देवीदर्शन

sumitra Jan 29, 2020

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sumitra Feb 14, 2020

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Ashish shukla Jan 31, 2020

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Renu Singh Jan 31, 2020

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sumitra Jan 31, 2020

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🚩🚩जय माता दी 🚩🚩 🙏🌹🙏🌹💐🌹🙏🌹 *🎈भीतर का घर🎈* *एक मकान मालिक को अपना घर बाहर से बहुत सुन्दर लगता था, भीतर छोड़ बस बाहर ही रहने लगा। बाहर से रोज साफ करता, भीतर जाना भूल ही गया, बाहर से लोग तारीफ करते तो बहुत खुश रहता पर अंदर गंदगी फैलने लगी।* *एक दिन दीमक दरवाजें, खिडकियों से बाहर आने लगे तो घबराया कि मेरे मकान की सुदरता को क्या हो गया? बाहर से साफ करे पर दीमक तो भीतर से आ रही थी। अंदर झाके तो घर बदबू से भरा हुआ था, भीतर जाया न जाये, बाहर से सफाई न हो पाये। काश बाहर की सफाई के साथ-साथ भीतर भी साफ रखता तो घर भीतर बाहर से साफ रहता।* *ऐ इंसान, मकान है, तेरा शरीर और मालिक है तूँ, पर ध्यान सिर्फ बाहर चमड़ी और शरीर रूपी मकान पर लगा रखा है। भीतर काम, कोध्र, लोभ, मोह का दीमक लग चुका है और बाहर इनिद्रयों के दरवाजों से बाहर भी प्रकट हो रहा है, बाहर से छुटकारा पाने का प्रयास चल रहा है, आखों की खिड़की से शास्त्रों को पढा जा रहा है, मूंह के दरवाजें से भजन गाये जा रहे हैं, कानों द्वारा सतसंग सुने जा रहे हैं, क्या बस इससे ही भीतर के विकार यानि दीमक मर जायेगी?* *अगर इन अंदर के विकारों को ख़त्म करना है तो पूरन संतों से नाम लेकर भजन सिमरन करना चाहिए जी।* 🙏🌹🙏💐🙇💐🙏🌹

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🌹सुप्रभात नमन 🌹 🔯 माता लक्ष्मी की कथा 🔯 ----------------------------- एक बूढ़ा ब्राह्मण था वह रोज पीपल को जल से सींचता था । पीपल में से रोज एक लड़की निकलती और कहती पिताजी मैं आपके साथ जाऊँगी। यह सुनते-सुनते बूढ़ा दिन ब दिन कमजोर होने लगा तो बुढ़िया ने पूछा की क्या बात है? बूढ़ा बोला कि पीपल से एक लड़की निकलती है और कहती है कि वह भी मेरे साथ चलेगी। बुढ़िया बोली कि कल ले आना उस लड़की को जहाँ छ: लड़कियाँ पहले से ही हमारे घर में है वहाँ सातवीं लड़की और सही। अगले दिन बूढ़ा उस लड़की को घर ले आया। घर लाने के बाद बूढ़ा ब्राह्मण आटा माँगने गया तो उसे पहले दिनों की अपेक्षा आज ज्यादा आटा मिला था। जब बुढ़िया वह आटा छानने लगी तो लड़की ने कहा कि " लाओ माँ, मैं छान देती हूँ।" जब वह आटा छानने बैठी तो परात भर गई। उसके बाद माँ खाना बनाने जाने लगी तो लड़की बोली कि "आज रसोई में मैं जाऊँगी" तो बुढ़िया बोली कि ना, तेरे हाथ जल जाएँगे लेकिन लड़की नहीं मानी और वह रसोई में खाना बनाने गई तो उसने तरह-तरह के छत्तीसों व्यंजन बना डाले और आज सभी ने भरपेट खाना खाया। इससे पहले वह आधा पेट भूखा ही रहते थे। रात हुई तो बुढ़िया का भाई आया और कहने लगा कि दीदी मैं तो खाना खाऊँगा। बुढ़िया परेशान हो गई कि अब खाना कहाँ से लाएगी। लड़की ने पूछा की " क्या बात है माँ ?" उसने कहा कि तेरा मामा आया है और रोटी खाएगा लेकिन रोटी तो सबने खा ली है अब उसके लिए कहाँ से लाऊँगी। लड़की बोली कि " तू चिंता मत कर मैं बना दूँगी " और वह रसोई में गई और मामा के लिए छत्तीसों व्यंजन बना दिए। मामा ने भरपेट खाया और कहा भी कि ऎसा खाना इससे पहले उसने कभी नहीं खाया है। बुढ़िया ने कहा कि भाई तेरी पावनी भाँजी है उसी ने बनाया है। शाम हुई तो लड़की बोली कि माँ चौका लगा के चौके का दीया जला देना, कोठे में मैं सोऊँगी। बुढ़िया बोली कि ना बेटी तू डर जाएगी लेकिन वह बोली कि ना मैं ना डरुँगी, मैं अंदर कोठे में ही सोऊँगी। वह कोठे में ही जाकर सो गई। आधी रात को लड़की उठी और चारों ओर आँख मारी तो धन ही धन हो गया। वह बाहर जाने लगी तो एक बूढ़ा ब्राह्मण सो रहा था। उसने देखा तो कहा कि बेटी तू कहाँ चली? लड़की बोली कि मैं तो दरिद्रता दूर करने आई थी। अगर तुम्हें दूर करवानी है तो करवा लो। उसने बूढे के घर में भी आँख से देखा तो चारों ओर धन ही धन हो गया। सुबह सवेरे सब उठे तो लड़की को ना पाकर उसे ढूंढने लगे कि पावनी बेटी कहां चली गई। बूढ़ा ब्राह्मण बोला कि वह तो लक्ष्मी माता थी जो तुम्हारे साथ मेरी दरिद्रता भी दूर कर गई। हे लक्ष्मी माता ! जैसे आपने उनकी दरिद्रता दूर की वैसे ही सबकी करना बोलो 👉🌹जय माँ लक्ष्मी🌹

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