शनिदेव

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*🕉ॐ शं शनैश्चराय नमः!🕉 *🙏🏻🌹ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चराय: नमः!🌹🙏🏻* ✡🔯✡🔯✡🔯🔯🔯 एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी – “जय जय रघुवीर समर्थ !” घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोलीमे भिक्षा डाली और कहा, “महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए !” स्वामीजी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा।” दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – “जय जय रघुवीर समर्थ !”उस घर की स्त्रीने उस दिन खीर बनायीं थी, जिसमे बादाम-पिस्ते भी डाले थे।वह खीर का कटोरा लेकर बाहर आयी। स्वामीजीने अपना कमंडल आगे कर दिया। वह स्त्री जब खीर डालने लगी, तो उसने देखा कि कमंडल में गोबर और कूड़ा भरा पड़ा है। उसके हाथ ठिठक गए। वह बोली, “महाराज ! यह कमंडल तो गन्दा है। स्वामीजी बोले, “हाँ, गन्दा तो है, किन्तु खीर इसमें डाल दो।” स्त्री बोली, “नहीं महाराज, तब तो खीर ख़राब हो जायेगी। दीजिये यह कमंडल, में इसे शुद्ध कर लाती हूँ।” स्वामीजी बोले, मतलब जब यह कमंडल साफ़ हो जायेगा, तभी खीर डालोगी न ?” स्त्री ने कहा : “जी महाराज !” स्वामीजी बोले, “मेरा भी यही उपदेश है। मन में जब तक चिन्ताओ का कूड़ा-कचरा और बुरे संस्करो का गोबर भरा है, तब तक उपदेशामृत का कोई लाभ न होगा। यदि उपदेशामृत पान करना है, तो प्रथम अपने मन को शुद्ध करना चाहिए, कुसंस्कारो का त्याग करना चाहिए, तभी सच्चे सुख और आनन्द की प्राप्ति होगी।”

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🌹🌹🙏🙏जय शनिदेव 🌹🌹🙏🙏 🌿🌼🌴🌾🥀🍁🍀☘🌻🌷⚘🌹🌺🌿🌼🌴 एक बार अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे। रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा, मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया! अकबर ने पूछा कौन हे ये? बीरबल - मेरी माता हे! अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ कर फेक दिया और बोला - कितनी माता हैं तुम हिन्दू लोगो की...! बीरबल ने उसका जबाब देने की एक तरकीब सूझी! आगे एक बिच्छुपत्ती (खुजली वाला ) झाड़ मिला। बीरबल उसे दंडवत प्रणाम कर कहा - जय हो बाप मेरे! अकबर को गुस्सा आया... दोनों हाथो से झाड़ को उखाड़ने लगा। इतने में अकबर को भयंकर खुजली होने लगी तो बोला - बीरबल ये क्या हो गया? बीरबल ने कहा आप ने मेरी माँ को मारा इस लिए ये गुस्सा हो गए! अकबर जहाँ भी हाथ लगता खुजली होने लगती। बोला - बीरबल जल्दी कोई उपाय बतायो! बीरबल बोला - उपाय तो है लेकिन वो भी हमारी माँ है। उससे विनती करनी पड़ेगी! अकबर बोला - जल्दी करो! आगे गाय खड़ी थी बीरबल ने कहा गाय से विनती करो कि... हे माता दवाई दो... गाय ने गोबर कर दिया... अकबर के शरीर पर उसका लेप करने से फौरन खुजली से राहत मिल गई! अकबर बोला - बीरबल अब क्या राजमहल में ऐसे ही जायेंगे? बीरबल ने कहा - नहीं बादशाह हमारी एक और माँ है! सामने गंगा बह रही थी। आप बोलिए हर- हर गंगे... जय गंगा मईया की... और कूद जाइए! नहा कर अपनेआप को तरोताजा महसूस करते हुए अकबर ने बीरबल से कहा - कि ये तुलसी माता, गौ माता, गंगा माता तो जगत माता हैं! इनको मानने वालों को ही "हिन्दू" कहते हैं..! हिन्दू एक "संस्कृति" है, "सभ्यता" है... सम्प्रदाय नहीं..! *गौ, गंगा, गीता और गायत्री का सन्मान कीजिये ये सनातन संस्कृति के प्राण स्तंभ है* 🙏 *नमस्कार* 🙏

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sumitra Sep 21, 2019

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simran Feb 22, 2020

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sumitra May 4, 2019

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sumitra Apr 20, 2019

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