *सभी भावनाएँ तो नाव मे सवार थी लेकिन अहंकार कहीं नज़र नहीं आया;* *प्रेम ने खोजा तो पाया कि, अहंकार नीचे ही था; ...* *नीचे जाकर प्रेम ने अहंकार को ऊपर लाने की बहुत कोशिश की,लेकिन अहंकार नहीं माना;* *ऊपर सभी भावनाएं प्रेम को पुकार रहीं थी;,"जल्दी आओ प्रेम तूफान तेज़ हो रहा है;,यह द्वीप तो निश्चय ही डूबेगा और इसके साथ साथ हम सभी की भी यंही जल समाधि बन जाएगी;। प्लीज़ जल्दी करो;"* *"अरे अहंकार को लाने की कोशिश कर रहा हूँ; यदि तूफान तेज़ हो जाय तो तुम सभी निकल लेना; मैं तो अहंकार को लेकर ही निकलूँगा" प्रेम ने नीचे से ही जवाब दिया; और फिर से अहंकार को मनाने की कोशिश करने लगा;* *लेकिन अहंकार कब मानने वाला था यहां तक कि वह अपनी जगह से हिला ही नहीं;* *अब सभी भावनाओं ने एक बार फिर प्रेम को समझाया कि अहंकार को जाने दो क्योंकि वह सदा से जिद्दी रहा है;* *लेकिन प्रेम ने आशा जताई,बोला, "मैं अहंकार को समझाकर राजी कर लूंगा तभी आऊगा;..!!"* *तभी अचानक तूफान तेज हो गया और नाव आगे बढ़ गई;* *अन्य सभी भावनाएं तो जीवित रह गईं;* *लेकिन........* *अन्त में उस अहंकार के कारण प्रेम मर गया;* *अहंकार के चलते हमेशा प्रेम का ही अंत होता है;* *आईये अहंकार का त्याग करते हुए प्रेम को अपने से जुदा न होने दें...!!!* *अरी सखी.... *इन्हें नज़र भर के क्या देखा... *नज़र के हर मोड़ पर एक यही नज़र आने लगे.... 🌴🌹🌴🌷 *जय श्री राधेकृष्णा*🥀🥀🙏🏻

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Sunita Pawar May 10, 2020

🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹 *लेती नहीं दवाई "माँ",* *जोड़े पाई-पाई "माँ"।* *दुःख थे पर्वत, राई "माँ",* *हारी नहीं लड़ाई "माँ"।* *इस दुनियां में सब मैले हैं,* *किस दुनियां से आई "माँ"।* *दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,* *गरमागर्म रजाई "माँ" ।* *जब भी कोई रिश्ता उधड़े,* *करती है तुरपाई "माँ" ।* *बाबू जी तनख़ा लाये बस,* *लेकिन बरक़त लाई "माँ"।* *बाबूजी थे सख्त मगर ,* *माखन और मलाई "माँ"।* *बाबूजी के पाँव दबा कर* *सब तीरथ हो आई "माँ"।* *नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,* *मां जी, मैया, माई, "माँ" ।* *सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,* *मगर नहीं कह पाई "माँ" ।* *घर में चूल्हे मत बाँटो रे,* *देती रही दुहाई "माँ"।* *बाबूजी बीमार पड़े जब,* *साथ-साथ मुरझाई "माँ" ।* *रोती है लेकिन छुप-छुप कर,* *बड़े सब्र की जाई "माँ"।* *लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,* *रह गई एक तिहाई "माँ" ।* *बेटी रहे ससुराल में खुश,* *सब ज़ेवर दे आई "माँ"।* *"माँ" से घर, घर लगता है,* *घर में घुली, समाई "माँ" ।* *बेटे की कुर्सी है ऊँची,* *पर उसकी ऊँचाई "माँ" ।* *दर्द बड़ा हो या छोटा हो,* *याद हमेशा आई "माँ"।* *घर के शगुन सभी "माँ" से,* *है घर की शहनाई "माँ"।* *सभी पराये हो जाते हैं,* *होती नहीं पराई "माँ".* 🌹🙏🤝🌹🙏🤝🌹🤝🙏

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S.G PANDA May 9, 2020

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S.G PANDA May 9, 2020

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S.G PANDA May 8, 2020

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Naresh Jain May 10, 2020

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ǟռʝʊ ʝօֆɦɨ May 10, 2020

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