हनुमानजी

JAI SHRI KRISHNA Dec 18, 2018

हनुमान जी जब पर्वत लेकर लौटते हैं तो भगवान से कहते हैं.

प्रभु आपने मुझे संजीवनी बूटी लेने नहीं भेजा था । आपने तो मुझे मेरी मूर्छा दूर करने के लिए भेजा था ।

*"सुमिरि पवनसुत पावन नामू ।*
*अपने बस करि राखे रामू"*

हनुमान्‌जी ने पवित्र नाम का स्मरण ...

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Sanjay Tiwari Dec 18, 2018

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MaMtA ShArMa Dec 18, 2018

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Shyam Lata Tiwari Dec 18, 2018

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