वाहेगुरु

कबीर की गुरुबानी नर तुम झूठे , जन्म गवांया ! *क्योंकि हर गीत कुछ कहता है! इस झूठे संसार में, एक झूठ , दूसरे झूठ से मिलकर एक नए झूठ को जन्म देता है. फिर तीनों झूठ केवल झूठ द्वारा पोषित होते हैं और फलफूल कर और नए-नए झूठों से इस झूठे जगत को भ्रमित करते हैं . झूठ का यह सिलसिला सदियों से कायम है और आज तक चल रहा है. महान संत कबीर द्वारा रचित यह भजन गीत हमें जीवन के उस कड़वे सत्य से रूबरू करवाता है , जिसे जानते हुए भी हम शायद जानना नहीं चाहते. नर तुम झूठे झूठा जनम गँवाया ।     उस झूठे का कोई अन्त न पाया ।          झूठे के घर झुठा आया ,झुठे ते परचाया ।       झूठी थारी झूठा भोजन ,झूठ ले सब खाया । झूठे के घर झूठा आया , झूठा ब्याह रचाया ।     झूठा दुल्हा झूठी दुल्हन ,झूठे ब्याहन आया ।         झुठे नर सब झुठी नारी ,झूठे बालक आया ।      झूठी छाती ,झूठी कोखी ,झूठी दुध पिलाया ।   साँच कहु मै झूठ न बोलू साँचे को झुठलाया । कहे कबीर सोई जन साँचा अपने माहि समाया ।  कबीर की इन पंक्तियों में छिपी मानव प्रकृति की एक ऐसी विशेषता समझाई गई है जिसपर हममें से किसी को भी आपत्ति हो सकती है . लेकिन आपत्ति अपनी जगह और सत्य अपनी जगह. इस सत्य की वास्तविकता को झुठलाया नहीं जा सकता कि हमारा जीवन केवल झूठ पर टिका हुआ रहता है.एक ऐसा झूठ जिसका न तो कोई ओर है न छोर .हम हर झूठ को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं जिसे सुनकर सत्य भी शरमा जाए. कबीर ने सही कहा कि झूठे के घर झूठा ही जा रहा है. और पूरा जीवन वह भी झूठ सीख कर जीवन यापन करता है. लेकिन वह अपने प्रत्येक झूठ को सत्य बनाकर पेश करने में माहिर हो जाता है. यहां ऐसा कहने का संदर्भ यह है कि हमारा जीवन हम जिस प्रकार से जीते हैं वह हमें ,हमारे ईश्वर द्वारा प्रदत्त मानव मूल्यों और प्रकृति से एकदम भिन्न होता है. हम अपने जीवन की यथार्थता और सार्थकता भूलकर न जाने किस मोहमाया के फेर में पड़कर पूरा जीवन यूंही एक ऐसे झूठ के सहारे बिताने में मगन रहते हैं जिसका अंत दुखद ही होना है. आज देखा जाए तो हमारे सभी रिश्ते -नाते झूठ पर ही टिक कर ही निभ पा रहे हैं. यदि सत्य जान लें तो शायद टिक ही न पाए. जबकि ऐसा होना ही नहीं चाहिए. सत्य को स्वीकार कर रिश्ते निभाना ही सबसे बड़ी बात है. काश हम जीवन की उन वास्तविकताओं साथ जी पाते जिनके लिए हमें यह अनमोल जन्म मिला था. हम न जाने किन झूठे पाखंड और प्रपंचों में फंस चुके हैं. ईश्वर जिसे कभी देखा नहीं उसका हमने व्यवसायीकरण कर दिया है.उस सर्वोच्च दैवीय शक्ति के नाम पर हम अपनी दुकानें चला रहे हैं और अंधाधुंध पैसा कमा रहे हैं. यह सब केवल एक झूठ और भ्रम के अतिरिक्त और कुछ नहीं है . यह झूठा मार्ग ईश्वर तक कभी नहीं ले जा सकता. अपने काल्पनिक ईश्वर के मोह में हम जीवन की कई ऐसी संंवेदनशील वास्तविकताओं से मुंह छिपा कर रहते हैं जिन्हें समझना हमारे लिए शायद ज्यादा आवश्यक है. केवल अपनी कल्पनाओं के ईश्वर के सहारे जी कर हम अपना जीवन व्यर्थ कर रहे हैं.  हमारा मन एक बड़ा ठग है और लगातार हमें झूठे प्रपंचों में फंसाए रखता है.हमें कोशिश करनी चाहिए इस ठग से सावधान रहें . यही मन हमें अपना,पराया,मेरा,तुम्हारा करना सिखाता है. हमें याद रखना चाहिए कि हम सबका अंत एक ही है. अत: तेरा,मेरा,अपना,पराया करने वाले हर झूठ को अपने जीवन से निकाल बाहर करें. हम सब एक हैं. कबीर के अनुसार  "सब मे हम है सब हमरे माही ,पंडित अन्धरा समझत नाही!" जो तुम हो वही हम है जो हम है वही तुम हो ! लेकिन ये सब बातें हमारे धर्म के ठेकेदार हमारी आँखों पर झूठ का पर्दा डालकर रख अपने हित साधते हैं और जीवन के इस परम सत्य को समझने नहीं देते! अब यहां आखिर में यह प्रश्न उठता है कि जब सब झूठे हैं तो फिर सच्चा कौन है ?   कबीर समझाते हैं कि सच्चा केवल वही है जिसने ये धर्म के नाम पर किए जाने वाले पाखंड , और दिखावे के चलते तीर्थ ब्रत, मन्दिर, मस्जिद,गिरिजा में जाकर चढ़ाना बंद कर दिया है. वैसे एक बात यदि दिल पर हाथ रख कर सच्चे मन से पूछी जाए कि क्या हमारी कोई हैसियत है कि हम उस सृष्टिकर्ता को तुच्छ वस्तुएं भेंट कर सकें? जगत में सच्चा केवल वही है जिसने सब कुछ छोड़कर केवल अपने आत्मस्वरुप में गहरा उतर कर जीवन को एक नए सिरे से समझने का प्रयास किया है. वह नया सिरा है कि आपस में प्रेमपूर्वक, एकदूसरे का सहयोग करते हुए जीवन बिताएं . एक ऐसा जीवन जो केवल कल्पनाओं के सहारे नहीं चलता . जहां केवल यथार्थ के धरातल पर रहकर इस धरती पर रहने वाले हर जीव,जंतु,वनस्पति और प्राणियों के प्रति प्रेम,समर्पण और सेवा का भाव निहित रहता है. जो ऐसा करता है केवल वही सच्चा है, वरना सब झूठे हैं! जब जब इसे सुनता हूं अश्रुधारा निकल पड़ती है. हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय जय श्री भोलेनाथ नमस्कार 🙏 जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी नमस्कार शुभ संध्या वंदन 🌄🎪 👣 🍃🌿🌺वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 मित्रों जय श्री राम 👏 🚩 जय श्री सतनाम वाहेगुरू जी

+79 प्रतिक्रिया 18 कॉमेंट्स • 73 शेयर
Anita Sharma Nov 12, 2019

+38 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 11 शेयर
Manoj Prasadh Nov 8, 2019

+22 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 8 शेयर
Sunita Pande Nov 26, 2019

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 9 शेयर
Mahesh Sharma Nov 12, 2019

+9 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 4 शेयर
shyamlal Dec 29, 2019

+10 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर
niren sarkar Sep 12, 2019

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 7 शेयर