साईंबाबा

🕉🕉साईं राम 🌹🌹🙏🙏 भगवान नहीं पहुंचे 🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌿☘🌿☘🌿☘🌿☘ एक मोची था जिसे रात में भगवान ने सपना दिया और कहा कि कल सुबह मैं तुझसे मिलने तेरी दुकान पर आ रहा हूँ | मोची बेहद गरीब था और उसकी छोटी सी दुकान से कम आमदनी के जरिये जीवन गुज़ार रहा था | मगर इन सब के बाद भी वह खुश रहता था| वह एक सच्चा, ईमानदार और परोपकारी व्यक्ति था | मोची जब सुबह जागा तो उसने तैयारी शुरू कर दी| भगवन के आव भगत के लिए वह चाय, दूध,नाश्ते और मिठाई का प्रबंध करने लगा |दुकान की साफ सफाई करने के बाद वह भगवान की बात जोहने लगा |उसने देखा की सुबह से हो रही बारिश जारी है और उसमे एक सफाई करने वाली भीगकर ठण्ड से कैंप रही है मोची एक दयालु इंसान था | उसने भगवान के लिए लाए गये दूध से चाय बनाकर उस महिला को पीला दी | दोपहर के समय एक महिला ने उससे कहा मेरा बच्चा भूखा है इसलिए पीने के लिए दूध चाहिए| अब मोची ने बचा हुआ दूध भी बच्चे को पीने के लिए दे दिया| भगवान् अभी तक नहीं आये थे और मोची इंतज़ार कर रहा था | इसी बीच एक बूढ़ा आदमी आया और बोलै मैं भूखा हूं | इतना सुन मोची ने मिठाई उसको दे दी| अब दिन बीत गया था और रात हो गई थी दिनभर के इंतज़ार के बाद मोची से रहा न गया और वह बोलै “वाह रे भगवान सुबह से रात कर दी मैंने तेरे इंतजार में लेकिन तू वादा करने के बाद भी नहीं आया|क्या मैं गरीब ही तुझे बेवकूफ बनाने के लिए मिला था|”तभी आकाशवाणी हुई और भगवान ने कहा कि “मैं आज तेरे पास एक बार नहीं, तीन बार आया और तीनों बार तेरी सेवाओं से में प्रसन्न हूँ | वे तीनों लोग जो दिनभर में तेरी दुकान पर आये वह में ही था | मजबूर व्यक्ति की मदद और दया की भावना ही ईश्वर की सच्ची पूजा है | परोपकार का भाव ईश्वर को प्रसन्न करता है| #👏

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Seema bhardwaj Apr 25, 2019

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Poonam Aggarwal May 22, 2019

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🕉🕉साईं राम🌹🌹🙏🙏 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🙏 *बहुत सुन्दर कहानी - एक बार जरुर पढ़े* कथा उस समय की है जब मुग़ल शासन था । एक पुजारीजी रोज ठाकुरजी के लिए फूल लेकर आते थे और उसके बाद फूलो से माला बनाते थे। और ठाकुर जी को अर्पण करते थे । एक दिन पुजारीजी फूल लेने आये तभी एक गुलाम भी फूल लेने आया तब तक फूल सारे बिक गए । एक ही टोकरी फूलो की बची थी । गुलाम ने फूलवाले से कहा " यह टोकरी मेरे को दे दो" तब पुजारीजी भी बोले " भाई यह फूलो की टोकरी मेरे को दो ।" तब गुलाम बोला कि " पता है यह फूल जिसके लिए ले जाने है वो इस देश की बेगम है। तब पुजारीजी बोले कि " मैं यह फूल इस दुनिया के बादशाह के लिए लेकर जा रहा हूँ ।" गुलाम बोला " अच्छा तो जो भी ज्यादा पैसे देगा वो ले जायेगा।" फूलो की टोकरी थी कुल एक पैसे की तो गुलाम ने बोली लड़ाई - एक रुपया । पुजारी ने डवल कर दी - 2रुपया । तब गुलाम ने 10 रुपया बोला तो पुजारी जी ने 100 रुपया, गुलाम ने 1000 रुपया पुजारी जी ने 2 हज़ार, गुलाम ने 50 हज़ार पुजारी जी 1लाख बोल दिए । गुलाम डर गया की एक लाख रूपये की फूलो की टोकरी ले गया तो बेगम साहेबा नौकरी से तो निकलेगी और मार अलग पड़ेगी । गुलाम ने फूल बाले को मना कर चला गया । तब फूलवाला बोला की पुजारी जी आप एक लाख रूपये की फूल की टोकरी लोगे या मजाक कर रहे हो, पैसे कहा से दोगे तब पुजारीजी बोले कि मेरे पास जो हे वो आज से आपका हे वो एक लाख से ज्यादा है । वो आप का । पुजारी जी ने माला बनाई और प्रभु जी को जैसे ही अर्पण करी तभी ठाकुर जी ने अपना सर झुका दिया । तब पुजारी ने कहा आज क्या बात है प्रभु जी......... आज ऐसा क्यों...... तब ठाकुर जी ने कहा कि........ आज अलग बात है पुजारी जी आपने मेरी माला के लिए अपना सब कुछ लूटा दिया । प्रभु जी ने कहा की जो मेरे लिए सब कुछ लूटा देते है में उस के लिए अपना सर भी झुका देता हूँ । *कहते हैं...... की भगत के बिना प्रभु भी अकेले है ।।* *🙏 ओम् साईं राम 🌹🙏

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🕉🕉साईं राम 🌹🌹🙏 🌹💐💦🍁🌹💦🍁💐 *👉🏿मन के खेल..* *मन की आदत है कि हमे जो मिला है उसे भूलने लगता है । मन सदा उसके लिये रोता है जो मिला न हो । मन की आदत ही भविष्य मे होने की है । वर्तमान मे मन नही टिकता ।* *मन की इस आदत को समझ कर छोड़ देना ही ध्यान है । ध्यान का सीधा अर्थ यही है कि जो है उसके प्रति जागना । जो नही है उसकी फिक्र छोड़नी है ।* *तुम्हारे पास लाख रुपये है तो मन उसको नही देखता , जो दस लाख नही है , उनका हिसाब लगाता है । जब तुम्हारे पास दस हजार थे , सोचा था लाख होंगे तो आनंदित होंगे । दस लाख भी हो जाये , तुम आनंदित होने वाले नही हो क्यो कि तुम मन का सूत्र नही पकड़ पा रहे । वह कहेगा दस करोड़ होने चाहिए ।* *जहाँ तुम पहुँच जाते हो मन वहां से हट जाता है । मन सदा तुम से आगे दौड़ता है । तुम मन्दिर मे हो वह दुकान मे है ,तुम दुकान मे हो वह मन्दिर मे है । तुम बाजार मे हो वह हिमालय की सोचता है ।* *मन का सारा खेल ही उसकी दौड है। मन हमे दौड़ाता है और हम दौड़ते है उसके पीछे पीछे। वो इसलिए कि हम बेहोशी में जीते हैं। हमारी बेहोशी जितनी गहरी होगी हमारी भागदौड़ उतनी ज्यादा होगी।जागरूकता ही इसका हल है। एक जागा हुआ व्यक्ति मन के साथ नहीं दौड़ता बल्कि उसकी दौड़ पर हंसता है। मन की नासमझी पर हंसता है।* *मन का सारा गणित ही उल्टा है.. हम सोचते हैं मन को जिताना रोकेंगे उतना रूकेगा, जितना दबाएंगे उतना दबेगा। लेकिन ऐसा नहीं है मन को जितना रोकोगे वो उतना ही भागेगा। मन को स्वतंत्र छोड़ दो तटस्थ हो जाओ.. वह अब नहीं भागेगा क्योंकि अब उसके पास भागने का कोई कारण नही है। मन भी कारण ढूढता है, निषेधता ढूढता है!!* *🙏🙏🏿🙏🏼 जय जय श्री राधे*🙏🏾🙏🏻🙏🏽

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Poonam Aggarwal Mar 28, 2019

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